मारुति सुजूकी इंडिया लिमिटेड (एमएसआईएल) ने 2025 में रेल से 5,85,000 से अधिक वाहनों की ढुलाई की। यह पिछले वर्ष की तुलना में 18 प्रतिशत अधिक है। कंपनी ने कहा कि वर्ष 2025 में उसके व्हीकल डिस्पैच में रेल की हिस्सेदारी लगभग 26 प्रतिशत रही। यह 2024 में 23.5 प्रतिशत थी और वर्ष 2016 के 5.1 प्रतिशत के मुकाबले तेज वृद्धि है। इससे कार्बन उत्सर्जन कम करने, तेल की खपत घटाने और राजमार्गों पर भीड़भाड़ कम करने में मदद मिली।
मारुति सुजूकी के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्याधिकारी हिसाशी ताकेउची ने कहा कि 2025 न केवल बिक्री के लिहाज से महत्त्वपूर्ण था, बल्कि रेल-आधारित ढुलाई में हासिल सफलता के लिहाज से भी खास रहा। उन्होंने मानेसर इकाई में भारत के सबसे बड़े ऑटोमोबाइल इन-प्लांट रेलवे साइडिंग के शुभारंभ और चिनाब रेल पुल के माध्यम से कश्मीर घाटी में रेल से वाहन ढुलाई का जिक्र किया, जो दुनिया का सबसे ऊंचा रेलवे आर्च ब्रिज है।
ताकेउची ने कहा कि कंपनी का मध्यावधि का लक्ष्य वित्त वर्ष 2031 तक रेल-आधारित वाहन ढुलाई की हिस्सेदारी को बढ़ाकर 35 प्रतिशत करना है, जो भारत के 2070 के नेट-जीरो कार्बन उत्सर्जन लक्ष्य के साथ अपनी लॉजिस्टिक्स रणनीति के अनुरूप है।
उन्होंने कहा कि मारुति ने स्थिरता के लिए ‘सर्कुलर मोबिलिटी’ दृष्टिकोण अपनाया है। इसका उद्देश्य डिजाइन, निर्माण, लॉजिस्टिक्स और एंड-ऑफ-लाइफ व्हीकल मैनेजमेंट सहित वाहनों के इस्तेमाल में कार्बन उत्सर्जन कम करना है। एमएसआईएल भारत में तैयार वाहनों को दूसरी जगहों तक पहुंचाने के लिए रेलवे का उपयोग करने वाली शुरुआती कंपनियों में से एक रही है। वह 2013 में ऑटोमोबाइल फ्रेट ट्रेन ऑपरेटर (एएफटीओ) लाइसेंस पाने वाली पहली कार निर्माता कंपनी थी।