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‘AI से बदलेगा विज्ञान का भविष्य’, गूगल डीपमाइंड के पुश्मीत कोहली ने बताया भारत क्यों है सबसे खास

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कोहली ने कहा कि सबसे पहले, भारत को एआई की बहुत जरूरत है। अगर आप देश के सामने आने वाली चुनौतियों की बात करें तो हेल्थकेयर इसका एक अच्छा उदाहरण है

Last Updated- February 10, 2026 | 9:54 PM IST
Pushmeet Kohli
गूगल डीपमाइंड के उपाध्यक्ष (रिसर्च) पुश्मीत कोहली

गूगल डीपमाइंड के उपाध्यक्ष (रिसर्च) पुश्मीत कोहली का मानना है कि एआई और विज्ञान दुनिया की कुछ सबसे बड़ी समस्याओं को हल कर सकते हैं। कोहली ने एआई इम्पैक्ट समिट में भाग लेने के लिए भारत आने से पहले विज्ञान पर एआई के प्रभाव, रिसर्च में भारत की भूमिका और भारत में गूगल डीपमाइंड के मौजूदगी के बारे में शिवानी शिंदे को साक्षात्कार में विस्तार से बताया। उनसे बातचीत के अंश:

एआई से जुड़ी ज्यादातर चर्चाएं लार्ज लैंग्वेज मॉडलों (एलएलएम) पर केंद्रित हैं। आप एआई को विज्ञान या यहां तक कि रोजमर्रा की जिंदगी कोर कैसे प्रभावित करते हुए देखते हैं?

जब हम एआई के बारे में सोचते हैं, तो एक बात स्पष्ट करने की आवश्यकता है। एआई के अलग-अलग रूप हैं। इंटेलिजेंस खुद कई स्तरों पर फैली हुई है। एक है जिसे हम कॉमन इंटेलिजेंस कह सकते हैं, जो हम सभी के पास है। फिर एक्सपर्ट-लेवल इंटेलिजेंस है। एक्सपर्ट-लेवल इंटेलिजेंस के अलावा एक और श्रेणी है – जिसे हम सुपरह्यूमन इंटेलिजेंस कह सकते हैं। इसका एक अच्छा उदाहरण प्रोटीन-फोल्डिंग की समस्या है।

अगर एआई शोध में इस तरह की क्षमता ला रहा है, तो क्या आप इस बात से सहमत हैं कि साइंस के लिए एआई के साथ हम आखिरकार खोज से प्रमाणन और वास्तविक दुनिया की समस्या के तेजी से समाधान की ओर बढ़ रहे हैं?

हां, ऐसे कई क्षेत्र हैं जहां इसका असर पहले ही काफी दिखने लगा है। उदाहरण के लिए, बायोलॉजी में, अल्फाफोल्ड, प्रोटीन स्ट्रक्चर प्रेडिक्शन प्रॉब्लम ऐसा कर रही है। हमने 2020 के आखिर में अल्फाफोल्ड 2 रिलीज किया और 2024 तक इसका खासा असर हो चुका था। आज, अल्फाफोल्ड का इस्तेमाल 180 देशों में लगभग 30 लाख वैज्ञानिक कर रहे हैं।

अगर आप देखें कि इसे कैसे इस्तेमाल किया जा रहा है, तो शोधकर्ताओं ने इसका इस्तेमाल नई दवाइयां तैयार करने के लिए भी किया है। इसके अलावा, शोधकर्ताओं ने प्लास्टिक को डीकंपोज करने के लिए एंजाइम डिजाइन किए हैं। दूसरों ने अल्फाफोल्ड का इस्तेमाल रोग-निरोधक फसलों के अध्ययन और विकास के लिए किया है। भारत में भी इसके उदाहरण हैं। आप सिर्फ एक एप्लीकेशन से ही असल दुनिया की रिसर्च के कई तरह के नतीजे देख सकते हैं।

आप भारत में एआई रिसर्च को कैसे आगे बढ़ते देख रहे हैं और बड़ा भारतीय इकोसिस्टम कैसे बन रहा है? आपको इस एआई-आधारित बदलाव में भारत की क्या भूमिका दिख रही है?

मुझे लगता है कि पूरे एआई बदलाव में भारत की बहुत अहम भूमिका है। सबसे पहले, भारत को एआई की बहुत जरूरत है। अगर आप देश के सामने आने वाली चुनौतियों की बात करें तो हेल्थकेयर इसका एक अच्छा उदाहरण है। हम पहले एक्सपर्ट-लेवल इंटेलिजेंस के बारे में बात कर रहे थे। आज, एआई के माध्यम से एक्सपर्ट-लेवल इंटेलिजेंस का तेजी से लोकतंत्रीकरण हो रहा है। इससे भारत को देश भर में बड़े पैमाने पर स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने के लिए एआई का लाभ उठाने का अवसर मिल रहा है।

एक और बात यह है कि भारत में भाषाई विविधता बहुत ज्यादा है और पूरे देश में कई भाषाएं बोली जाती हैं। इससे ऐसे एआई मॉडल बनाना और उनका विकास करना जरूरी हो गया है जो भारतीय भाषाओं को समझ सकें और उन पर काम कर सकें।

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First Published - February 10, 2026 | 9:54 PM IST

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