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EV की राह में चार्जिंग इन्फ्रा सबसे बड़ा रोड़ा, टाटा और ह्युंडै के दिग्गजों ने जताई गहरी चिंता

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उनके मुताबिक, चार्जरों की सीमित उपलब्धता, एकसमान चार्जिंग सिस्टम की कमी और उपभोक्ताओं के कम भरोसे के कारण इनको व्यापक रूप से अपनाना धीमा बना हुआ है

Last Updated- February 10, 2026 | 9:55 PM IST
Electric vehicle (EV)
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स, ह्युंडै मोटर इंडिया और बीएमडब्ल्यू ग्रुप इंडिया के आला अधिकारियों का कहना है कि चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर की कमी और इसकी उपलब्धता व  विश्वसनीयता से जुड़े मसले भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) के विकास में सबसे बड़ी चुनौती बने हुए हैं।

वाहन कंपनियों के संगठन सायम के पांचवें ग्लोबल इलेक्ट्रिक मोबिलिटी समिट में मंगलवार को वाहन निर्माताओं ने कहा, हालांकि हाल के वर्षों में इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने में तेजी आई है, लेकिन चार्जरों की सीमित उपलब्धता, एकसमान चार्जिंग सिस्टम की कमी और उपभोक्ताओं के कम भरोसे के कारण इनको व्यापक रूप से अपनाना धीमा बना हुआ है।

टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स (टीएमपीवी) के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी शैलेश चंद्रा ने कहा, बाजार के परिपक्व होने के बावजूद चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर अभी भी सबसे बड़ी बाधा है। उन्होंने कहा कि सरकार धनराशि आवंटित कर रही है, लेकिन चार्जिंग नेटवर्क को व्यापक स्तर पर बढ़ाने के लिए बेहतर समन्वय की जरूरत है।

उन्होंने कहा कि भारत में ईवी इकोसिस्टम का विकास चरणों में हुआ है। इसमें कंपनी ने शुरू में होम चार्जरों पर ध्यान दिया। फिर सार्वजनिक चार्जिंग के लिए टाटा पावर के साथ साझेदारी की और उसके बाद जब ईवी की संख्या 1,00,000 को पार कर गई तो कई चार्जिंग प्वाइंट ऑपरेटरों ने बाजार में प्रवेश किया।

हालांकि उन्होंने कहा कि चार्जिंग ऐपों और नेटवर्क के बढ़ते प्रसार ने उपभोक्ताओं के लिए नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। उन्होंने कहा, उपभोक्ता अनुभव बेहतर बनाने के लिए व्यवस्थित सोच और एकीकरण की आवश्यकता है। साथ ही उन्होंने वाहन निर्माताओं, बिजली वितरण कंपनियों और चार्जिंग प्वाइंट संचालकों के बीच तालमेल की डजरूरत भी बताई।

ह्युंडै मोटर इंडिया के प्रबंध निदेशक और सीईओ तरुण गर्ग ने कहा, बैटरी पैक जैसे पुर्जों का स्थानीयकरण करने के बावजूद चार्जिंग संबंधी चिंता ग्राहकों के व्यवहार को प्रभावित करती रहती हैं। उन्होंने कहा, पहले यह माना जाता था कि घर पर रात भर में एसी चार्जर से चार्ज करना पर्याप्त होगा। लेकिन यह धारणा गलत साबित हुई है।

गर्ग ने कहा, शोध से पता चलता है कि ग्राहक वाहन को बाहर ले जाने से हिचकिचाते हैं। उन्होंने चार्जर की अनुकूलता और उपलब्धता के बारे में सीमित जागरूकता की ओर भी इशारा किया। उन्होंने बताया कि इस समस्या को दूर करने के लिए ह्युंडै ने एक चार्जिंग प्रबंधन प्रणाली शुरू की है, जिससे ग्राहकों को लगभग 29,000 चार्जरों तक पहुंच मिलती है।

गर्ग ने कहा कि 2025 में भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों की पैठ करीब 4.4 फीसदी थी और यह एक महत्वपूर्ण पड़ाव के करीब पहुंच सकती है। उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रिक वाहनों को लेकर लोगों की सोच भी बदल रही है। उन्होंने कहा, लोग समझ रहे हैं कि कुल लागत और सुविधा के लिहाज से यह वास्तव में एक संपूर्ण कार है। सिर्फ दूसरी कार क्यों? यह आपकी पहली कार भी हो सकती है।

बीएमडब्ल्यू ग्रुप इंडिया के अध्यक्ष और सीईओ हरदीप बराड़ ने भारतीय सड़कों पर इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या और उपलब्ध चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर के बीच बड़े अंतर को उजागर किया। उन्होंने कहा कि देश में करीब 75 लाख इलेक्ट्रिक वाहन हैं और लगभग 30,000 सार्वजनिक चार्जर हैं, यानी लगभग 250 वाहनों के लिए एक चार्जर उपलब्ध है।

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First Published - February 10, 2026 | 9:55 PM IST

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