केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने शिव वानी ऑयल ऐंड गैस (एसवीओजीएल) और उसके प्रर्वतकों पदम सिंघी एवं प्रेम चिमनलाल सिंघी को पंजाब नैशनल बैंक (पीएनबी) के साथ 252.61 करोड़ रुपये की ठगी करने के आरोप में जांच शुरू की है। सीबीआई की एफआईआर के अनुसार, पीएनबी ने इन पर आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, विश्वास के उल्लंघन और आपराधिक व्यवहार के आरोप लगाए हैं।
पदम सिंघी नई दिल्ली में मुख्यालय वाली एसवीओजीएल के प्रबंध निदेशक जबकि प्रेम चिमनलाल सिंघी इसके निदेशक हैं। एसवीओजीएल के खातों को पीएनबी द्वारा धोखाधड़ी वाले खाते घोषित किया गया था और 15 अगस्त, 2019 को इसकी जानकारी आरबीआई को दी गई थी। सीबीआई के एक बयान में कहा गया है कि कंपनी द्वारा हासिल ऋण खाते को 30 जून, 2016 को केंद्रीय सांविधिक ऑडीटर द्वारा एनपीए के तौर पर घोषित किया गया था जिसे 26 दिसंबर 2013 से प्रभावी माना गया।
सीबीआई ने बताया कि दिल्ली के तीन स्थानों पर कंपनी के परिसरों और उसके निदेशकों के यहां छापेमारी की गई थी।
कंपनी 16 बैंकों और एनबीएफसी के कंसोर्टियम के तहत ऋण सुविधाएं हासिल कर रही थी। प्रभावित बैंकों में आईसीआईसीआई बैंक, भारतीय स्टेट बैंक, बैंक ऑफ महाराष्ट्र, ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स, बैंक ऑफ इंडिया, इंडियन ओवरसीज बैंक, एक्जिम बैंक, आंध्रा बैंक, यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया, कॉरपोरेशन बैंक, यूको बैंक, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया और येस बैंक शामिल हैं। कंसोर्टियम में शामिल एनबीएफसी हैं – एलऐटी इन्फ्रा फाइनैंस कंपनी, आईएफसीआई, टाटा कैपिटल फाइनैंशियल सर्विसेज और एलआईसी ऑफ इंडिया।
पीएनबी द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत में कहा गया है, ‘कंसोर्टियम का कुल ऋण जोखिम करीब 3,587 करोड़ रुपये है और हमारे (पीएनबी) बैंक की भागीदारी 7.45 प्रतिशत है। 20 प्रतिशत भागीदारी के साथ मजबूत भागीदार रहे आईसीआईसीआई ने अपनी हिस्सेदारी एडलवाइस एआरसी को बेच दी और अब एसबीआई 12.64 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ इस कंसोर्टियम में सार्वजनिक क्षेत्र का सबसे बड़ा नया ऋणदाता है।’