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विलय-अधिग्रहण की रफ्तार में मंदी का दौर रहा जारी चालू कैलेंडर वर्ष?की पहली तिमाही में विलय और अधिग्रहण में कंपनियों ने नहीं दिर्खाई ज्यादा दिलचस्पी

Last Updated- December 05, 2022 | 9:42 PM IST

भारतीय कंपनियों की विलय और अधिग्रहण की गतिविधियां चालू कैलेंडर वर्ष की पहली तिमाही में काफी मंद रहीं।


जनवरी से मार्च के बीच इनके परिणाम कुछ अच्छे नहीं रहे। कंपनियों की ओर से किए जाने वाले सौदों में हल्की कमी आई है, लेकिन 2007 जनवरी-मार्च तिमाही के मुकाबले इस साल की पहली तिमाही में इन सौदों के मूल्य में 71 प्रतिशत की गिरावट देखी गई है।ग्रांट थॉर्नटन अध्ययन के मुताबिक 2007 में 148 सौदों के मुकाबले 2008 में हल्की कमी के साथ कुल 125 सौदे किए गए हैं, लेकिन सौदों का मूल्य लगभग 1,354 अरब रुपये से घटकर लगभग 385.6 अरब रुपये हो गया है।


वैश्विक बाजार में कर्ज में कमी के बढ़ने के डर ने कंपनियों के विलय और अधिग्रहण की क्षमता पर सवालिया चिह्न लगा दिया है, क्योंकि अब वित्त मुहैया करा पाना मुश्किलों भरा काम है। वैश्विक बाजार 25 प्रतिशत से अधिक डूब चुके हैं, क्योंकि पिछले साल कंपनियों ने अपनी विस्तार परियोजनाओं पर रोक लगा दी।भारतीय कंपनियों की विलय और अधिग्रहण के अभियान ने मंदी की शक्ल भी देखी है, भारतीय कंपनियों का अधिग्रहण का दौर विदेशी सौदों के चलते अभी भी इस दौड़ में बना हुआ है।


और अगर विशेषज्ञों की मानें तो वर्ष 2008 में विदेशी सौदों देसी सौदों की तुलना में अधिक देखने को मिलेंगे।ग्रांट थॉर्नटन अध्ययन में दिए गए आंकड़ों के मुताबिक फरवरी से विदेशी सौदे 12 से बढ़कर 15 हो गए हैं और इन सौदों की कीमत फरवरी में लगभग 9.6 अरब रुपये से बढ़कर कर मार्च में लगभग 106.4 अरब रुपये हो गई।ग्रांट थॉर्नटन में पार्टनर हरीश एच वी का कहना है, ‘विदेशी सौदों में उछाल आया है, क्योंकि विश्वभर में कंपनियों का मूल्यांकन कम हो गया है, जिससे भारतीय कंपनियों को वहां कंपनियों के अधिग्रहण करने में आसानी हो गई है और यह सिलसिला चलता रहेगा।


हालांकि बड़े अधिग्रहण या विलय के लिए वित्त मुहैया करवाना मुश्किल होगा। मजबूत खाते वाली कंपनियां मोल-भाव कर अधिग्रहण के बारे में सोच सकती हैं।’पिछले महीने होने वाले सौदों में सबसे लंबे इंतजार वाला और महत्वपूर्ण सौदा, टाटा मोटर्स का फोर्ड के दो बड़े ब्रांडों जगुआर और लैंड रोवर का लगभग 9,200 करोड़ रुपये में अधिग्रहण शामिल है। अन्य सौदों में आईएलऐंडएफएस ट्रांसपोटर्ेशन नेटवर्क लिमिटेड का लगभग 292 करोड़ रुपये वाला एल्सामैक्स एसए अधिग्रहण और शैम्पेन इंडेज का 252 करोड़ रुपये का अधिग्रहण शामिल है।पिछले साल की तुलना में सौदे की कीमत 47 प्रतिशत बढ़ जाने के कारण निजी इक्विटी के दोबारा संभलने की उम्मीद है।


निजी इक्विटी वाले सौदों की कुल संख्या 2008 के पहले तीन महीनों में 124 रही, जिनका घोषित मूल्य लगभग 175.2 अरब रुपये रहा, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि के दौरान 112 सौदों का मूल्य लगभग 119.2 अरब रुपये था।विशेषज्ञों का निजी इक्विटी की गतिविधियों में तेजी के लिए कमजोर आईपीओ बाजार को जिम्मेदार मानते हैं, जिसने जारीकर्ता को सार्वजनिक सूचीबध्द होने के लिए हतोत्साहित किया।

First Published - April 16, 2008 | 1:27 AM IST

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