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नियामकीय परेशानी से यूनाइटेड स्पिरिट्स पर दबाव

देश की सबसे बड़ी सूचीबद्ध शराब निर्माता कंपनी यूनाइटेड स्पिरिट्स (यूएसएल) का शेयर पिछले एक महीने में 10 प्रतिशत तक गिर गया।

Last Updated- July 13, 2025 | 9:59 PM IST
united breweries

देश की सबसे बड़ी सूचीबद्ध शराब निर्माता कंपनी यूनाइटेड स्पिरिट्स (यूएसएल) का शेयर पिछले एक महीने में 10 प्रतिशत तक गिर गया। इस क्षेत्र की अन्य कंपनियों के मुकाबले वह पीछे रह गया है। यह गिरावट महाराष्ट्र में आबकारी शुल्क में तेज वृद्धि, ऊंचे आधार प्रभाव और मार्जिन वृद्धि में अभाव के कारण आई। इन सभी कारणों से ब्रोकरों ने वित्त वर्ष 2026 के बिक्री और आय अनुमानों को घटा दिया है। उनके इस तरह का सतर्क रुख दो साल की मजबूत परिचालन और मुनाफा वृद्धि के बाद आया है। कई चुनौतियों की वजह से विश्लेषकों का मानना है कि अल्पावधि में शेयर पर दबाव रहेगा।

कुछ चेतावनी संकेत तो जल्द ही यानी अप्रैल-जून तिमाही के प्रदर्शन में ही दिख सकते हैं। लेकिन जहां संपूर्ण शराब निर्माण क्षेत्र नियामकीय दिकक्तों से जूझ रहा है, वहीं रेडिको खेतान जैसी कंपनियां अभी भी बढ़त में हैं।   यूएसएल के प्रेस्टीज ऐंड एबव (पीऐंडए) पोर्टफोलियो यानी शराब के महंगे ब्रांडों में धीमी वृद्धि की संभावना है। इसका एक कारण पिछले साल चुनाव के कारण जमा हुए भंडार का ऊंचा आधार है। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि महाराष्ट्र में हाल के नीतिगत बदलावों का असर पहली तिमाही की बिक्री में भी दिख सकता है। यूएसएल की बिक्री में 6 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान है, जो अगर आंध्र प्रदेश को अलग कर दें तो 3 प्रतिशत रह जाएगी। इसके विपरीत रेडिको में 21 प्रतिशत की बढ़ोतरी का अनुमान है जो बाजार हिस्सेदारी बढ़ने और इनोवेशन के कारण बिक्री में 17.5 प्रतिशत की तेजी से संभव है।

यूएसएल के परिचालन मार्जिन पर भी दबाव के आसार हैं, क्योंकि बढ़ते विज्ञापन खर्च और कमजोर लागत दक्षता का प्रभाव देखा जा सकता है।  यूएसएल के परिचालन मार्जिन में भी कमी की आशंका है जो ज्यादा विज्ञापन खर्च और कमजोर लागत लाभ के कारण सुस्त रह सकता है। इलारा सिक्योरिटीज के करण तौरानी का कहना है कि पिछले साल के ऊंचे आधार और पहली तिमाही में अग्रिम प्रचार खर्च की वजह से  मार्जिन में 300 आधार अंक की कमी आ सकती है और यह सालाना आधार पर घटकर 16.5 प्रतिशत रह सकता है।

 निवेशकों की एक बड़ी चिंता महाराष्ट्र सरकार द्वारा स्पिरिट पर उत्पाद शुल्क में भारी वृद्धि है। लोअर-प्रेस्टीज और मिड-प्रेस्टीज सेगमेंटों की खुदरा कीमतें 30-45 प्रतिशत तक बढ़ गई हैं। ये सेगमेंट यूएसएल की कुल बिक्री का 13 प्रतिशत और उसकी वैल्यू का 11 प्रतिशत हिस्सा हैं।

कोटक सिक्योरिटीज के विश्लेषक जयकुमार दोशी आगाह करते हैं कि यह कदम चिंताजनक है क्योंकि राज्य शराब पर कर का इस्तेमाल लोकलुभावन चुनावी वादों को पूरा करने के लिए कर रहे हैं और भारत में निर्मित विदेशी ब्रांडों के बजाय राज्य द्वारा उत्पादित शराब के पक्ष में नीतियां बना रहे हैं। नीतिगत स्तर पर अपेक्षाकृत खामोशी के बाद इस बदलाव ने नियामकीय अनिश्चितता की चिंता को फिर से बढ़ा दी है। ब्रोकरेज ने वित्त वर्ष 2026 से 2027-28 तक प्रति शेयर आय के अनुमानों को 3-6 प्रतिशत तक घटा दिया है।

दौलत कैपिटल को उत्पाद शुल्क में बढ़ोतरी से तीन तरफा नुकसान की आशंका दिखती है। विश्लेषक हिमांशु शाह और मोहित रजनी के अनुसार इसमें ऊंची खुदरा कीमतों के कारण बिक्री में कमी, सस्ते सेगमेंट की ओर झुकाव और चैनल मार्जिन को सहारा देने के लिए एक्स-डिस्टिलरी कीमतों में गिरावट शामिल है।

ब्रोकरेज को जुलाई-सितंबर तिमाही में और दबाव की आशंका है। ब्रोकरेज ने वित्त वर्ष 2026 के परिचालन लाभ अनुमानों में 4 प्रतिशत और शुद्ध आय में 13 प्रतिशत की कटौती की है जिससे 2026-27 के लिए पीई मल्टीपल 60 गुना से घटकर 50 गुना रह जाने का अनुमान है।

हालांकि कई ब्रोकर ऐसे कारक बता रहे हैं जो इस झटके को कम कर सकते हैं। इनमें दिल्ली सरकार की संशोधित आबकारी नीति, चुनावों के बाद बिहार में शराब बाजार का फिर से खुलना और भारत-ब्रिटेन मुक्त व्यापार समझौते से संभावित लाभ शामिल हैं जिससे उत्पादन लागत में कमी आ सकती है। फिर भी नियामकीय अनिश्चितता और वृद्धि की अनिश्चित राह को देखते हुए ज्यादातर ब्रोकरेज ने इस शेयर पर ‘तटस्थ’ या ‘बेचें’रेटिंग बरकरार रखी है।

First Published - July 13, 2025 | 9:59 PM IST

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