पीरामल एंटरप्राइजेज को कई महीनों की बातचीत के बाद आवास वित्त प्रदाता दीवान हाउसिंग फाइनैंस कॉरपोरेशन (डीएचएफएल) के अधिग्रहण की अपनी कोशिश को ऋणदाताओं का समर्थन मिल गया है। यह प्रस्ताव अब एनसीएलटी को सौंपा जाएगा और उसे अदालत में ओकट्री द्वारा चुनौती मिल सकती है।
अब सवाल यह उठाता है कि क्या डीएचएफएल अधिग्रहण (यदि होता है) इस शेयर की चाल बदल सकता है? अशिका स्टॉक ब्रोकिंग के आशुतोष मिश्रा का कहना है कि निश्चित तौर पर अपने बहीखाते में डीएचएफएल के समेकन को शामिल करने की प्रक्रिया में अधिग्रहण संबंधी औपचारिकता पूरी होने से 3 से 6 महीने का समय लग सकता है। इससे पीरामल एंटरप्राइजेज के रिटेल ऋणों का योगदान बढ़ जाएगा।
डीएचएफएल की कुल ऋण बुक 79,800 करोड़ रुपये में से करीब 33,500 करोड़ रुपये पीरामल में आने से रिटेल ऋणों का कुल हिस्सा 30 सितंबर 2020 के 5,682 करोड़ रुपये से बढ़कर 39,000 करोड़ रुपये से ज्यादा हो जाएगा। दूसरे शब्दों में, यह पीरामल की प्रमुख रिटेल महत्वाकांक्षाएं हैं। मोतीलाल ओसवाल फाइनैंशियल सर्विसेज के विश्लेषकों का मानना है कि पीरामल की योजना अगले पांच साल में रिटेल और होलसेल ऋणों के 50:50 प्रतिशत समावेश की है। बैलेंस शीट पर कर्ज लगातार घटने और हेल्थकेयर व्यवसाय में हिस्सेदारी बिक्री के साथ पीरामल का समेकित शुद्घ कर्ज-इक्विटी अनुपात दूसरी तिमाही के 1 गुना से कम दर्ज किया गया है। अच्छी तरह से पूंजीकृत उधारी व्यवसाय ने भी कंपनी को डीएचएफएल की परिसंपत्तियों को खपाने के लिहाज से मजबूत स्थिति में ला दिया है।
लेकिन पीरामल के लिए यह अधिग्रहण कितना उपयोगी होगा, यह भविष्य में संयुक्त बहीखाते के वित्तीय प्रदर्शन से पता चलेगा। इसकी शुरुआत के लिए, रिटेल ऋणों के लिए डीएचएफएल का सकल एनपीए 21.32 प्रतिशत और उसकी होलसेल बुक के लिए 92.61 प्रतिशत पर दर्ज किया गया, जो इस उद्योग में सर्वाधिक है। पीरामल का सकल एनपीए दूसरी तिमाही में 2.5 प्रतिशत पर था। समेकन के बाद रिकवरी, संग्रह और डीएचएफएल के मौजूदा ग्राहक आधार को बरकरार रखना आसान नहीं हो सकता है।