facebookmetapixel
GST घटते ही बीमा पॉलिसियों की बिक्री में जबरदस्त उछाल, LIC ने मारी बाजीअमेरिका के फैसले से जलवायु लड़ाई को झटका, भारत में ग्रिड बनी बड़ी बाधा: सुमंत सिन्हाStock Market Today: गिफ्ट निफ्टी से सुस्त संकेत, एशियाई बाजारों में मिलाजुला रुख; आज कैसी रहेगी बाजार की चाल ?सरकारी उद्यमों का तेज निजीकरण जरूरी: CII की सिफारिशHome Loan: होम लोन में फंसने से पहले जान लें ये 7 बातें, वरना पछताना पड़ेगाआपराधिक जांच की खबरों के बीच फेड चेयर पॉवेल का बयान- कानून से ऊपर कोई नहींकर्ज वसूली में तेजी के लिए डीआरटी कानून में बड़े बदलाव की तैयारीStocks To Watch Today: वेदांता, NTPC, ITC समेत शेयर बाजार में आज किन स्टॉक्स में दिखेगी हलचल? देखें पूरी लिस्टउच्च गुणवत्ता वाले शेयर अब भी आकर्षक, 2026 में आय वृद्धि बनेगी बाजार की ताकतNetflix के भारत में 10 साल: कैसे स्ट्रीमिंग ने भारतीय मनोरंजन उद्योग की पूरी तस्वीर बदल दी

पीएफआरडीए ने फंड प्रबंधन शुल्क की ऊपरी सीमा बढ़ाई

Last Updated- December 10, 2022 | 2:12 AM IST

पेंशन फंड नियामक और विकास प्राधिकरण (पीएफआरडीए) ने इस क्षेत्र में ज्यादा कंपनियों को लुभाने और दीर्घावधि के हिसाब से मुनाफा बनाए रखने के लिए फंड प्रबंधन शुल्क की सीमा बढ़ा दी है।
नियामक ने पहले ही पेंशन फंड प्रबंधकों के लिए आवेदन प्रस्ताव (आरएफपी) मांगा है, जिसमें सभी मौजूदा 7 कंपनियां पर नई कंपनियां आवेदन कर सकती हैं। पीएफआरडीए के चेयरमैन सुप्रतिम बंद्योपाध्याय ने बिजनेस स्टैंडर्ड से कहा कि फंड प्रबंधकों की संख्या को लेकर कोई सीमा नहीं तय की गई है।
इस समय प्रति 100 रुपये के प्रबंधन पर 1 पैसे फंड प्रबंधन शुल्क की ऊपरी सीमा तय की गई है। उन्होंने कहा कि अब 4 ढांचे होंगे। शून्य से 10,000 करोड़ रुपये के बीच प्रबंधन के तहत संपत्ति (एयूएम) पर प्रबंधन शुल्क की अधिकतम सीमा 9 पैसे प्रति 100 रुपये होगी। वहीं 10,000 करोड़ से ज्यादा और 50,000 करोड़ रुपये तक प्रबंदन पर यह 6 पैसे प्रति 100 रुपये होगा और 50,000 करोड़ से 1.5 लाख करोड़ रुपये पर 5 पैसे प्रति 100 रुपये शुल्क होगा। उसके ऊपर के लिए 3 पैसे प्रति 100 रुपये तक शुल्क होगा।
बंद्योपाध्याय ने कहा कि इससे निश्चित रूप से ज्यादा पेंशन फंड प्रबंधक आकर्षित होंगे क्योंकि नई सीमा से कंपनियां मानव संसाधन के साथ आईटी इन्फ्रास्ट्रक्चर पर धन खर्च कर सकेंगी, जो पेंशन क्षेत्र में मुख्य हैं। आरएफपी में कहा गया है कि फंड प्रबंधकों की प्रायोजक कंपनियां कम से कम वित्तीय क्षेत्र के नियामकों सेबी, आईआरडीएआई, आरबीआई या पीएफआरडीए में से किसी एक द्वारा नियंत्रित होनी चाहिए। वह पिछले 5 साल में से कम से कम 3 साल तक मुनाफे में रही हों और किसी साल में उन्हें नकदी का संकट न रहा हो।
पीएफआरडीए के चेयरमैन ने कहा कि आरएफपी में प्रायोजक कंपनी के लिए औसत एयूएम की जरूरत भी बढ़ाकर पिछले 12 महीने के लिए 50,000 करोड़ रुपये कर दी गई है।

First Published - January 5, 2021 | 11:37 PM IST

संबंधित पोस्ट