facebookmetapixel
Cipla Q3FY26 Results: मुनाफा 57% घटकर ₹676 करोड़, अमेरिकी कारोबार में कमजोरी से झटका; शेयर 3.7% फिसलेZerodha के इस म्युचुअल फंड से अब मिनटों में निकाल सकेंगे पैसा, शुरू हुई 24×7 इंस्टेंट विदड्रॉल सुविधाअदाणी स्टॉक्स में बड़ी गिरावट, अमेरिका से आई खबर ने मचाई खलबली; 9% तक लुढ़केगौतम अदाणी पर अमेरिकी शिकंजा: समन न पहुंचा तो SEC ने अदालत से मांगी वैकल्पिक अनुमतिगोल्ड सिल्वर रेशियो ने दिया संकेत, क्या चांदी की तेजी अब थकने वाली है? एक्सपर्ट्स से समझिए42% चढ़ सकता है महारत्न कंपनी का शेयर, ब्रोकरेज ने बढ़ाया टारगेट; Q3 में ₹4011 करोड़ का हुआ मुनाफाईरान की ओर बढ़ रहा है ‘विशाल सैन्य बेड़ा’, ट्रंप ने तेहरान को फिर दी चेतावनीदुनिया में उथल-पुथल के बीच भारत की अर्थव्यवस्था के क्या हाल हैं? रिपोर्ट में बड़ा संकेत30% टूट चुका Realty Stock बदलेगा करवट, 8 ब्रोकरेज का दावा – ₹1,000 के जाएगा पार; कर्ज फ्री हुई कंपनीसिर्फ शेयरों में पैसा लगाया? HDFC MF की रिपोर्ट दे रही है चेतावनी

मुकेश अंबानी की Reliance को बड़ा झटका! हाईकोर्ट ने कहा – सरकार को ₹14,000 करोड़ का नुकसान हुआ

दिल्ली हाईकोर्ट ने 2018 के अंतरराष्ट्रीय पंचाट के फैसले को खारिज किया, सरकार के पक्ष में सुनाया फैसला।

Last Updated- February 14, 2025 | 7:31 PM IST
Reliance Industries Limited

रिलायंस इंडस्ट्रीज (RIL) और उसके विदेशी साझेदारों BP Plc (यूके) और Niko Resources (कनाडा) को बड़ा झटका लगा है। दिल्ली हाईकोर्ट ने सरकार के पक्ष में फैसला सुनाते हुए 2018 के अंतरराष्ट्रीय पंचाट (अरबिट्रेशन) के फैसले को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि इन कंपनियों ने “धोखाधड़ी” और “अनुचित फायदा” उठाया, जिससे सरकार को ₹14,000 करोड़ (1.729 अरब डॉलर) का नुकसान हुआ।

क्या है पूरा मामला?

कहानी 2014 से शुरू होती है, जब सरकारी कंपनी ओएनजीसी (ONGC) ने रिलायंस पर आरोप लगाया कि उसने कृष्णा-गोदावरी (KG) बेसिन में उसके गैस भंडार से चोरी-छिपे गैस निकाल ली। ONGC का कहना था कि RIL ने अपनी KG-D6 साइट के पास कुएं खोदे और ONGC की फील्ड से गैस अपनी ओर खींच ली। यह सब 2009 से 2013 के बीच हुआ।

सरकार ने अमेरिकी फर्म डीगोलियर और मैकनॉटन (D&M) की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए 2014 में RIL से ₹12,000 करोड़ की मांग की। रिपोर्ट में कहा गया था कि RIL के ड्रिलिंग ऑपरेशन की वजह से ONGC के गैस भंडार कम हो गए।

रिलायंस की सफाई क्या थी?

RIL का कहना था कि उसने कोई गलत काम नहीं किया और अपने प्रोडक्शन शेयरिंग कॉन्ट्रैक्ट (PSC) के नियमों का पालन किया। कंपनी ने कहा कि ONGC के ब्लॉक और उनके ब्लॉक अलग-अलग स्टेज में थे, इसलिए संयुक्त विकास संभव ही नहीं था।

कोर्ट ने क्या कहा?

हाईकोर्ट के जस्टिस रेखा पल्लि और सौरभ बनर्जी की बेंच ने सरकार के पक्ष में फैसला सुनाया। कोर्ट ने कहा कि 2018 का पंचाट का फैसला भारत की “सार्वजनिक नीति” के खिलाफ था, इसलिए इसे खारिज किया जाता है।

पहले, सिंगापुर के लॉरेंस बू की अध्यक्षता वाले पंचाट पैनल ने 2-1 के बहुमत से RIL के पक्ष में फैसला दिया था। उसमें कहा गया था कि PSC में कहीं भी यह नहीं लिखा कि प्रवाहित (migrated) गैस को निकालकर बेचना गलत है। लेकिन हाईकोर्ट ने इस फैसले को पलट दिया।

First Published - February 14, 2025 | 7:27 PM IST

संबंधित पोस्ट