facebookmetapixel
Advertisement
Bharat PET IPO: ₹760 करोड़ जुटाने की तैयारी, सेबी में DRHP फाइल; जुटाई रकम का क्या करेगी कंपनीतेल, रुपये और यील्ड का दबाव: पश्चिम एशिया संकट से बढ़ी अस्थिरता, लंबी अनिश्चितता के संकेतवैश्विक चुनातियों के बावजूद भारतीय ऑफिस मार्केट ने पकड़ी रफ्तार, पहली तिमाही में 15% इजाफाJio IPO: DRHP दाखिल करने की तैयारी तेज, OFS के जरिए 2.5% हिस्सेदारी बिकने की संभावनाडेटा सेंटर कारोबार में अदाणी का बड़ा दांव, Meta और Google से बातचीतभारत में माइक्रो ड्रामा बाजार का तेजी से विस्तार, 2030 तक 4.5 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमानआध्यात्मिक पर्यटन में भारत सबसे आगे, एशिया में भारतीय यात्रियों की रुचि सबसे अधिकबांग्लादेश: चुनौतियों के बीच आजादी का जश्न, अर्थव्यवस्था और महंगाई बनी बड़ी चुनौतीपश्चिम एशिया संकट के बीच भारत सतर्क, रणनीतिक तेल भंडार विस्तार प्रक्रिया तेजGST कटौती से बढ़ी मांग, ऑटो और ट्रैक्टर बिक्री में उछाल: सीतारमण

मुकेश अंबानी की Reliance को बड़ा झटका! हाईकोर्ट ने कहा – सरकार को ₹14,000 करोड़ का नुकसान हुआ

Advertisement

दिल्ली हाईकोर्ट ने 2018 के अंतरराष्ट्रीय पंचाट के फैसले को खारिज किया, सरकार के पक्ष में सुनाया फैसला।

Last Updated- February 14, 2025 | 7:31 PM IST
Reliance Industries Limited

रिलायंस इंडस्ट्रीज (RIL) और उसके विदेशी साझेदारों BP Plc (यूके) और Niko Resources (कनाडा) को बड़ा झटका लगा है। दिल्ली हाईकोर्ट ने सरकार के पक्ष में फैसला सुनाते हुए 2018 के अंतरराष्ट्रीय पंचाट (अरबिट्रेशन) के फैसले को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि इन कंपनियों ने “धोखाधड़ी” और “अनुचित फायदा” उठाया, जिससे सरकार को ₹14,000 करोड़ (1.729 अरब डॉलर) का नुकसान हुआ।

क्या है पूरा मामला?

कहानी 2014 से शुरू होती है, जब सरकारी कंपनी ओएनजीसी (ONGC) ने रिलायंस पर आरोप लगाया कि उसने कृष्णा-गोदावरी (KG) बेसिन में उसके गैस भंडार से चोरी-छिपे गैस निकाल ली। ONGC का कहना था कि RIL ने अपनी KG-D6 साइट के पास कुएं खोदे और ONGC की फील्ड से गैस अपनी ओर खींच ली। यह सब 2009 से 2013 के बीच हुआ।

सरकार ने अमेरिकी फर्म डीगोलियर और मैकनॉटन (D&M) की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए 2014 में RIL से ₹12,000 करोड़ की मांग की। रिपोर्ट में कहा गया था कि RIL के ड्रिलिंग ऑपरेशन की वजह से ONGC के गैस भंडार कम हो गए।

रिलायंस की सफाई क्या थी?

RIL का कहना था कि उसने कोई गलत काम नहीं किया और अपने प्रोडक्शन शेयरिंग कॉन्ट्रैक्ट (PSC) के नियमों का पालन किया। कंपनी ने कहा कि ONGC के ब्लॉक और उनके ब्लॉक अलग-अलग स्टेज में थे, इसलिए संयुक्त विकास संभव ही नहीं था।

कोर्ट ने क्या कहा?

हाईकोर्ट के जस्टिस रेखा पल्लि और सौरभ बनर्जी की बेंच ने सरकार के पक्ष में फैसला सुनाया। कोर्ट ने कहा कि 2018 का पंचाट का फैसला भारत की “सार्वजनिक नीति” के खिलाफ था, इसलिए इसे खारिज किया जाता है।

पहले, सिंगापुर के लॉरेंस बू की अध्यक्षता वाले पंचाट पैनल ने 2-1 के बहुमत से RIL के पक्ष में फैसला दिया था। उसमें कहा गया था कि PSC में कहीं भी यह नहीं लिखा कि प्रवाहित (migrated) गैस को निकालकर बेचना गलत है। लेकिन हाईकोर्ट ने इस फैसले को पलट दिया।

Advertisement
First Published - February 14, 2025 | 7:27 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement