भूषण पावर ऐंड स्टील लिमिटेड (बीपीएसएल) के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग यानी काले धन को वैध बनाने के आरोपों की जांच कर रहे प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को पता चला है कि रिजोल्यूशन पेशेवर (आरपी) एम के खंडेलवाल के अधीन दिवालिया प्रक्रिया शुरू होने के बाद भी कर्ज में डूबी इस कंपनी के पूर्व प्रबंधन द्वारा 700 करोड़ रुपये की खेपों की मंजूरी में लगातार अनियमितताएं बरती गई थीं। जांच एजेंसी को बीपीएसएल प्रबंधन की आपी के साथ मिलीभगत होने का संदेह है और उसने कहा है कि जांच के दौरान आरपी की ओर से कुछ अनियमितताएं सामने आई हैं।
बुधवार को संघीय एजेंसी ने आरपी से संबंधित चार परिसरों और कर्ज में डूबी इस्पात कंपनी के एक पूर्व निदेशक के यहां छापेमारी की।
इन तलाशी के दौरान विभिन्न दस्तावेज, मोबाइल फोन, और 86 लाख रुपये मूल्य की ज्वैलरी जैसी अन्य कीमती चीजें बरामद हुई थीं।
ईडी के अनुसार, बरामद हुए दस्तावेजों से खंडेलवाल द्वारा नकदी की प्राप्ति का संकेत मिलता है। ईडी ने कहा है कि कंपनी के बहीखातों से अलग विभिन्न लोगों को भारी मात्रा में भुगतान किए जाने से यह पता चलता है कि एनसीएलटी के तहत दिवालिया प्रक्रिया से गुजरने के बावजूद विभिन्न व्यवसायों के माध्यम से नकदी का गबन किया गया।
ईडी के एक अधिकारी ने कहा कि इस्पात कंपनी अपने ओडिशा संयंत्र से तैयार माल की कोलकाता और चंडीगढ़ के अपने संयंत्रों के लिए गुप्त मंजूरी से जुड़ी रही है। इस मामले की जांच से पता चता है कि करीब 700 करोड़ रुपये मूल्य की 59 खेपों को बगैर कर एवं शुल्क भुगतान और किसी उचित इनवॉयस को जारी किए बिना ही मंजूरी दे दी गई थी।
यह भी पता चला है कि पूर्व प्रबंधन द्वारा इस तरह की गतिविधि को दिवालिया प्रक्रिया शुरू होने के बाद भी जारी रखा गया था। बीपीएसएल मामला सर्वोच्च न्यायालय में सुनवाई के अंतिम चरण में है।