लोकसभा ने स्वास्थ्य सुरक्षा से राष्ट्रीय सुरक्षा उपकर विधेयक, 2025 शुक्रवार को पारित कर दिया। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस प्रस्ताव के पक्ष में अपनी बात रखते हुए कहा कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने और जन स्वास्थ्य को समर्थन देने के लिए जरूरी है। उन्होंने जोर दिया कि यह कर केवल उन वस्तुओं पर लगेगा जो सेहत के लिए ठीक नहीं हैं, खासतौर पर पान मसाला पर।
सीतारमण ने स्पष्ट किया कि विधेयक की धारा 7(1) यह सुनिश्चित करती है कि कर से मिलने वाला पैसा सिर्फ दो कामों में इस्तेमाल होगा यानी राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने और जन स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में। इन दोनों उद्देश्यों के लिए विशेष योजनाएं नियमों के जरिये तय की जाएंगी। उन्होंने यह भी कहा कि चूंकि जन स्वास्थ्य राज्य का विषय है ऐसे में स्वास्थ्य के लिए तय की गई रकम राज्यों को दी जाएगी।
विधेयक पेश करते हुए वित्त मंत्री ने रक्षा तैयारियों में पहले रही कमियों का जिक्र किया और कहा कि भारत अब उन परिस्थितियों में नहीं रह सकता है। उन्होंने संसद में पहले दिए गए बयानों का हवाला दिया, जिनमें यह स्वीकार किया गया था कि ‘पैसा न होने’ की वजह से खरीद नहीं हो पाई थी। उन्होंने यह भी कहा कि सेना के सेवानिवृत जनरलों ने बार-बार यह बताया था कि 1990 के दशक में बजट की कमी के कारण सेना के पास अधिकृत हथियारों, गोला-बारूद और उपकरणों का केवल 70-80 प्रतिशत हिस्सा ही था।
सीएजी की रिपोर्टों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि मार्च 2013 तक, 170 प्रकार के गोला-बारूद में से 125 तरह के गोला-बारूद, 20 दिनों के युद्ध के लिए जरूरी भंडार से कम थे और भीषण युद्ध की स्थिति में आधे गोला-बारूद 10 दिनों से भी कम समय तक के लिए उपलब्ध थे। उन्होंने कहा, ‘हम उस स्थिति को फिर से नहीं होने दे सकते।’
उन्होंने तर्क दिया कि उपकर से रक्षा जरूरतों के लिए ‘लगातार, नियमित और स्थिर आय’ का स्रोत तैयार होगा। मंत्री ने कहा कि आधुनिक युद्ध में सटीक हथियारों, स्वचालित प्रणालियों, अंतरिक्ष परिसंपत्तियों और साइबर अभियानों की जरूरत होती है और इन तकनीकों को लगातार बेहतर बनाने की जरूरत होती है।
इस तरह का उपकर लगाने के लिए केंद्र के संवैधानिक अधिकार पर सदस्यों द्वारा जताई गई चिंता पर प्रतिक्रिया देते हुए, मंत्री ने अनुच्छेद 270 का हवाला दिया जो संसद को किसी विशेष उद्देश्य के लिए उपकर लगाने का अधिकार देता है। उन्होंने उच्चतम न्यायालय के 2019 के मोहित मिनरल्स के फैसले का भी जिक्र किया, जिसमें इन अधिकारों की पुष्टि की गई थी।
उन्होंने जोर देकर कहा कि उपकर से जुड़ी सभी अधिसूचना संसद के सामने पेश की जाती है और इनकी निगरानी सीएजी, लोक लेखा समिति, वित्त संबंधी स्थायी समिति और आंतरिक ऑडिट प्रणाली द्वारा की जाती है।
सीतारमण ने बताया कि उपकर वास्तव में मशीन की क्षमता, पाउच की रफ्तार और वजन पर निर्भर करेगा। मशीनों के आकार और उत्पादन के हिसाब से कर की दर अलग-अलग होगी। हाथ से काम करने वाली छोटी इकाइयों के लिए उपकर 11 लाख रुपये प्रति फैक्ट्री तय की गई है जो मशीनों से काम करने वाली इकाइयों की तुलना में काफी कम है।