भारत में पिछले दशक के दौरान विभिन्न क्षेत्रों का बाजार लगातार मजबूत हुआ है। मगर हर्फिंडल-हर्शमैन सूचकांक (एचएचआई) बताता है कि विमानन क्षेत्र का दबदबा सबसे ज्यादा है और यही कारण है कि यह शीर्ष पर है। भारतीय विमानन क्षेत्र में एचएचआई वित्त वर्ष 2025 में बढ़कर 4500 हो गया। यह अमेरिका के न्याय विभाग और यूरोपीय आयोग के एंटी-ट्रस्ट प्रभाग द्वारा बताए गए अत्यधिक मजबूत बाजार की सीमा से दोगुने से भी अधिक है।
भारतीय विमानन उद्योग में एचएचआई स्कोर पिछले दस वर्षों में वित्त वर्ष 2015 के 2678 से 1800 अंकों से अधिक बढ़ा है, जो बिज़नेस स्टैंडर्ड द्वारा एकत्रित आठ प्रमुख उद्योगों के आंकड़ों में सर्वाधिक है। बाजार की मजबूती के लिहाज से विमानन क्षेत्र दूरसंचार क्षेत्र से भी आगे है, जिसने 2017 में रिलायंस इंडस्ट्रीज के प्रवेश के बाद एचएचआई स्कोर में दमदार वृद्धि दर्ज की है। दूरसंचार क्षेत्र में एचएचआई स्कोर पिछले दशक में लगभग 1500 अंकों की वृद्धि के साथ 1670 से वित्त वर्ष 25 में 3174 हो गया है।
अमेरिक का न्याय विभाग और यूरोपीय आयोग दोनों ही मजबूती के स्तर को मापने और विलय एवं अधिग्रहण प्रस्तावों की जांच के लिए एचएचआई पैमाने का उपयोग करते हैं। अमेरिका का न्याय विभाग और संघीय व्यापार आयोग के अनुसार, 1,800 से अधिक एचएचआई वाले बाजार अत्यधिक मजबूत होते हैं और ऐसा विलय जो अत्यधिक मजबूत बाजार बनाता है या उसे और मजबूत करता है और जिसमें एचएचआई में 100 अंकों से अधिक की वृद्धि शामिल होती है, उससे प्रतिस्पर्धा में भारी कमी आने या एकाधिकार स्थापित होने की संभावना मानी जाती है।
यूरोपीय आयोग के दिशानिर्देशों के अनुसार, अत्यधिक मजबूत बाजार के लिए एचएचआई सीमा 2000 है और ऐसा विलय जो एचएचआई में 150 अंकों या उससे अधिक की वृद्धि करता है, उससे प्रतिस्पर्धा में कमी आने की संभावना मानी जाती है।
भारत के आठ प्रमुख उद्योगों का औसत एचएचआई स्कोर पिछले दशक में 550 अंकों तक बढ़ा है। भारतीय विमानन क्षेत्र का एचएचआई स्कोर दूरसंचार, विमानन, सीमेंट, लोहा एवं इस्पात, टायर, यात्री कार, दोपहिया वाहन और पेंट जैसे देश के आठ प्रमुख उद्योगों के औसत एचएचएआई स्कोर से लगभग 78 फीसदी अधिक है।
एचएचआई स्कोर किसी बाजार या क्षेत्र में कार्यरत सभी फर्मों की राजस्व हिस्सेदारी पर तय किया जाता है। इसकी गणना उस क्षेत्र की सभी फर्मों की राजस्व बाजार हिस्सेदारी (प्रतिशत में) के वर्ग को जोड़कर की जाती है। एचएचआई पैमाना 0 (जब प्रत्येक उद्योग भागीदार की बाजार हिस्सेदारी नगण्य हो) से लेकर एक कंपनी के एकाधिकार की स्थिति में अधिकतम 10,000 तक होता है। एचएचआई बड़ी फर्मों की बाजार हिस्सेदारी को आनुपातिक रूप से अधिक महत्त्व देता है और बहुत छोटी फर्में एचएचआई स्कोर को महत्त्वपूर्ण रूप से प्रभावित नहीं करती हैं।
एचएचआई पैमाने पर, भारत का विमानन बाजार वित्त वर्ष 2008 से लगभग 2800 के औसत स्कोर के साथ हमेशा अत्यधिक मजबूत रहा है। मगर स्पष्ट प्रतिस्पर्धा की कमी अतीत में चिंता का विषय नहीं थी क्योंकि सरकारी स्वामित्व वाली एयर इंडिया, जिसने वित्त वर्ष 2008 और वित्त वर्ष 22 के बीच बाजार के लगभग एक-तिहाई हिस्से को नियंत्रित किया से उद्योग में प्रतिस्पर्धा-विरोधी व्यवहार में कमी आने की उम्मीद थी। वित्त वर्ष 22 में यह स्थिति बदल गई जब विनिवेश प्रक्रिया के तहत टाटा समूह ने एयर इंडिया का अधिग्रहण कर लिया। इसके बाद समूह ने अपने दो अन्य विमानन उपक्रमों टाटा-एसआईए एयरलाइंस (विस्तारा) और एयर एशिया का एयर इंडिया में विलय कर दिया, जिससे एयर इंडिया की बाजार हिस्सेदारी में तेज वृद्धि हुई।