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इलेक्ट्रिक वाहन विनिर्माताओं को बैटरी के दाम गिरने का भरोसा

अमेरिका के दंडात्मक टैरिफ के बाद चीनी बैटरियों की कीमत में गिरावट संभावित, भारतीय EV कंपनियों को उत्पादन लागत कम होने की उम्मीद

Last Updated- October 04, 2024 | 10:47 PM IST
Electric vehicle

इलेक्ट्रिक वाहन विनिर्माताओं को अगले 12 महीनों के दौरान लीथियम आयन बैटरी की कीमत में 5 से 10 फीसदी की गिरावट आने की उम्मीद है। उद्योग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह जानकारी दी है। ये बैटरियां मुख्य तौर पर चीन से आती हैं और चीनी बैटरियों पर अमेरिका द्वारा लगाए गए दंडात्मक टैरिफ के बाद इनके सस्ते होने की उम्मीद है।

कुछ दिन पहले ही बाइडेन प्रशासन द्वारा तय की गई टैरिफ से इन बैटरियों के चीनी निर्यात पर गंभीर असर पड़ सकता है। अपने घरेलू उद्योग को प्रतिस्पर्धा से बचाने ने अमेरिका ने इस साल से इलेक्ट्रिक वाहन के लिए जरूरी लीथियम आयन बैटरी पर आयात शुल्क 7.5 फीसदी से बढ़ाकर 25 फीसदी कर दिया है।

चीन की अतिरिक्त बैटरी उत्पादन क्षमता से प्रेरित पिछली भारी गिरावट के कारण वाहन विनिर्माताओं की लागत में गिरावट आने की संभावना है। भारतीय विनिर्माताओं के लिए निकल मैंगनीज कोबाल्ट (एनएमसी) बैटरियों की कीमत सितंबर में कम होकर 90 डॉलर प्रति किलोवॉट हो गई है, जो छह महीने पहले 100 डॉलर थी यानी इसमें 10 फीसदी की गिरावट आई। इसके अलावा, लीथियम आयरन फॉस्फेट (एलएफपी) बैटरियां भी पहले से कहीं ज्यादा किफायती हो गई हैं। भारत के लिए एलएफपी सेल की कीमत सितंबर में घटकर 65 से 70 डॉलर प्रति किलोवॉट हो गईं, जो छह महीने पहले 75 डॉलर थी।

एलएफपी और सामान्यतः उपयोग की जाने वाली एनएमसी बैटरियों की कीमत में इस अंतर के बाद कई कंपनियों को सस्ते विकल्पों पर विचार करने के लिए प्रेरित किया है। उदाहरण के लिए एथर एनर्जी ने अपने आईपीओ मसौदे में बताया है कि वह अपने कुछ इलेक्ट्रिक स्कूटरों में एलएफपी बैटरी के उपयोग पर विचार कर रही है और इसका परीक्षण पहले से ही चल रहा है। टाटा मोटर्स और एमजी मोटर्स जैसी कार विनिर्माता कंपनियां पहले से ही अपने कुछ मॉडलों में एलएफपी बैटरी का उपयोग कर रहे हैं।

इलेक्ट्रिक वाहन कंपनी के एक शीर्ष अधिकारी ने कहा, ‘फिलहाल, सभी इलेक्ट्रिक वाहन कंपनियां ज्यादातर चीन से बैटरी आयात करती हैं। ऐसी चिंताएं हैं कि विभिन्न उत्पादों पर अमेरिका द्वारा तय किए गए टैरिफ के बाद चीन भारत में अपना माल भेज सकता है, लेकिन लीथियम आयन बैटरी के साथ ऐसी चिंता नहीं है। ऐसा इसलिए है क्योंकि भारत में अभी तक इसका विनिर्माण कोई नहीं कर रहा है और किसी भी देसी उत्पादन को बढ़ने में कम से कम साल 2026 तक का वक्त लगेगा। हमें इस मौके का फायदा लेना चाहिए।’

ओला इलेक्ट्रिक अगले साल से लीथियम आयन बैटरी बनाना शुरू कर सकती है मगर शुरू में कंपनी सिर्फ अपने वाहनों के लिए इसे तैयार करेगी। कंपनी की फैक्टरी नवीनतम 4860 बैटरी टेक्नोलॉजी का उपयोग करेगी, जो फिलहाल उपयोग में आने वाली 2170 बैटरियों के मुकाबले अधिक रेंज प्रदान करती है।

इलेक्ट्रिक वाहन उद्योग के अधिकारियों के मुताबिक, आने वाले महीनों में एनएमसी बैटरियों की कीमतें और कम होकर 80 डॉलर प्रति किलोवॉट हो सकती हैं। नतीजतन, 3 किलोवॉट वाले इलेक्ट्रिक स्कूल पर करीब 5,400 रुपये की बचत होगी। एनएमसी से एलएफपी बैटरियों का रुख करने से इसमें और अधिक 5,000 रुपये की बचत हो सकती है।

First Published - October 4, 2024 | 10:47 PM IST

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