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गैर-सूचीबद्ध फर्मों के कायदे सख्त, नियामकीय ढांचा बनाने पर विचार कर रही सरकार

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मंत्रालय के मुताबिक बड़ी गैर-सूचीबद्ध फर्मों से समूची व्यवस्था पर पड़ सकता है असर

Last Updated- September 25, 2023 | 9:19 PM IST
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BS

जिन बड़ी गैर-सूचीबद्ध कंपनियों का असर समूची प्रणाली पर पड़ सकता है, उनके लिए कंपनी मामलों का मंत्रालय (एमसीए) नियामकीय ढांचा बनाने पर विचार कर रहा है। सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इसकी जानकारी दी। मंत्रालय को लगता है इन कंपनियों के लिए नियम-कायदे अभी काफी नरम हैं और उन्हें सख्त बनाने की जरूरत है।

वरिष्ठ अ​धिकारी ने कहा, ‘भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने सूचीबद्ध कंपनियों के लिए नियम-कायदों की सुपरिभाषित व्यवस्था बना रखी है। ऐसे में कंपनी मामलों के मंत्रालय को लगता है कि बड़ी गैर-सूचीबद्ध कंपनियों के लिए भी एक उपयुक्त ढांचे पर गौर करने की जरूरत है।’ उन्होंने कहा कि ये कायदे कंपनी कानून समिति की चर्चा का हिस्सा हो सकते हैं। इस समिति का कार्यकाल हाल ही में 16 सितंबर, 2024 तक बढ़ा दिया गया है।

अ​धिकारी ने कहा, ‘हमें अहसास है कि छोटी कंपनियों पर अनुपालन का बोझ कम होना चाहिए मगर कई ऐसी गैर-सूचीबद्ध कंपनियां हैं जो काफी बड़ी हैं और जिनका असर समूची प्रणाली या व्यवस्था पर पड़ सकता है।’

कंपनी (संशोधन) अ​धिनियम, 2020 में निर्धारित श्रे​णियों की गैर-सूचीबद्ध कंपनियों के लिए समय-समय पर वित्तीय परिणाम तैयार करने का प्रावधान किया गया, लेकिन कंपनी मामलों के मंत्रालय ने इसकी अधिसूचना जारी नहीं की। अभी इसी बात पर चर्चा चल रही है कि बड़ी गैर-सूचीबद्ध कंपनियों की परिभाषा तय करने के लिए कौन-कौन से पैमाने होने चाहिए।

मगर हाल ही में नामी एडटेक कंपनी बैजूस जैसे स्टार्टअप में कंपनी संचालन की खामियां सामने आने के बाद यह मुद्दा बहुत अहम हो गया है। डेलॉयट ह​स्किन्स ऐंड सेल्स ने बैजूस की ऑडिटर की जिम्मेदारी से इस्तीफा दे दिया था। निदेशक मंडल से तीन सदस्यों ने भी इस्तीफे दे दिए। यह बात सामने आने के बाद कंपनी मामलों के मंत्रालय ने बैजूस के बहीखातों की जांच के आदेश दिए थे।

कंपनी (संशोधन) अ​धिनियम विधेयक पर अभी मंत्रालयों के बीच चर्चा चल रही है। कंपनी मामलों का मंत्रालय इसे संसद के आगामी शीत सत्र में ही ले आने का इच्छुक है।

एमसीए के सचिव की अध्यक्षता वाली कंपनी कानून समिति विचार करेगी कि कंपनी कानून में अभी क्या बदलाव करने की जरूरत है। सरकार ने कानून का पालन करने वाली कंपनियों के लिए कारोबारी सुगमता, आम हितधारकों के लए बेहतर कॉरपोरेट अनुपालन को बढ़ावा देने और देश में कंपनियों के कामकाज को प्रभावित करने वाली नई समस्याओं के समाधान के उद्देश्य से इस समिति का गठन किया था। इसका मकसद देश में जीवन आसान बनाना था।

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First Published - September 25, 2023 | 9:19 PM IST

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