facebookmetapixel
Advertisement
किसानों के लिए बड़ी खुशखबरी: पीएम मोदी ने जारी की PM-Kisan की 23वीं किस्त, ऐसे चेक करें स्टेटसकेंद्र सरकार ने 16 FDC दवाओं पर लगाया परमानेंट बैन, कई स्किन क्रीम और एंटीबायोटिक भी लिस्ट मेंसावधान! ऑनलाइन बैंकिंग फ्रॉड का हुए शिकार तो तुरंत करें ये काम, वरना डूब जाएगा पूरा पैसा; जानें RBI के नियमDividend Stocks: टाटा पावर और LIC समेत ये 31 कंपनियां अगले हफ्ते बांटेंगी मुनाफा, देखें पूरी लिस्टट्रंप ने की पीएम मोदी की जमकर तारीफ, बोले: 150 करोड़ लोगों का यह नेता है असली ‘टफ कुकी’NEET UG 2026: नागपुर के छात्र को मिला अबू धाबी का परीक्षा केंद्र, NTA की लापरवाही से परिवार परेशानBonus Stocks Alert: अगले हफ्ते इन 2 कंपनियों के निवेशकों की चमकेगी किस्मत, मिलेंगे मुफ्त में शेयरOMC को भारी चपत: तेल कंपनियों को लगा ₹22,000 करोड़ का बड़ा झटका, बाजार से कम दाम पर बेची रसोई गैसCrude Oil Import: पश्चिम एशिया संकट की भारी चपत, बराबर तेल खरीदने के बाद भी 81.5% बढ़ा भारत का खर्चRBI Regulatory Action: विदेश से जुटाई उधारी की रोज देनी होगी जानकारी, RBI ने बैंकों को दिया कड़ा निर्देश

डिस्प्रोसियम व टेरबियम मिल जाएं, तो भी काम चल जाए !

Advertisement

वर्तमान में 40 से अधिक आवेदन कथित तौर पर चीन की मंजूरी का इंतजार कर रहे हैं।

Last Updated- June 11, 2025 | 10:57 PM IST
China Flag
प्रतीकात्मक तस्वीर

चीन से दुर्लभ खनिजों का लाइसेंस हासिल करने के मामले में कम से कम 10 आवेदकों के अग्रिम चरण में होने की खबरों के बीच सूत्रों ने संकेत दिया है कि उद्योग और केंद्र सरकार घरेलू मैग्नेट के उत्पादन के लिए महत्त्वपूर्ण दो प्रमुख सामग्रियों – डिस्प्रोसियम और टेरबियम के आयात के लिए सक्रिय रूप से जोर दे रही है।

भारत को मुख्य रूप से स्थायी मैग्नेट में इस्तेमाल के लिए कई दुर्लभ खनिज तत्वों की आवश्यकता है, खास तौर पर नियोडिमियम, प्रेजोडियम, डिस्प्रोसियम और टेरबियम की। डिस्प्रोसियम और टेरबियम ऐसे दो भारी दुर्लभ खनिज तत्व (एचआरईई) हैं, जिनमें अद्वितीय गुणधर्म होते हैं, विशेष रूप से चुंबकत्व के क्षेत्र में। ये दोनों भारत में इतनी मात्रा में उपलब्ध नहीं हैं कि इन्हें भंडारों से निकाला जा सके। हालांकि भारत के पास लैंथेनम, सेरियम, नियोडिमियम और प्रेजोडिमियम जैसे कुछ दुर्लभ खनिज तत्व (आरईई) हैं, लेकिन वह डिस्प्रोसियम और टेरबियम समेत भारी दुर्लभ खनिज तत्वों के लिए आयात पर बहुत अधिक निर्भर है।

भारतीय दूतावास चीन में समकक्ष अधिकारियों के संपर्क में है ताकि भारतीय प्रतिनिधिमंडल के लिए मुलाकात का समय तय हो सके। इस प्रतिनिधिमंडल में भारत का कोई भी सरकारी अधिकारी शामिल नहीं होगा। वर्तमान में 40 से अधिक आवेदन कथित तौर पर चीन की मंजूरी का इंतजार कर रहे हैं। एक सूत्र ने कहा कि उद्योग अधिकारियों की टीम ने अभी तक बातचीत के किसी भी मुद्दे को तय नहीं किया है, क्योंकि चीनी सरकार के साथ मुलाकात का समय अभी तक तय नहीं हो पाया है।

एक सूत्र ने कहा, ‘आपूर्तिकर्ताओं को नए मानदंडों के आधार पर अंतिम-उपयोग की शर्तों को पूरा करना होगा। अगर पिछली स्थिति बहाल नहीं होती है, तो हम डिस्प्रोसियम और टेरबियम के लिए जोर देने पर विचार कर रहे हैं।’

वाहन उद्योग के एक और शीर्ष अधिकारी ने कहा, ‘हमारी बातचीत का पहला मुद्दा बहाली की स्थिति हो सकती है। वाहनों के पुर्जे बनाने के लिए हमें जो चाहिए, वह हमें प्राप्त करना होगा। इसे किसी और चीज से नहीं बदला जा सकता है। अगर वे राजी नहीं होते हैं, तो भारी दुर्लभ खनिज तत्वों को आगे बढ़ाया जा सकता है। हम कच्चा माल लाएंगे और चीन पर निर्भर हुए बिना इसे खुद करेंगे।’ नियोडिमियम का उपयोग इलेक्ट्रिक मोटर, पवन टरबाइन और ईवी के लिए मैग्नेट में किया जाता है। प्रेजोडिमियम का इस्तेमाल मैग्नेट में नियोडिमियम के साथ किया जाता है।

अधिक मूल्य वाले दो दुर्लभ खनिज डिस्प्रोसियम और टेरबियम इलेक्ट्रिक वाहनों की मोटर, पवन टरबाईन जनरेटर जैसे अनुप्रयोगों तथा उष्मा प्रतिरोध और दीर्घकालिक प्रदर्शन की जरूरत वाले विभिन्न औद्योगिक उपकरणों के लिए महत्त्वपूर्ण होते हैं।

Advertisement
First Published - June 11, 2025 | 10:30 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement