फिनटेक सास फर्म क्लियर (शुरू में क्लियरटैक्स) ने डिजिटल परिसंपत्तियों पर सपाट 30 प्रतिशत कर लगाने के बजट प्रस्तावों की प्रतिक्रिया में उद्यमियों और कुछ खास उपयोगकर्ताओं के लिए क्रिप्टो टैक्स एवं पोर्टफोलियो प्रबंधन प्लेटफॉर्म पेश करने की घोषणा की है।
कंपनी के बयान में कहा गया है कि चूंकि ई-फाइलिंग एवं वित्तीय सेवाओं के लिए भारत के सबसे बड़े सास प्लेटफॉर्म की मालिक के तौर पर क्लियर ऐसे निवेशकों की मदद के लिए क्रिप्टो एक्सचेंजों के लिए भागीदारी करेगी और सभी वॉलेटों तथा एक्सचेंजों पर उनके क्रिप्टो पोर्टफोलियो पर नजर रखने में सहायता करेगी।
विज्ञप्ति में कहा गया है कि क्लियर न सिर्फ निवेशकों को उनके टीडीएस, कर और जीएसटी स्तर के इनवॉइस और जमाओं की रिपोर्टिंग में मदद करेगी बल्कि उन सभी पारंपरिक प्रक्रियाओं को दूर करने के लिए एक्सचेंजों के साथ परोक्ष तौर पर समेकन करेगी, जिनसे अभी कारोबारियों को जूझना पड़ता है। सभी क्रिप्टो ट्रेडिंग, निवेश और होल्डिंग पैटर्न उनकी परिसंपत्ति देयता में घोषित किए जाएंगे और स्वत: ही कर की गणना हो जाएगी। उपयोगकर्ताओं को लाइव पोर्टफोलियो प्रदर्शन डैशबोर्ड मिलेगा और कर रिपोर्ट सही समय पर निर्णय लेने में सक्षम होंगी।
क्लियर अपने ग्राहकों को नए कर नियमों के पालन में मदद के लिए क्रिप्टो एक्सचेंजों के साथ समझौता करेगी।
क्लियर के सह-संस्थापक एवं मुख्य कार्याधिकारी अर्चित गुप्ता के हवाले से विज्ञप्ति में कहा गया है, ‘हमारे पास मौजूदा समय में करीब 50,000 आयकर फाइल करने वाले ग्राहक हैं जो क्रिप्टो आय दर्ज करते हैं। हालांकि क्रिप्टो करों पर भारत सरकार के नियमों को देखते हुए परिसंपत्ति स्तर पर उनके लेनदेन पर नजर रखने से उन सौदों के शुद्घ लाभ या नुकसान पर नजर रखने में मदद मिलेगी, जो क्रिप्टो ट्रेडिंग के लिए जरूरी होंगे। हमारी क्रिप्टो पेशकश से मौजूदा और संभावित कारोबारियों को अपने क्रिप्टो पोर्टफोलियो का करों के संबंध में प्रबंधन करने और अपने निर्णय आसानी से लेने में मदद मिलेगी।’
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पहले डिजिटल रुपये को जारी करने के लिए भारतीय सरकार की योजनाओं की घोषणा की। यह मुद्रा सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (सीबीडीसी) है। वहीं विशेष कर व्यवस्था हाल में देश में आभासी परिसंपत्ति लेनदेन की तीव्रता में वृद्घि दर्ज करने के लिए घोषित की गई थी।