सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन (बीपीसीएल) आंध्र प्रदेश में बनने वाली अपनी नई रिफाइनरी में 30 से 40 फीसदी हिस्सेदारी का विनिवेश करने के लिए तैयार है। बीपीसीएल के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि खाड़ी क्षेत्र की दिग्गज कंपनी सऊदी अरामको 20 फीसदी और ऑयल इंडिया 10 फीसदी हिस्सेदारी खरीदकर इस परियोजना में अल्पांश भागीदार के रूप में शामिल हो सकती हैं। अधिकारी ने कहा कि इस परियोजना में दिलचस्पी दिखाने वाले बैंकों को भी बीपीसीएल 4 से 5 फीसदी हिस्सेदारी बेच सकती है।
इस मामले में जानकारी के लिए बीपीसीएल और ऑयल इंडिया को ईमेल भेजा गया मगर खबर लिखे जाने तक जवाब नहीं आया। सऊदी अरामको ने कोई भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।
बीपीसीएल बढ़ती घरेलू मांग को पूरा करने और पेट्रोकेमिकल निर्यात को बढ़ावा देने के लिए नेल्लोर जिले में रामायपत्तनम बंदरगाह के पास नई रिफाइनरी और पेट्रोकेमिकल परियोजना लगा कर रही है। आंध्र प्रदेश सरकार ने इस परियोजना के लिए बीपीसीएल को 6,000 एकड़ जमीन आवंटित की है।
अधिकारी ने कहा, ‘निवेश पर अंतिम बातचीत विस्तृत व्यवहार्यता रिपोर्ट पूरी होने के बाद की जाएगी क्योंकि इससे हमें परियोजना की अंतिम लागत का पता चलेगा।’
परियोजना की व्यवहार्यता रिपोर्ट फरवरी के अंत तक पूरी होने की उम्मीद है। इस बीच बीपीसीएल ने इस परियोजना के लिए 96,000 करोड़ रुपये से अधिक की लागत का अनुमान लगाया है और रिफाइनरी की परिचालन क्षमता 90 लाख से 1.2 करोड़ टन सालाना हो सकती है। अधिकारी ने कहा कि परियोजना की अंतिम निवेश लागत में कंपनी के शुरुआती अनुमान से 30 फीसदी तक का अंतर हो सकता है।
बीपीसीएल प्रस्तावित रिफाइनरी में निवेश के लिए सऊदी अरब सहित विदेशी कंपनियों के साथ बातचीत कर रही है। साल 2019 में सऊदी अरब ने भारत के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए थे, जिसमें ऊर्जा, कृषि, बुनियादी ढांचा और विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में 100 अरब डॉलर का निवेश करने की योजना की घोषणा की गई थी। यह निवेश अभी तक साकार नहीं हुआ है।
बीपीसीएल ने आंध्र प्रदेश की रिफाइनरी के निर्माण में रणनीतिक साझेदारी की गुंजाइश के लिए अक्टूबर में ऑयल इंडिया के साथ समझौता ज्ञापन पर भी हस्ताक्षर किए थे, इससे इस कंपनी के भी परियोजना में अल्पांश हिस्सेदारी लेने की संभावना है।
बीपीसीएल भारत की दूसरी सबसे बड़ी तेल मार्केटिंग कंपनी है। घरेलू बाजार में पिछले वित्त वर्ष में इसकी हिस्सेदारी 27.44 फीसदी रही थी। कंपनी की मुंबई (महाराष्ट्र), कोच्चि (केरल) और बीना (मध्य प्रदेश) में तीन रिफाइनरियां हैं और देश की कुल तेलशोधन क्षमता में इसकी हिस्सेदारी 14 फीसदी है।
भारत दुनिया का चौथा सबसे बड़ा तेलशोधक है और यह ईंधन तथा पेट्रोकेमिकल की बढ़ती मांग के बीच रिफाइनिंग क्षमता को बढ़ावा देने का लक्ष्य बना रहा है। महाराष्ट्र के रत्नागिरी में 6 करोड़ टन सालाना क्षमता वाली रिफाइनरी लगाने की शुरुआती योजना को भूमि अधिग्रहण चुनौतियों के कारण रोक दिया गया था।