बलरामपुर चीनी मिल्स लिमिटेड (बीसीएमएल) उत्तर प्रदेश के कुंभी में भारत की पहली औद्योगिक पैमाने की पॉलीलैक्टिक एसिड (पीएलए) बायोपॉलीमर विनिर्माण सुविधा स्थापित कर रहा है। करीब 80 हजार टन पीएलए उत्पादन क्षमा वाले इस संयंत्र की लागत 2850 करोड़ रुपये होगी । उत्तर प्रदेश में उत्पादन संयंत्र के साथ कंपनी की नजर मुंबई जैसे बड़े बाजार में है, जिसके लिए मुंबई में बायोयुग और बायोयुग ऑन व्हील्स की शुरुआत की।
भारत का पहला औद्योगिक पैमाने का बायोपॉलीमर संयंत्र होगा और एक नया वैश्विक मानक भी स्थापित करेगा। बीसीएमएल ने बायोप्लास्टिक के उत्पादन, उपयोग और फायदे की जानकारी देने के साथ- साथ स्टार्टअप को जोड़ने के लिए मुंबई में बायोयुग और बायोयुग ऑन व्हील्स की शुरुआत की। यह पहल पैकेजिंग और उपभोक्ता उत्पादों में लाइव प्रदर्शनों, इंटरैक्टिव प्रदर्शनों और वास्तविक दुनिया के अनुप्रयोगों के माध्यम से समुदायों और हितधारकों तक सीधे पीएलए की जानकारी देगा।
80,000 टन की वार्षिक उत्पादन क्षमता के साथ, यह संयंत्र 100 फीसदी औद्योगिक रूप से खाद योग्य और जैव-आधारित पीएलए का उत्पादन करेगा, जो एक बहुमुखी सामग्री है जो प्रतिबंधित एकल-उपयोग प्लास्टिक (एसयूपी) वस्तुओं जैसे कि स्ट्रॉ, डिस्पोजेबल कटलरी, खाद्य ट्रे, बोतलें, दही कप और कैरी बैग को प्रतिस्थापित करने के लिए आदर्श है।
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बलरामपुर चीनी मिल्स लिमिटेड की कार्यकारी निदेशक अवंतिका सरावगी ने कहा कि आज हमने सिर्फ़ एक ब्रांड का अनावरण नहीं किया बल्कि हमने एक परिवर्तनकारी आंदोलन शुरू किया। बायोयुग, बायो सर्कुलेरिटी के युग का प्रतीक है, जो भारत के बायो-आधारित, कम कार्बन अर्थव्यवस्था में परिवर्तन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। बलरामपुर चीनी मिल्स अपनी चीनी उत्पादन की 9 फीसदी चीनी से पीएलए तैयार करेगी। बलरामपुर उत्तर प्रदेश के साथ महाराष्ट्र में भी अपनी पकड़ मजबूत करना चाह रही है।
सरावगी कहती हैं कि महाराष्ट्र न केवल एक प्रमुख गन्ना उत्पादक है, बल्कि भारत की औद्योगिक अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण स्तंभ भी है। अपने मजबूत कृषि-औद्योगिक आधार के साथ, यह देश के अग्रणी बायोप्लास्टिक बाजार के रूप में उभर सकता है। दरअसल प्लास्टिक उत्पादों से सबसे ज्यादा नुकसान मुंबई जैसे शहरों को हो रहा है और यह एक बड़ा बाजार है इसलिए कंपनी ने बायोप्लास्टिक से उत्पाद तैयार करने वाले स्टार्टअप को भी साथ लेने की रणनीति तैयार की है। कंपनी अधिकारियों का कहना है कि जो लोग बायोप्लास्टिक पर काम कर रहे हैं उन्हे कच्चा माल बलरामपुर चीनी मिल्स उपलब्ध कराने का प्रयास करेगी।
बलरामपुर चीनी मिल्स के सीएफओ प्रमोद पटवारी ने बताया कि इस साल कंपनी ने 9.30 लाख टन चीनी का उत्पादन किया है जबकि 2 लाख टन चीनी से एथेनॉल तैयार किये हैं। हमारी उत्पादन क्षमता 13 लाख टन की है। ऐसे में कंपनी अपने चीनी उत्पादन का 9 फीसदी पीएलए उत्पादन में लगाती है तो भी उसके चीनी उत्पादन पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा। प्लास्टिक से बने उत्पादों की अपेक्षा पीएलए के उत्पाद फिलहाल महंगे हैं लेकिन उत्पादन और मांग बढ़ने के साथ उनकी कीमतों में कमी आएगी, जो पर्यावरण के लिए फायदेमंद होगा।