facebookmetapixel
ITC के Q3 नतीजों की तारीख तय, क्या इस बार मिलेगा मोटा डिविडेंड?Axis Bank, HCL Tech और Tata Steel पर दांव लगाने की सलाह, जानिए कितना मिल सकता है रिटर्नसेना दिवस: भैरव बटालियन ने जीता लोगों का दिल, ब्रह्मोस मिसाइल ने दिखाई अपनी ताकतX ने AI चैटबॉट ग्रोक से महिलाओं और बच्चों की अश्लील तस्वीरों पर लगाया बैन, पेड यूजर्स तक सीमित किया कंटेंट क्रिएशनI-PAC दफ्तर की तलाशी पर सुप्रीम कोर्ट सख्त: ED की याचिका पर बंगाल सरकार से जवाब, FIR पर रोकवै​श्विक वृद्धि के लिए हमारी रणनीति को रफ्तार दे रहा भारत, 2026 में IPO और M&A बाजार रहेगा मजबूत27 जनवरी को भारत-ईयू एफटीए पर बड़ा ऐलान संभव, दिल्ली शिखर सम्मेलन में तय होगी समझौते की रूपरेखासुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: टाइगर ग्लोबल को टैक्स में राहत नहीं, मॉरीशस स्ट्रक्चर फेलएशिया प्राइवेट क्रेडिट स्ट्रैटिजी के लिए KKR ने जुटाए 2.5 अरब डॉलर, निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ीचीन के कदम से देसी प्लास्टिक पाइप कंपनियों को दम, पिछले एक साल में शेयर 23% टूटे

वेदांत को न्यायालय से बड़ी राहत

Last Updated- December 15, 2022 | 1:52 AM IST

रावा तेल एवं गैस क्षेत्र से जुड़े एक मामले में उच्चतम न्यायालय से अनिल अग्रवाल के वेदांत समूह को बड़ी राहत मिली है। न्यायालय ने आज सरकार की उस अर्जी को ठुकरा दिया, जिसमें एक न्यायाधिकरण के निर्णय को चुनौती दी गई थी। न्याधिकरण ने वेदांत को रावा तेल एवं गैस क्षेत्र के विकास के लिए सरकार द्वारा तय रकम 19.8 डॉलर के बजाय 49.9 करोड़ डॉलर रकम  वसूलने की इजाजत दी थी। सरकार इस मद में वेदांत को केवल 19.8 करोड़ डॉलर ही देने को तैयार थी।
यह पूरा मामला उत्पादन साझेदारी अनुबंध (पीएससी)की व्याख्या, खासकर रावा क्षेत्र के विकास पर ठेकेदारों को आए खर्च से जुड़ा है। सरकार और केयर्न ऑयल ऐंड गैस (वेदांत की एक इकाई) ने 1993 में उत्पादन साझा करने संबंधी एक समझौता किया था। रावा में तेल एवं गैस की खोज ऑयल ऐंड नैचुरल गैस
कॉर्पोरेशन (ओएनजीसी) ने की थी। समझौते के अनुसार यह तय हुआ था कि इस क्षेत्र का विकास 5 प्रतिशत शुल्क के साथ 18.98 करोड़ डॉलर की लागत से किया जाएगा। इसे बेस डेवलपमेंट कॉस्ट (बीडीसी) के नाम से भी जाना जाता है। यह विवाद 2000 से 2007 के बीच आई लागत की वसूली से जुड़ा है।
सरकार का दावा था कि केयर्न ऑयल ऐंड गैस मनमाने ढंग से 49.9 डॉलर रकम की मांग कर रही है, जो तय रकम से कहीं अधिक है। बाद में यह मामला मलेशिया के एक न्यायाधिकरण में चला गया, जिसने केयर्न के पक्ष में निर्णय सुनाया। 2018 में यह मामला दिल्ली उच्च न्यायालय के समक्ष उठा, जिसके बाद न्यायालय ने न्यायाधिकरण के आदेश पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। वेदांत के समूह मुख्य कार्याधिकारी सुनील दुग्गल ने कहा,’हम न्यायालय के निर्णय का स्वागत करते हैं। इस आदेश से वैश्विक कारोबारी समुदाय में सकारात्मक संदेश जाएगा।’

First Published - September 16, 2020 | 11:32 PM IST

संबंधित पोस्ट