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अदाणी ग्रुप ने MPS मानदंडों से बचने के लिए ऑफशोर कंपनियों का इस्तेमाल किया: OCCRP

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OCCRP ने UAE के नासिर अली शाबन अहली और ताइवान के चांग चुंग-लिंग की ऑफशोर कंपनियों के प्रमुख लाभार्थी के तौर पर पहचान की है, जिनके जरिये अदाणी समूह के शेयरों में पैसा लगाया गया

Last Updated- September 01, 2023 | 12:22 PM IST
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ऑर्गनाइज्ड क्राइम ऐंड करप्शन रिपोर्टिग प्रोजेक्ट (OCCRP) ने आरोप लगाया है कि अदाणी समूह की सूचीबद्ध कंपनियों में 25 प्रतिशत न्यूनतम सार्वनिक शेयरधारिता (एमपीएस) मानकों से बचने के लिए समूह के संस्थापक गौतम अदाणी के भाई विनोद अदाणी के दो सहायकों का इस्तेमाल किया गया था।

ओसीसीआरपी ने संयुक्त अरब अमीरात के नासिर अली शाबन अहली और ताइवान के चांग चुंग-लिंग की ऑफशोर कंपनियों के प्रमुख लाभार्थी के तौर पर पहचान की है, जिनके जरिये अदाणी समूह के शेयरों में पैसा लगाया गया। यहां इस क​थित पूंजी प्रवाह के बारे में नीचे समझाया जा रहा है:

– चांग और अहली द्वारा चार ऑफशोर कंपनियां स्थापित की गईं
– इन ऑफशोर कंपनियों ने बरमुडा में ग्लोबल अपॉरच्युनिटीज फंड (जीओएफ) नाम के एक बड़े निवेश फंड में लाखों डॉलर भेजे
– जीओएफ ने बदले में इमर्जिंग इंडिया फोकस फंड्स (ईआईएफएफ) और ईएम रीसर्जेंट फंड (ईएमआरएफ) की सदस्यता ली
– ईआईएफएफ और ईएमआरएफ** ने अदाणी एंटरप्राइजेज, अदाणी पोर्ट्स ऐंड सेज, अदाणी पावर और अदाणी ट्रांसमिशन में बड़ी हिस्सेदारी हासिल की

नोट्स: अदाणी समूह ने कहा है कि उसने इन आरोपों का खंडन किया है। इस निवेश से जुड़ी चार कंपनियां थीं – लिंगो इन्वेस्टमेंट (बीवीआई)- जिस पर चांग का स्वामित्व था, मिड ईस्ट ओसन ट्रेड (मॉरिशस)-अहली जिसका बेनी​​​फिशल ऑनर था, गल्फ ए​शिया ट्रेड ऐंड इन्वेस्टमेंट लिमिटेड (बीवीआई)- जिसा नियंत्रण अहली के पास था।

** इन दो फंडों में निवेश निर्णय विनोद अदाणी के दुबई ​स्थित सहायक द्वारा नियं​त्रित एक निवेश सलाहकार कंपनी के हाथ में था, ऐसा आरोप लगाया गया

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First Published - September 1, 2023 | 12:03 AM IST

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