facebookmetapixel
Advertisement
ऑल टाइम हाई के करीब Oil Stock पर ब्रोकरेज सुपर बुलिश, कहा- खरीद लें, 65% और चढ़ने का रखता है दमBharat PET IPO: ₹760 करोड़ जुटाने की तैयारी, सेबी में DRHP फाइल; जुटाई रकम का क्या करेगी कंपनीतेल, रुपये और यील्ड का दबाव: पश्चिम एशिया संकट से बढ़ी अस्थिरता, लंबी अनिश्चितता के संकेतवैश्विक चुनातियों के बावजूद भारतीय ऑफिस मार्केट ने पकड़ी रफ्तार, पहली तिमाही में 15% इजाफाJio IPO: DRHP दाखिल करने की तैयारी तेज, OFS के जरिए 2.5% हिस्सेदारी बिकने की संभावनाडेटा सेंटर कारोबार में अदाणी का बड़ा दांव, Meta और Google से बातचीतभारत में माइक्रो ड्रामा बाजार का तेजी से विस्तार, 2030 तक 4.5 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमानआध्यात्मिक पर्यटन में भारत सबसे आगे, एशिया में भारतीय यात्रियों की रुचि सबसे अधिकबांग्लादेश: चुनौतियों के बीच आजादी का जश्न, अर्थव्यवस्था और महंगाई बनी बड़ी चुनौतीपश्चिम एशिया संकट के बीच भारत सतर्क, रणनीतिक तेल भंडार विस्तार प्रक्रिया तेज

NTPC के खिलाफ 1,981 करोड़ रुपये का मध्यस्थता फैसला खारिज

Advertisement

एनटीपीसी के खिलाफ मध्यस्थता फैसला ओपी जिंदल समूह की इकाई जिंदल इन्फ्रालॉजिस्टिक्स लिमिटेड (जिंदल आईटीएफ) के लिए था।

Last Updated- February 04, 2025 | 6:45 AM IST
Arbitration award of Rs 1,981 crore against NTPC rejected NTPC के खिलाफ 1,981 करोड़ रुपये का मध्यस्थता फैसला खारिज

दिल्ली उच्च न्यायालय ने एनटीपीसी के खिलाफ 1,981 करोड़ रुपये का मध्यस्थता फैसला रद्द कर दिया है। 30 जनवरी के अपने निर्णय (सोमवार को अपलोड) में उच्च न्यायालय के एकल पीठ ने कहा कि मध्यस्थता फैसला ‘स्पष्ट रूप से अवैध और अनुचित’ था।

उच्च न्यायालय के 30 जनवरी के आदेश में कहा गया, ‘न्यायालय का मानना है कि विवादित निर्णय को पूरी तरह से रद्द किया जाना चाहिए क्योंकि यह गलत आधार पर पारित किया गया है और यह ‘विकृत’ और ‘स्पष्ट रूप से अवैध’ की श्रेणी में आता है। संबंधित पक्ष उचित कानूनी उपाय का लाभ उठाने के लिए स्वतंत्र होंगे।’

एनटीपीसी के खिलाफ मध्यस्थता फैसला ओपी जिंदल समूह की इकाई जिंदल इन्फ्रालॉजिस्टिक्स लिमिटेड (जिंदल आईटीएफ) के लिए था। यह मध्यस्थता फैसला पश्चिम बंगाल में फरक्का ताप विद्युत संयंत्र तक कोयला पहुंचाने के लिए जरूरी बुनियादी ढांचे के निर्माण में विलंब की वजह से सुनाया गया था।

वर्ष 2011 में, एनटीपीसी, जिंदल आईटीएफ और इनलैंड वाटरवेज अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने विद्युत संयंत्र के लिए नैशनल वाटरवे 1 के जरिये कोयले की ढुलाई के संबंध में सात वर्षीय त्रिपक्षीय समझौता किया था। फरक्का संयंत्र का प्रबंधन और नियंत्रण एनटीपीसी के पास है तथा उसने आयातित कोयले की ढुलाई के लिए बुनियादी ढांचे के निर्माण हेतु जिंदल आईटीएफ को एनटीपीसी ने अनुबंधित किया था। कथित बुनियादी ढांचा दो चरणों में पूरा किया जाना था, जिसमें पहला चरण 15 महीने (समझौते पर हस्ताक्षर की तारीख से) में पूरा होना था जबकि दूसरे चरण का निर्माण 24 महीने में पूरा किए जाने की योजना थी।

निर्माण कार्य में विलंब के बाद एनटीपीसी ने जिंदल आईटीएफ के साथ अपना यह समझौता रद्द कर दिया। जिंदल आईटीएफ ने 2016 के आखिर में एनटीपीसी के खिलाफ मध्यस्थता प्रक्रिया शुरू की थी।

Advertisement
First Published - February 4, 2025 | 6:13 AM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement