facebookmetapixel
Advertisement
शहर के लोग बैंक छोड़ कहां लगा रहे हैं पैसा?अल नीनो और ग्लोबल वार्मिंग से बदला मॉनसून का मिजाज, खेती और बिजली पर बढ़ा संकटUltraTech Cement Q1 Results: पहली तिमाही में मुनाफा 17% बढ़कर ₹2,599 करोड़, राजस्व भी रिकॉर्ड स्तर परSBI Research: बैंकों में कर्ज की रफ्तार जमा से क्यों आगे निकल गई? रिपोर्ट में सामने आईं 3 बड़ी वजहेंअभिजीत दिपके ने तोड़ा उपवास, CJP की टीम केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा से करेगी मुलाकातमजबूत Q1 नतीजों के बाद Kotak Mahindra Bank पर 5 ब्रोकरेज बुलिश, 23% तक रिटर्न का अनुमानL&T की झोली में आए मेगा ऑर्डर, खनन और स्टील सेक्टर के बड़े प्रोजेक्ट मिले; शेयर 1% तक उछलाभारत को 8% की ग्रोथ पाने के लिए निजी निवेश का 30% तक पहुंचना जरूरी- पूर्व CEA सुब्रमण्यनICICI Bank Share Price: ₹1,452 के ICICI Bank शेयर पर ₹1,850 का टारगेट, 4 ब्रोकरेज बोले 27% तक मिलेगा रिटर्नStock Market Crash: 700 अंक टूटा सेंसेक्स! शेयर बाजार में मची हलचल, जानिए आज गिरावट की 4 सबसे बड़ी वजहें

Trump Tariff: भारत के सबसे बड़े कच्चे तेल आपूर्तिकर्ता पर दबाव संभव

Advertisement

केप्लर के शिप ट्रैकिंग डेटा के मुताबिक भारत ने जून में रोजाना 21 लाख बैरल रूसी कच्चा तेल खरीदा है, जो उसके कच्चे तेल के कुल आयात का करीब 45 प्रतिशत है।

Last Updated- July 30, 2025 | 10:45 PM IST

अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप द्वारा भारत द्वारा रूस के कच्चे तेल और हथियारों की खरीद पर जुर्माना लगाने तथा भारतीय निर्यात पर 25 प्रतिशत शुल्क लगाने की घोषणा से भारत के रूसी तेल आयात में गिरावट की शुरुआत हो सकती है।  उद्योग से जुड़े सूत्रों ने बिज़नेस स्टैंडर्ड से कहा कि ट्रंप अगर अपनी धमकी पर अमल करते हैं तो रूस से कच्चे तेल का आयात घट सकता है।

केप्लर के शिप ट्रैकिंग डेटा के मुताबिक भारत ने जून में रोजाना 21 लाख बैरल रूसी कच्चा तेल खरीदा है, जो उसके कच्चे तेल के कुल आयात का करीब 45 प्रतिशत है। बिज़नेस स्टैंडर्ड की गणना के मुताबिक रूस से जून में तेल आयात का कुल मूल्य करीब 4.3 अरब डॉलर था।  

निजी क्षेत्र की जिन रिफाइनरियों पर सबसे ज्यादा असर पड़ सकता है, उनमें रिलायंस इंडस्ट्रीज और नयारा एनर्जी शामिल हैं। केप्लर के आंकड़ों के मुताबिक  इन दोनों ने जून में कुल मिलाकर रूस के कच्चे तेल का 47 प्रतिशत आयात किया है।

अमेरिका की मूडीज की सहयोगी कंपनी इक्रा के सीनियर वाइस  प्रेसीडेंट और को-ग्रुप हेड (कॉरपोरेट रेटिंग) प्रशांत वशिष्ठ ने कहा, ‘अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में रूसी तेल की आपूर्ति में कटौती की जाती है तो तेल की कीमतों में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है। वैश्विक तेल के उपभोग में रूस के तेल की हिस्सेदारी करीब 7 प्रतिशत है। ’ वशिष्ठ ने बिज़नेस स्टैंडर्ड को ई-मेल पर बताया कि अगर कच्चे तेल की कीमत में 10 डॉलर प्रति बैरल की बढ़ोतरी होती है तो आयात बिल 13 से 14 अरब डॉलर बढ़ जाएगा।  इससे तेल विपणन कंपनियों की एलपीजी, पेट्रोल और डीजल पर रिकवरी कम हो सकती है। मुंबई की एक ब्रोकरेज के मुताबिक अभी भारत की सरकारी तेल कंपनियों का मार्जिन अभी 5 रुपये प्रति लीटर है।

Advertisement
First Published - July 30, 2025 | 10:32 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement