महाराष्ट्र विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दौरान फसल खरीद पर जमकर हंगामा हुआ। विपणन मंत्री जयकुमार रावल ने विधानसभा में बताया कि इस सीजन में एनएएफईडी के माध्यम से गारंटीकृत मूल्य पर 19 लाख टन सोयाबीन खरीदने का लक्ष्य है और गारंटीकृत मूल्य पर कपास खरीदने के लिए सीसीआई केंद्रों की संख्या बढ़ाई जाएगी। हालांकि सोयाबीन की खरीद को लेकर दिए गए जवाब से विपक्षी सदस्य संतुष्ट नहीं हुए और सरकार पर किसानों के साथ धोखा और शोषण करने का आरोप लगाया।
विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान भाजपा नेता संतोष दानवे ने फसल खरीद का मामला उठाया। इस मामले पर सत्ता पक्ष के बबनराव लोनिकर और प्रकाश सोलंकी जैसे नेताओं ने भी अपनी बात रखी। जवाब में विपणन मंत्री जयकुमार रावल ने सदन को बताया कि सरकार ने पिछले वर्ष की तुलना में खरीद केंद्रों की संख्या में वृद्धि की है। साथ ही उन्होंने दावा किया कि सरकार ने खरीद भाव में भी बढ़ोतरी की है।
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विपणन मंत्री रावल ने बताया कि पिछले वर्ष 11.25 लाख टन सोयाबीन की खरीद के बाद इस वर्ष 19 लाख टन का लक्ष्य रखा गया है। केंद्र सरकार के दिशानिर्देशों के अनुसार पूरी खरीद प्रक्रिया डिजिटल और बायोमेट्रिक तरीके से की जा रही है। राज्य में अनुमानित 80 लाख मीट्रिक टन सोयाबीन का लगभग 25 प्रतिशत हस्तक्षेप योजना के तहत खरीदा जाएगा और इस योजना का मुख्य उद्देश्य बाजार मूल्यों को गिरने से रोकना है।
कपास की खरीद के संबंध में, पिछले सीजन में 10,714 करोड़ रुपये की खरीद दर्ज की गई थी। इस वर्ष 168 खरीद केंद्र स्थापित किए गए हैं और 156 केंद्र कार्यरत हैं। वर्तमान में, गारंटीशुदा गुणवत्ता वाली कपास की खरीद 5,328 रुपये के गारंटीकृत मूल्य पर जारी है। पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष 50 अतिरिक्त केंद्र खोले गए हैं।
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मक्का की कमी की समस्या से बचने के लिए नाफेड (NAFED) और NCCF को 120 करोड़ रुपये का अग्रिम भुगतान किया जा चुका है और राज्य में पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। विपणन मंत्री रावल ने कहा कि खरीद केंद्रीय मानदंडों के अनुसार चल रही है और मुख्यमंत्री ने हाल ही में हस्तक्षेप कर किसानों को अधिकतम लाभ सुनिश्चित करने के लिए चर्चा की।
विपक्षी सदस्यों ने मंत्री के दावों को खारिज कर दिया। विपक्ष ने दावा किया कि जमीनी स्तर पर कई खरीद केंद्र काम नहीं कर रहे हैं या वहां कई तरह की समस्याएं हैं। कांग्रेस नेता और विपक्ष के नेता विजय वडेट्टीवार ने आरोप लगाया कि सरकार केवल सेवा प्रदान करने की बात कर रही है, लेकिन किसानों की मदद के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठा रही। खरीद प्रक्रिया का फायदा किसानों को नहीं मिल रहा, बल्कि इसका लाभ व्यापारियों को हो रहा है। प्रदेश के कुछ इलाकों में कई फसलें और सोयाबीन एमएसपी से कम कीमत पर खरीदे जा रहे हैं।