Flex office market outlook: भारत का फ्लेक्स ऑफिस सेक्टर अगले 2 से 3 साल में तेजी से बढ़ने वाला है। कॉलियर्स इंडिया की नई रिपोर्ट “Flex India: Pioneering the Future of Work” के अनुसार देश के टॉप- 7 शहरों में फ्लेक्स ऑफिस स्टॉक 2027 तक 10 करोड़ वर्गफुट से अधिक हो जाएगा, जो 2025 के 7.23 करोड़ वर्ग फुट की तुलना में लगभग 40 फीसदी वृद्धि है। ग्रेड-A ऑफिस स्टॉक में फ्लेक्स स्पेस की हिस्सेदारी भी 8.5 फीसदी (2025) से बढ़कर 10.5 फीसदी (2027) तक पहुंचने की उम्मीद है।
इस रिपोर्ट के अनुसार, 2026–27 में औसत वार्षिक एंटरप्राइज सीट डिमांड बढ़कर 2 लाख सीट हो जाएगी, जो पिछले दो वर्षों की तुलना में 25 फीसदी ज्यादा है। इनमें टेक्नोलॉजी और BFSI सेक्टर की हिस्सेदारी सबसे अधिक 60 से 65 फीसदी रहेगी। इंजीनियरिंग-मैन्युफैक्चरिंग और कंसल्टिंग सेक्टर भी अपने फ्लेक्स पोर्टफोलियो को बढ़ाते हुए 10 से 15 फीसदी योगदान देंगे।
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ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) तेजी से फ्लेक्स स्पेस अपना रहे हैं। 2025 में कुल एंटरप्राइज सीट का 40 से 45 फीसदी हिस्सा GCC का रहा और अगले दो वर्षों में यह बढ़कर करीब 50 फीसदी हो सकता है। R&D, एनालिटिक्स, इंजीनियरिंग और AI जैसी हाई-वैल्यू फंक्शन्स को सपोर्ट करने के लिए ऑपरेटर्स “GCC-as-a-Service” मॉडल भी पेश कर रहे हैं।
कॉलियर्स इंडिया के नेशनल डायरेक्टर व रिसर्च हेड विमल नादर ने कहा की GCC फ्लेक्स स्पेस की मांग में प्रमुख भूमिका निभा रहे हैं। आने वाले वर्षों में GCC द्वारा फ्लेक्स स्पेस अपनाने में और वृद्धि की उम्मीद है। जिससे अगले दो वर्षों में उनका योगदान कुल एंटरप्राइज मांग के आधे से ज्यादा होने का अनुमान है।
इस रिपोर्ट के मुताबिक टॉप- 7 शहरों में बेंगलूरु 31 फीसदी हिस्सेदारी के साथ सबसे बड़ा फ्लेक्स मार्केट है, जहां 226 लाख वर्ग फुट ऑपरेशनल स्टॉक मौजूद है। पुणे फ्लेक्स अपनाने में सबसे आगे है, जहां फ्लेक्स पेनिट्रेशन 11.5 फीसदी है, जो देश में सबसे अधिक है। वहीं चेन्नई ने 2021 से 2025 के बीच 5.6 गुना की रिकॉर्ड वृद्धि दर्ज की है।
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इस रिपोर्ट में कहा गया है कि ऑक्यूपायर की बढ़ती जरूरतों को देखते हुए ऑपरेटर अब पूरी तरह प्रबंधित, टेक-इनेब्ल्ड, कस्टमाइज्ड और ESG-फोकस्ड वर्कस्पेस प्रदान कर रहे हैं। पिछले 2 से 3 वर्षों में 70 फीसदी फ्लेक्स स्पेस अपटेक ग्रीन सर्टिफाइड इमारतों में हुआ, जो कंपनियों की सस्टेनेबिलिटी प्राथमिकताओं को दर्शाता है।
टियर-I शहरों (मेट्रो शहर) में सेकेंडरी बिजनेस डिस्ट्रिक्ट्स (SBDs) फ्लेक्स स्पेस के मुख्य केंद्र बने हुए हैं। वहीं, अहमदाबाद, कोयंबटूर, चंडीगढ़, कोच्चि, लखनऊ और जयपुर जैसे टियर-II शहरों (मझोले) में भी तेजी से विस्तार हो रहा है, जहां किराये टियर-I की तुलना में 30 से 35 फीसदी तक कम हैं। 2027 तक टियर-II शहर देश के कुल फ्लेक्स स्टॉक में 10 से 15 फीसदी हिस्सेदारी हासिल कर सकते हैं।