facebookmetapixel
Advertisement
टॉप कंपनियों की मार्केट वैल्यू में ₹74,000 करोड़ की बढ़त, Reliance सबसे बड़ी विनरLIC मुनाफा कमाने वाली टॉप फाइनें​शियल कंपनी, कॉरपोरेट सेक्टर में Vi नंबर-1क्या अब रुपये आधारित निवेश का समय? 5 प्वाइंट में समझेंट्रंप का दावा: ईरान समझौता लगभग तय, जल्द खुल सकता है होर्मुज स्ट्रेटअमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो भारत पहुंचे, पीएम मोदी को दिया व्हाइट हाउस आने का न्योताCorporate Actions Next Week: डिविडेंड-स्प्लिट-बोनस की होगी बारिश, निवेशकों की चमकेगी किस्मतBonus Stocks: अगले हफ्ते इन 2 कंपनियों के निवेशकों की लगेगी लॉटरी, फ्री में मिलेंगे शेयरअगले हफ्ते TCS, ITC और बजाज ऑटो समेत 23 कंपनियां बाटेंगी मुनाफा, एक शेयर पर ₹150 तक कमाई का मौकाUpcoming Stock Split: अगले हफ्ते ये 2 कंपनियां बांटने जा रही हैं अपने शेयर, छोटे निवेशकों को होगा फायदाईरान पर बड़े हमले की तैयारी में ट्रंप, रिपोर्ट में दावा: वार्ता विफल होने से नाखुश, बेटे की शादी में भी नहीं जाएंगे

कच्चे तेल पर छूट के लिए इराक व UAE से भारत करेगा जल्द बातचीत

Advertisement

इराक ने जून में रूस से सस्ती दर पर कई तरह का कच्चा तेल मुहैया करवाया था। इराक ने रूस की तुलना में औसतन 9 डॉलर प्रति बैरल सस्ता कच्चा तेल उपलब्ध करवाया था

Last Updated- August 20, 2023 | 11:15 PM IST
'पेट्रोलियम राष्ट्रीय संपत्ति', तेल क्षेत्र (नियमन एवं विकास) संशोधन विधेयक 2024 पर संसद में बोली सरकार 'Petroleum is national asset', government said in Parliament on Oil Sector (Regulation and Development) Amendment Bill 2024

भारत कच्चे तेल पर छूट के लिए शीघ्र ही इराक और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) से बातचीत करेगा। सूत्रों के मुताबिक भारत रूस से मिल रही छूट की तरह इन दोनों देशों से निश्चित दर की छूट को लेकर बातचीत करेगा।

कई अधिकारियों और उद्योग के दिग्गजों के मुताबिक भारत को कच्चे तेल का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता इराक अनुमानित छूट के मामले भारतीय तेल शोधन इकाइयों से बातचीत करना चाहता है। भारत ने रूस से सस्ता मिलने के कारण ज्यादा तेल खरीदना शुरू कर दिया था जिससे उसी अनुपात में भारत का पश्चिमी देशों से तेल खरीदना कम हो गया था। इसका परिणाम यह हुआ कि इराक, सऊदी अरब और यूएई से तेल की आपूर्ति कम हो गई है।

हालांकि रूस के यूराल स्तर के कच्चे तेल का कारोबार 60 डॉलर प्रति स्तर के करीब हुआ है और इससे परे कारोबार करने पर प्रतिबंध का सामना करना पड़ता। भारत को अप्रैल के बाद से ज्यादातर रूसी कच्चे तेल की बिक्री दुबई बेंचमार्क पर हुई है और इस पर औसतन 8-10 डॉलर प्रति बैरल छूट मिली है। आईओसीएल के अधिकारी ने बताया कि भारत की तेल कंपनियां इस भाव से कम पर तेल खरीदना चाहती हैं।

बेचने वाले छूट देने को तैयार

इराक ने जून में रूस से सस्ती दर पर कई तरह का कच्चा तेल मुहैया करवाया था। इराक ने रूस की तुलना में औसतन 9 डॉलर प्रति बैरल सस्ता कच्चा तेल उपलब्ध करवाया था। लिहाजा मूल्य को लेकर अत्यधिक संवदेनशील बाजार ने इराक से कच्चे तेल को खरीदना पसंद किया। जी-7 देशों ने रूस के कच्चे तेल पर 5 दिसंबर, 2022 तक 60 डॉलर प्रति बैरल का प्राइस कैप लगा रखा है जिससे इराक से कच्चा तेल खरीदने का रुझान कायम रहा।

हालांकि रूस ने कच्चे तेल के नए खरीदारों भारत और चीन को निरंतर आपूर्ति मुहैया करवाने के लिए अधिक प्रतिस्पर्धी मूल्यों का विकल्प मुहैया करवाया था। इसका कारण यह भी है कि यूरोप को आपूर्ति बंद होने के कारण रूस निर्यात की जाने वाली कच्चे तेल की मात्रा को बरकरार रखना चाहता है। लिहाजा यह रुझान कायम रहा।

कच्चे तेल की बॉस्केट को बढ़ाने की जरूरत

अधिकारियों के मुताबिक कच्चे तेल की नियमित आपूर्ति के लिए पश्चिम एशिया के बाहर से भी तेल खरीदा जाए। अन्य अधिकारी के मुताबिक भारत को इराक को तेल के मुख्य आपूर्तिकर्ता इराक के अलावा भी तेल की आपूर्ति की वैकल्पिक व्यवस्था करने की जरूरत है।

Advertisement
First Published - August 20, 2023 | 11:15 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement