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रियो टिंटो-चीनी विवाद से फायदा निर्यातकों के हाथ

Last Updated- December 07, 2022 | 1:41 AM IST

चीन के स्टील निर्माताओं और वैश्विक संसाधन कंपनी रियो टिंटों के बीच मूल्य और आपूर्ति संबंधी प्रतिबध्दता के मसले पर मतैक्यता नहीं होने से भारतीय लौह अयस्क निर्यातकों को फायदा होने की उम्मीद है।


चीन के साथ रियो टिंटो के अमतैक्यता के बाद भी रियो टिंटो द्वारा लदाई में कमी नहीं किए जाने के बावजूद लौह अयस्क का हाजिर मूल्य बढ़कर 220 डॉलर प्रति टन हो गया। फोर्टेसक्यू मेटल्स ग्रुप लिमिटेड के कार्यकारी निदेशक रसेल स्क्रिमशॅ ने कहा, ‘भारतीय निर्यातक लगभग 1,000 लाख टन लौह अयस्क चीन को भेज रहे हैं और इनमें से अधिकांश हाजिर बाजार में आएंगे। उन्हें इस घटनाक्रम से फायदा होगा।’

रियो टिंटों के अधिकारियों ने भी यही बात कही। हालांकि उन लोगों ने इस बात पर बल दिया की चीन के स्टील निर्माताओं के साथ मतैक्यता नहीं होते हुए भी कंपनी ने लदाई में कोई कमी नहीं की है। कंपनी के मीडिया एवं कम्युनिकेशन प्रबंधक गरवासी ग्रीन ने कहा, ‘हमें अपनी आपूर्ति संबंधी प्रतिबध्दता को बनाए रखना है और इसलिए लदाई की रफ्तार को हमने बरकरार रखा है।’

उन्होंने कहा, ‘हमें इस बात से कोई सरोकार नहीं है कि चीन के समुद्री तट पर पहुंचने के बाद इनका क्या किया जाता है।’ लौह अयस्क से भरे औसतन लगभग तीन केप साइज के जहाज प्रति दिन ऑस्ट्रेलिया में रियो के बंदरगाह से चीन के लिए रवाना किए जाते हैं।

चाइना आयरन ऐंड स्टील असोसिएशन (सिसा) ने अपने सदस्यों से कहा था कि वे हाजिर बाजार में रियो टिंटो के लौह अयस्क खरीदने का बहिष्कार करें। सिसा का आरोप है कि चीन के हाजिर बाजार में लौह अयस्क की ऊंची कीमत से ज्यादा मुनाफा कमाने के लिए रियो अपनी दीर्घावधि की आपूर्ति की प्रतिबध्दता को पूरी नहीं करते हुए हाजिर बाजार में आपूर्ति बढ़ा रही है।

हालांकि, रियो टिंटों के अधिकारियों ने इन आरोपों को यह कहते हुए ठुकरा दिया कि चीन के स्टील निर्माताओं के साथ लंबी अवधि की आपूर्ति संबंधी समझौते की प्रतिबध्दता को उन्होंने कायम रखा है और हाजिर बाजार में उनकी बिक्री समझौते की सीमा के मुताबिक है। दिलचस्प बात यह है कि अमतैक्यता चीन के स्टील निर्माताओं और वैश्विक संसाधन कंपनियों के बीच दीर्घावधि के अनुबंधों के लिए लौह अयस्क के मूल्य तय करने के निर्धारित वाषक समय में हो रहा है।

वर्ष 2008-09 (अप्रैल से मार्च) के लिए अभी तक चीन की कंपनियों और ऑस्ट्रेलियाई आपूर्तिकर्ताओं जैसे रियो टिंटो और बीएचपी बिल्लिटन के बीच लौह अयस्क के लिए कोई समझौता नहीं हो पाया है, यद्यपि चीन के स्टील मिलों ने ब्राजील के वेल डो रियो डोश के साथ पिछले वर्ष के मुकाबले  65-71 प्रतिशत अधिक कीमत पर समझौता कर लिया है।

लौह अयस्क की कीमत गुणवत्ता आधारित होगी। प्रमुख ऑस्ट्रेलियाई संसाधन कंपनियों से कहा गया कि वे 71 प्रतिशत से अधिक कीमत बढ़ाने की बात कर रहे हैं। उनके बारे में कहा गया कि माल भाड़ा शुल्क के रुप में भी उन्हें लाभ होता है।

संवाददाता की पर्थ यात्रा ऑस्ट्रेलियाई सरकार द्वारा प्रायोजित थी।

First Published - May 24, 2008 | 12:24 AM IST

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