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हड़ताल की दोहरी मार से मुश्किल

Last Updated- December 09, 2022 | 9:04 PM IST

सरकारी तेल और गैस कंपनी ओएनजीसी के अधिकारियों की हड़ताल के चलते मुंबई के अपतटीय इलाकों में तेल का उत्पादन 50 फीसदी तक गिर गया है। गौरतलब है कि कंपनी के अधिकारी बुधवार से हड़ताल पर हैं।


एक अधिकारी के मुताबिक, बांबे हाई और नीलम, हीरा और दक्षिण बसई के इलाके में इस समय 1.70 लाख बैरल कच्चे तेल का उत्पादन हो रहा है, वहीं अन्य दिनों यहां करीब 3.50 लाख बैरल कच्चे तेल का उत्पादन होता है।

इन इलाकों में तो प्राकृतिक गैस का उत्पादन लगभग ठप पड़ गया है, जिससे उद्योग-धंधे और शहर के गैस परिचालनों की आपूर्ति प्रभावित हुई है।

बांबे हाई और आसपास के क्षेत्रों में सामान्यत: 1.28 करोड़ स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर गैस का रोजाना उत्पादन होता है, लेकिन अभी इसका उत्पादन नाममात्र का रह गया है।

सूत्र के मुताबिक, सामान्य दिनों में कंपनी 10.5 एमएमएससीएमडी (मिलियन मीट्रिक स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर पर डे) गैस की बिक्री करती है, पर अभी वह मुंबई की महानगर गैस लिमिटेड (एमजीएल) को बहुत थोड़ी गैस ही आपूर्ति कर सकती है।

दक्षिणी बसई में सामान्यत: 29 एमएमएससीएमडी गैस का उत्पादन होता है पर बुधवार से यह बंद है। बता दें कि एचपीसीएल छोड़ अन्य सभी सार्वजनिक तेल कंपनियों के अधिकारी वेतन वृद्धि की मांग को लेकर 7 जनवरी से हड़ताल पर हैं।

इस्पात इंडस्ट्रीज ने स्पंज इकाई बंद की इस्पात इंडस्ट्रीज और एस्सार स्टील की स्पॉन्ज आयरन इकाइयों का परिचालन हड़ताल से प्रभावित हुआ है। इस्पात इंडस्ट्रीज ने अपने स्पॉन्ज आयरन संयंत्र को बंद कर दिया है, जबकि एस्सार स्टील भी गैस की सीमित आपूर्ति से परेशान है।

इस्पात इंडस्ट्रीज के कार्यकारी निदेशक (वित्त) अनिल सुरेखा ने बताया कि हम हड़ताल से प्रभावित हुए है, क्योंकि बुधवार शाम से गैस की आपूर्ति बंद है। इसकी वजह से हमें अपने स्पॉन्ज आयरन संयंत्र को बंद करना पड़ा है।

इस्पात इंडस्ट्रीज 3 हजार टन स्पॉन्ज आयरन का उत्पादन करता है, जिसका इस्पात बनाने में उपयोग होता है। स्पॉन्ज आयरन संयंत्र बंद होने से कंपनी का इस्पात उत्पादन प्रभावित होने की आशंका है।

मथुरा की इकाइयो के बंद होने की नौबत ट्रांसपोर्ट और पेट्रोलियम कंपनियों के अधिकारियों की हड़ताल के चलते मथुरा की सारी तेलशोधक इकाइयां बंद होने के कगार पर हैं।

ऑयल सेक्टर ऑफिसर्स एसोसिएशन के अधिकारियों का कहना है कि अगर हड़ताल समाप्त भी हो जाए, तो आपूर्ति सामान्य होने में समय लगेगा।

तेलशोधक इकाइयों में सरकार की ओर से तात्कालिक व्यवस्था के तहत तैनात किए गए इंजीनियर कहीं दिख ही नहीं रहे। शहर के पेट्रोल पंपों के बाहर पूरे दिन वाहनों की लंबी कतारें लगी रहीं। एचपीसीएल के पेट्रोल पंप भी आपूर्ति करने में सक्षम नहीं हो पा रहे हैं।

वैसे भी, आईओसी और बीपीसीएल के मुकाबले उनके पेट्रोल पंपों की संख्या अत्यंत कम है। हड़ताल का असर राजकीय परिवहन सेवाओं पर भी पड़ने की उम्मीद है।

उप्र परिवहन निगम के पास केवल एक-दो दिन का र्इंधन होने की बात कही जा रही है। ऑटो चालकों ने किराया बढ़ा दिया है। बाजार भी हड़ताल के असर से अछूता नहीं है।

First Published - January 9, 2009 | 9:42 PM IST

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