facebookmetapixel
Advertisement
Sugar Price: मॉनसून की मार से चीनी महंगी, जानें क्यों बढ़ रही हैं कीमतें और आगे क्या होगा?कच्चे तेल की कीमतें घटीं, फिर भी पेट्रोल-डीजल महंगा क्यों? हरदीप पुरी ने बताई वजहInvesco Mutual Fund ने SIF सेगमेंट में रखा कदम, लॉन्च किया समिट इक्विटी लॉन्ग-शॉर्ट फंड; क्या है इसमें खास?India-EU FTA: 10-12 दिन में पूरी होगी कानूनी समीक्षा, गोयल बोले- साल के अंत तक होगी डील30 चुनिंदा मिडकैप शेयरों में निवेश का मौका, 17 जुलाई तक खुला रहेगा MOMF का नया इंडेक्स फंडMirae Asset MF ने उतारे 2 नए मिडकैप फंड, ₹5,000 से निवेश शुरू; प्राइस मोमेंटम वाले शेयरों पर फोकसविदेशी फंड्स में लौटी निवेशकों की दिलचस्पी, 40% रिटर्न और ₹7,600 करोड़ के इनफ्लो ने बदला ट्रेंडSBI Mutual Fund का IPO अगले हफ्ते आ सकता है, ₹11,400 करोड़ जुटाने की तैयारी: रिपोर्टModi-Takaichi बैठक में बड़ा फैसला! AI, ग्रीन एनर्जी और डिफेंस में भारत-जापान मिलकर करेंगे कामRed Bull से Monster तक कई एनर्जी ड्रिंक कंपनियों पर FSSAI का शिकंजा, भ्रामक दावों पर भेजा नोटिस

अगस्त 2025 तक फसल बीमा प्रीमियम में 30% से ज्यादा की गिरावट, आक्रामक मूल्य नीति जिम्मेदार

Advertisement

फसल बीमा की अग्रणी कंपनी एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी ऑफ इंडिया का प्रीमियम भी इस दौरान 4 प्रतिशत गिरकर 2,539.29 करोड़ रुपये रह गया है

Last Updated- October 02, 2025 | 11:48 PM IST
Crop Insurance

उद्योग जगत के सूत्रों के मुताबिक अगस्त 2025 तक फसल बीमा प्रीमियम में 30 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई है। इसकी वजह कुछ ढांचागत बदलाव और बीमाकर्ताओं द्वारा आक्रामक मूल्य नीति है।

जनरल इंश्योरेंस काउंसिल (जीआईसी) के आंकड़ों से पता चलता है कि वित्त वर्ष 2025 में अप्रैल से अगस्त के दौरान फसल बीमा प्रीमियम संग्रह पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 34.29 प्रतिशत घटकर 6,781 करोड़ रुपये रह गया है। फसल बीमा की अग्रणी कंपनी एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी ऑफ इंडिया का प्रीमियम भी इस दौरान 4 प्रतिशत गिरकर 2,539.29 करोड़ रुपये रह गया है।

अधिकारी ने कहा, ‘मौजूदा ढांचे वाले फसल बीमा मॉडल की वजह से आक्रामक रूप से मूल्य निर्धारण हो रहा है। हालांकि बीमाकर्ता इसकी खामियों को पहचानते हैं, लेकिन प्रतिस्पर्धियों के दबाव और प्रबंधन व्यय (ईओएम) के कारण नुकसान पहुंचाने वाले कारोबार की भागीदारी बढ़ रही है।

कम प्रीमियम पर मौजूदा 80:110 ढांचा व्यावहारिक नहीं है। हालांकि इस व्यवसाय में भाग नहीं लेने वाले कई बीमाकर्ताओं ने भी अपने ईओएम के प्रबंधन के लिए आक्रामक रूप से भाग लेना शुरू कर दिया है।’ व्यक्ति ने कहा, ‘इसके साथ ही फसल बीमा सामान्यतया 3 साल की होती है, लेकिन कुछ राज्यों ने 2 साल के अंत में टेंडरिंग शुरू कर दी है।

इसके साथ ही आक्रामक मूल्य नीति की वजह से इस बार प्रीमियम में तेज गिरावट आई है। महाराष्ट्र की फसल बीमा योजना का प्रीमियम 9,000 करोड़ रुपये से गिरकर इस बार करीब 3,000 करोड़ रुपये रह गया है। इस बात की संभावना है कि अन्य राज्य बी यही तरीका अपनाएं, जिससे प्रीमियम में तेज गिरावट आ सकती है।’

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के मुताबिक इस योजना के तहत भारत में किसान के लिए प्रति हेक्टेयर बीमित राशि का निर्धारण जिला स्तर की तकनीकी समिति और राज्य स्तर की समिति द्वारा पहले की गई घोषणा के मुताबिक होता है। उसके बाद किसान के लिए कुल बीमित राशि की गणना विभिन्न इलाकों की अधिसूचित फसल के मुताबिक होती है।

Advertisement
First Published - October 2, 2025 | 11:44 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement