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समीक्षा के लेखक एवं वित्त मंत्रालय में मुख्य आर्थिक सलाहकार वी अनंत नागेश्वरन ने इसकी संरचना पर विस्तार से बात की और इसका भी जिक्र किया है कि यह यह कैसे बदल गई है

Last Updated- January 29, 2026 | 11:18 PM IST
v anantha nageswaran
वित्त मंत्रालय में मुख्य आर्थिक सलाहकार वी अनंत नागेश्वरन

आर्थिक समीक्षा का स्वरूप और उसका ढांचा हमेशा केंद्रीय बजट से पहले चर्चा का विषय होता है। समीक्षा के लेखक एवं वित्त मंत्रालय में मुख्य आर्थिक सलाहकार वी अनंत नागेश्वरन ने इसकी संरचना पर विस्तार से बात की और इसका भी जिक्र किया है कि यह यह कैसे बदल गई है। इस बार की आर्थिक  समीक्षा अधिक लंबी (लगभग 700 पृष्ठों की) है।

नागेश्वरन के शब्दों में, ‘आर्थिक समीक्षा के इस संस्करण में गहराई और व्यापकता को अधिक जगह दी गई है।’ समीक्षा में कुल 17 अध्याय (चैप्टर) हैं जिनमें सीईए का ध्यान राष्ट्रीय प्राथमिकताओं की समय से जुड़ी प्रासंगिकता पर है। इसमें तीन मुद्दों का खास तौर पर जिक्र किया गया है जिनमें आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (एआई) का विकास, शहरों में जीवन की चुनौती एवं सरकार की क्षमता तथा निजी क्षेत्र की भूमिका शामिल हैं। ये सभी विषय हमारे जीवन और आजीविका पर सीधा असर डालते हैं।

एआई और भू-राजनीति का जिक्र

भारत अगले महीने एआई पर एक बड़े वैश्विक सम्मेलन की मेजबानी करने जा रहा है। जाहिर है, समीक्षा में इसका जिक्र करना लाजिमी हो गया था। इसका जिक्र हुआ है और वह भी बड़े पैमाने पर। एक पूरा अध्याय इस विषय के नाम है बल्कि अधिकांश अन्य अध्यायों में भी इस सबसे बड़ी तकनीकी क्रांति का जिक्र किया गया है जिनका अनुभव दुनिया कर रही है और एक तरह से यह एआई से चलने लगी है।

हालांकि, यह बात उत्सुकता बढ़ा सकती है कि आर्थिक समीक्षा तैयार करने में एआई का इस्तेमाल किस तरह हुआ है मगर इस भारी-भरकम दस्तावेज में इस शब्द यानी एआई का लगभग 400 बार जिक्र है। हालांकि, वृद्धि का जिक्र सबसे अधिक यानी 900 बार हुआ है। समीक्षा में उन दोनों शब्दों के अलावा रोजगार, नौकरियों और मुद्रास्फीति का जिक्र शामिल हैं। क्या इनकी गूंज इस रविवार को केंद्रीय बजट में भी सुनाई देगी और क्या आर्थिक सुधारों पर भी उम्मीद के अनुरूप ही जोर भी होगा? 

कविता और विकसित भारत

आर्थिक समीक्षा और केंद्रीय बजट में भारी भरकम आंकड़ों के बीच कविता और छंदों का भी जिक्र होता आया है जो अक्सर माहौल हल्का कर देते हैं। नागेश्वरन की निगरानी में तैयार समीक्षा में एक अर्थशास्त्री के साहित्यिक पक्ष की झलक भी मिलती है। उन्होंने अपनी प्रस्तावना का समापन कठोपनिषद में यम के संदेश के संदर्भ के साथ किया जिसे उन्होंने ‘टाइमलेस’ कहा। उन्होंने कहा,‘हर पल हमें श्रेय (श्रेष्ठ) और प्रेय (सुखद) के बीच चयन करने के लिए कहता है। परिपक्व दिमाग श्रेय चुनता है जबकि अपरिपक्व दिमाग प्रेय पर ठहर जाता है।’

इसका आशय यह है कि देश को तब फायदा होता है जब हम दीर्घकाल में संतुष्टि की तरफ बढ़ते हैं। समीक्षा में आगे अन्य अध्यायों में और कविताओं का भी उल्लेख किया गया है। ऐसा ही एक दार्शनिक संदर्भ टी एस इलियट की रचनाओं ‘द वेस्ट लैंड’ और ‘फोर क्वार्टेट्स’ का दिया गया है जो गहन परिवर्तन और बदलाव की अवधारणा का पता लगाते हैं। समीक्षा एआई के प्रभाव पर विचार करने के लिए इलियट के शब्दों के निहितार्थ को व्यक्त करता है यानी ‘परिवर्तन एक झटके में नहीं बल्कि एक शांत, स्थिर बदलाव के जरिये आता है।’

सीईए ने आत्मनिर्भरता और समीक्षा के अंत में विकसित भारत के लक्ष्य के लिए एक बार फिर दार्शनिक संदर्भ का उल्लेख करते हैं। वह व्लादीमिर इलीइच लेनिन का हवाला देते हुए कहते हैं,‘ऐसे दशकों बीत जाते हैं जब कुछ नहीं होता है और कुछ सप्ताहों में ही दशकों की घटनाएं हो जाती हैं।’ नागेश्वरन कहते हैं कि हम एक ऐसे दौर में हैं जहां दशकों की घटनाएं हफ्तों में होती दिखती हैं । वह कहते हैं कि ‘दिलचस्प बात यह है कि रूस वर्तमान एपिसोड में एक अहम भूमिका निभा रहा है।’

मैराथन और तेज दौड़

रूसी कविता से लेकर भारतीय परिदृश्य तक समीक्षा में आयात प्रतिस्थापन और रणनीतिक मजबूती के संदर्भ में बाहरी भू-राजनीतिक दबाव का आकलन किया गया है। समीक्षा में कहा गया है कि भारत को आयात प्रतिस्थापन, रणनीतिक मजबूती और रणनीतिक रूप से अपरिहार्य होने की अपनी निकट, मध्यम और दीर्घ अवधि की नीतिगत प्राथमिकताओं को एक साथ आगे बढ़ाना चाहिए। यहां ‘मैराथन’ (लंबी दौड़) और ‘स्प्रिंट’ (फर्राटा  दौड़) का जिक्र जरूरी हो जाता है। ‘भारत के पास समय बर्बाद करने का समय नहीं है। यह एक ही समय में मैराथन और स्प्रिंट साधने है या लंबी दौड़ को तेज दौड़ की तरह कुछ ही समय में पूरी करने जैसा है।’

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First Published - January 29, 2026 | 10:57 PM IST

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