भारत के सामने आया 1991 जैसा अवसर
अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने आखिरकार अपनी धमकी के मुताबिक विश्व व्यापार में उथल पुथल मचा ही दी। उन्होंने शुल्क या टैरिफ में 10 फीसदी की एकसमान बढ़ोतरी के साथ सभी देशों पर अलग-अलग टैरिफ लगाया है। जवाब में कई देश अमेरिकी माल पर शुल्क लगा रहे हैं, जिससे दुनिया में संरक्षणवाद तथा आर्थिक धीमापन […]
वैश्विक कर चोरी से किस तरह हो जंग?
बहुराष्ट्रीय कंपनियां और उच्च आय वाले व्यक्ति (एचएनआई) कम कर वाले क्षेत्रों और टैक्स हैवन (कर बचाने वाले इलाकों) में जाकर या तो कर चोरी करते हैं या काफी कर बचा लेते हैं, जिस पर दुनिया भर में चिंता बनी हुई है। विकासशील देशों में यह चिंता ज्यादा नजर आती है क्योंकि उन्हें बुनियादी ढांचा […]
राज्यों की राजकोषीय स्थिति मापने की गुत्थी
भारत में राजकोषीय स्थिति का आकलन किया जाता है तो मोटे तौर पर कर नीति और राजकोषीय घाटे एवं केंद्र सरकार पर चढ़े कर्ज को देखा जाता है। यह बात बिल्कुल दुरुस्त है कि व्यापक आर्थिक स्थिरता एवं आर्थिक वृद्धि के लिए राजकोषीय घाटे और ऋण पर नजर रखना जरूरी है। कर नीति का विश्लेषण […]
Budget 2025: अच्छी घोषणाओं की झड़ी, लेकिन क्रियान्वयन पर बड़े सवाल
वित्त मंत्री अपने बजट भाषण में आम तौर पर कई अच्छी एवं नेक घोषणाएं करते रहे हैं। परंतु, जब इन घोषणाओं की समीक्षा होती है तो कई सवाल मुंह बाए सामने खड़े हो जाते हैं। वित्त वर्ष 2025-26 के लिए पेश बजट में भी वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कई अच्छी एवं उत्साह जगाने वाली […]
पूर्व तिथि से लागू बदलाव निवेश के लिए खतरा
देश में प्रति व्यक्ति आय को बढ़ाकर 2047 तक विकसित राष्ट्र का दर्जा हासिल करने की हसरत पूरी करनी है तो अर्थव्यवस्था को अगले 23 साल तक 8 फीसदी से ज्यादा सालाना दर से बढ़ना होगा। मौजूदा वृद्धिशील पूंजी-उत्पादन अनुपात के हिसाब से अर्थव्यवस्था को निवेश की दर बढ़ाकर सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 40 […]
वृद्धि और महंगाई में नाजुक संतुलन
पिछले तीन साल के दौरान सकल घरेलू उत्पाद जीडीपी में 8 प्रतिशत सालाना से ऊपर की वृद्धि हासिल करने के बाद अर्थव्यवस्था चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में केवल 5.4 प्रतिशत वृद्धि दर्ज कर पाई। पिछली सात तिमाहियों में यह वृद्धि का सबसे कम आंकड़ा रहा। इस तिमाही में आर्थिक सुस्ती का अंदाजा तो […]
सहकारी संघवाद या प्रतिस्पर्धी संघवाद: भारतीय संघ की चुनौतियां और संभावनाएं
भारतीय संघ को लेकर गंभीर अध्ययन करने वाले विद्वान अक्सर उसे ‘सहकारी संघवाद’ वाला देश कहते हैं। इस बारे में गत 10 नवंबर को सेवानिवृत्त हुए देश के मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ ने 26 अक्टूबर को मुंबई में दिए एक भाषण में दिलचस्प बातें कही थीं। उनके आधार पर हमें यह देखना चाहिए कि […]
जीएसटी सुधारों के लिए क्या हो नीति, दिशा और गति
यह दलील सही नहीं है कि जीएसटी कर व्यवस्था पूरी तरह व्यवस्थित हो चुकी है और इसमें किसी प्रकार के सुधार की आवश्यकता नहीं है। विस्तार से बता रहे हैं एम गोविंद राव मैं ने अपने पिछले आलेख में कहा था कि वस्तु एवं सेवा कर (GST) व्यवस्था में नए सुधारों की आवश्यकता है ताकि […]
जीएसटी सुधार पर दूरदर्शी सोच की दरकार
वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) परिषद की बैठक में अब कुछ खास नहीं रह गया है। आम तौर पर इनमें जीएसटी दरों में कुछ फेरबदल किया जाता है और फौरी जरूरतों के हिसाब से छोटे-मोटे प्रशासनिक बदलाव किए जाते हैं। मगर कर संरचना में व्यापक सुधार कर इसे श्रेष्ठ बनाने की दिशा में कोई प्रयास […]
नीतिगत उपाय पूरा करेंगे विकसित भारत का सपना
केंद्रीय बजट प्रस्तुत होने के बाद मचा शोरगुल थम चुका है और अब सधी नजर से देखना होगा कि भारत को विकसित देश बनाने के लिए मध्यम और दीर्घ अवधि में क्या रणनीति अपनानी होंगी और नीतिगत स्तर पर क्या प्रयास करने होंगे। विश्व बैंक की परिभाषा के अनुसार वित्त वर्ष 2025 में किसी विकसित […]









