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लेखक : एम गोविंद राव

आज का अखबार, लेख

स्थिरता के दिखावे के बीच भारत की अर्थव्यवस्था के सामने बढ़ते बाहरी जोखिम

अमेरिका ने ईरान में जो दुस्साहस किया है उसके विनाशकारी परिणाम अभी भारतीय अर्थव्यवस्था पर पूरी तरह नजर नहीं आ रहे हैं। बढ़ती ऊर्जा कीमतों और आपूर्ति में रुकावटों के आर्थिक वृद्धि, मुद्रास्फीति, रोजगार, विनिमय दर में गिरावट और भुगतान संतुलन पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभाव अभी उभरने शुरू ही हुए हैं। इसका पूरा प्रभाव […]

आज का अखबार, लेख

राज्यों के व्यय पर सवाल केंद्र की ढिलाई पर चुप्पी

राजस्व और व्यय शक्तियों के आवंटन में संघ और राज्यों के बीच असमान वितरण को देखते हुए, संविधान निर्माताओं ने हर पांच वर्ष में वित्त आयोगों की नियुक्ति का प्रावधान किया ताकि कर वितरण और राज्यों को अनुदान के माध्यम से वित्तीय हस्तांतरण निर्धारित किया जा सके। ये हस्तांतरण संघ और राज्यों को सौंपे गए […]

आज का अखबार, लेख

असमान राज्यों की चुनौती और सोलहवां वित्त आयोग

हमारे संविधान निर्माताओं ने यह व्यवस्था की थी कि राष्ट्रपति हर पांच वर्ष में एक वित्त आयोग की नियुक्ति करेंगे जो केंद्र और राज्यों के बीच वित्तीय संसाधनों का उचित वितरण सुनिश्चित करेगा ताकि वे सातवीं अनुसूची के अंतर्गत मिले कार्यों को पूरा कर सकें। वे हर राज्य को मिलने वाली हिस्सेदारी खुद संविधान में […]

आज का अखबार, ताजा खबरें, लेख

फ्री सुविधाओं पर राज्यों का जोर और शिक्षा की अनदेखी से हो सकता है दीर्घकालीन नुकसान

भारत के राजकोषीय संघवाद में सामाजिक सेवाएं प्रदान करना राज्यों का मुख्य उत्तरदायित्व है। आर्थिक सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए वे केंद्र सरकार के साथ मिलकर काम करते हैं। मगर बात जब राज्यों के राजकोषीय प्रदर्शन के मूल्यांकन की होती है तो ध्यान हमेशा उनके घाटे और कर्ज पर रहता है और उनके सार्वजनिक व्यय […]

आज का अखबार, लेख

बजट 2026 में राजकोषीय अनुशासन और विकास के बीच संतुलन जरूरी

वर्ष 2026-27 की बजट प्रक्रिया अक्टूबर में आरंभ हुई जब इससे संबंधित सर्कुलर जारी हुआ और बजट पूर्व बैठकें आरंभ हुईं। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा थोपे गए शुल्कों के कारण बढ़ी अनिश्चितता और अस्थिरता तथा इसकी वजह से वैश्विक अर्थव्यवस्था में सुस्ती, साथ ही ट्रंप द्वारा आठ युद्धों को रोकने के दावे के बावजूद अंतरराष्ट्रीय […]

आज का अखबार, ताजा खबरें, लेख

केवल लचीलापन ही नहीं, अर्थव्यवस्था के स्थिर बढ़ोतरी के लिए कड़े सुधारों की जरूरत

दिल्ली में आयोजित कौटिल्य इकनॉमिक कॉन्क्लेव में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वैश्विक उथल-पुथल के बीच भारत की अर्थव्यवस्था द्वारा हासिल जबरदस्त लचीलेपन का उल्लेख किया। यह लचीलापन घरेलू उपभोग पर आधारित आर्थिक वृद्धि को मजबूती से स्थापित करके हासिल किया गया है। उनकी इस बात को भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर ने भी […]

आज का अखबार, लेख

जीएसटी दरों को सरल बनाना अच्छा कदम, लेकिन असली प्रतिस्पर्धा के लिए और सुधार जरूरी

वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) परिषद की इस बात को लेकर सराहना होनी चाहिए कि इसने जीएसटी दरों की संख्या को कम करके और बदलाव लाकर ‘यथास्थिति बनाए रखने की जड़ता’ खत्म की है। प्रधानमंत्री के स्वतंत्रता दिवस के भाषण के बाद से ही लोगों को कर की दरें कम होने, एक सरल संरचना और […]

आज का अखबार, लेख

ट्रंप के साथ टैरिफ जंग में क्या भारत को अपनी ट्रेड पॉलिसी बदलनी चाहिए?

हमें अब तक के इतिहास में कभी ऐसे हालात का सामना नहीं करना पड़ा जहां शुल्कों का इस्तेमाल हथियार के रूप में इस तरह से किया गया हो कि दूसरे देशों को अधीनता स्वीकार करने पर विवश किया जा सके या उनकी राष्ट्रीय संप्रभुता को खतरे में डाला जा सके। परंतु अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप […]

आज का अखबार, लेख

कर्नाटक में क्षेत्रीय विषमता व्यापक मानव विकास को कर रही बाधित

कर्नाटक के हालात में पिछली चौथाई सदी में बहुत बदलाव आया है। 1990-91 में जहां उसकी प्रति व्यक्ति आय राष्ट्रीय औसत से 19 फीसदी कम थी वहीं अब वह जबरदस्त प्रगति करता हुआ देश के जीवंत प्रौद्योगिकी और नवाचार के केंद्र के रूप में उभरा है। यही नहीं वह आधुनिक सेवा उद्योग का केंद्र भी […]

आज का अखबार, लेख

M Govinda Rao: वृद्धि की मृगतृष्णा से बचाव, सुधार केवल पूंजी निवेश तक न रहे सीमित

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) द्वारा अप्रैल में जारी किए गए विश्व आर्थिक परिदृश्य ने भारत के विकास से ताल्लुक रखने वाले लोगों में बहुत अधिक खुशी और उत्साह का संचार किया है। नीति आयोग के मुख्य कार्याधिकारी ने जब यह घोषणा की कि जापान को पछाड़कर भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया […]

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