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लेबर कोड के खिलाफ हुई मजदूरों की हड़ताल

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भारत और अमेरिका के बीच हो रहे व्यापार समझौते का विरोध करने के लिए हजारों किसान पंजाब और नई दिल्ली के आसपास एकत्र हुए।

Last Updated- February 12, 2026 | 10:37 PM IST
New Labour Codes

श्रम संहिताओं के खिलाफ 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों (सीटीयू) के एक संयुक्त मंच ने गुरुवार को राष्ट्रव्यापी हड़ताल की। इससे कोयला, बैंकिंग, परिवहन और कृषि जैसे क्षेत्रों में कुछ व्यवधान देखा गया।
सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियंस (सीटू) के अध्यक्ष सुदीप दत्ता ने कहा, ‘इस बार कोयला खदान श्रमिकों, बिजली मिस्त्रियों और तूतीकोरिन, कोचीन, पारादीप, हल्दिया और कोलकाता बंदरगाहों पर श्रमिकों की बहुत सक्रियता थी। कर्नाटक, तमिलनाडु, केरल और महाराष्ट्र में बहुराष्ट्रीय निगमों में भी एक विशाल हड़ताल हुई।’

दत्ता ने कहा कि एसबीआई, एलआईसी, पावर ग्रिड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया, एनटीपीसी और बीएचईएल सहित कई सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों के कर्मचारियों ने हड़ताल में भाग लिया। यूनियनों ने 30 करो़ड़ से अधिक श्रमिकों की भागीदारी का अनुमान लगाया और हड़ताल को सफल माना।

गुरुवार को लोकसभा में श्रम मंत्री मनसुख मांडविया ने राष्ट्रव्यापी हड़ताल को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया और कहा कि 17 राष्ट्रीय श्रमिक संगठनों ने हड़तालों का विरोध किया है। इन यूनियनों ने नई श्रम संहिताओं को नियोक्ता समर्थक और श्रम अधिकारों पर हमला माना है।

इस बीच ट्रेड यूनियन को-ऑर्डिनेशन सेंटर (टीयूसीसी) और आरएसएस समर्थित भारतीय मजदूर संघ ने हड़ताल के आह्वान को खारिज कर दिया, इसे राजनीतिक रूप से प्रेरित और श्रमिकों के हितों के प्रतिकूल बताया।

किसान समूहों का प्रदर्शन

भारत और अमेरिका के बीच हो रहे व्यापार समझौते का विरोध करने के लिए हजारों किसान पंजाब और नई दिल्ली के आसपास एकत्र हुए। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि इस समझौते से घरेलू खेती को नुकसान हो सकता है। समझौते पर अमेरिका की भाषा नरम होने के बावजूद रैलियां जारी रहीं, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने आने वाली चुनौतियां दिखाती है।

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First Published - February 12, 2026 | 10:28 PM IST

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