ललित सूरी हॉस्पिटैलिटी ग्रुप की कार्यकारी निदेशक दीक्षा सूरी का कहना है कि होटलों में टैरिफ के लिए फ्लैट सीजनल रेट कार्ड के बजाय विमानन कंपनियों की तरह रियल-टाइम डायनेमिक प्राइसिंग मॉडल होना चाहिए। सूरी का तर्क है कि सम्मेलनों, शादियों और शहरों के कार्यक्रमों की मांग में बदलावों को ध्यान में रखते हुए डायनेमिक प्राइसिंग यानी समय और मांग के हिसाब से बदलाव जरूरी है। इससे मासिक राजस्व लक्ष्य हासिल किए जा सकेंगे।
बिजनेस स्टैंडर्ड के साथ ऑनलाइन बात करते हुए उन्होंने कहा, ‘कीमतें डायनेमिक होनी चाहिए। जिस तरह दिल्ली से मुंबई के हवाई किराये सप्ताह के दिनों, महीने या मांग के अनुसार बदलते रहते हैं, उसी तरह होटल के किराये भी वास्तविक समय की मांग और आपूर्ति से चलना चाहिए।’
नई दिल्ली का यह समूह भारत में दि ललित ब्रांड के तहत 12 लक्जरी होटलों, पैलेस और रिसॉर्ट का परिचालन करता है। वह द ललित ट्रैवलर ब्रांड के तहत देश में मध्य-खंड के होटल भी चलाता है। वह अब अपनी रिफाइनैंसिंग को पूरा करने, लिक्विडिटी को अनलॉक करने और अपने मौजूदा पोर्टफोलियो में पुनर्निवेश को प्राथमिकता दे रहा है।
जहां तक पुनर्वित्त की बात है तो समूह ऊंची लागत कर्ज की जगह कम लागत वाले ऋण ले रहा है। उम्मीद है कि ब्याज दरें अधिक अनुकूल होंगी, जिससे ऋण को चुकाना आसान हो जाएगा। सूरी ने कहा कि उद्योग स्तर पर हॉस्पिटैलिटी की पूंजी लागत अभी भी इन्फ्रास्ट्रक्चर से थोड़ी अधिक है।
उन्हें उम्मीद है कि होटलों को अंततः इन्फ्रास्ट्रक्चर का दर्जा दिया जा सकता है, जिससे मानव श्रम और अन्य परिचालन खर्चों में लगातार वृद्धि के बावजूद फंडिंग की लागत और कम हो जाएगी।
सूरी ने कहा कि एक बार समेकन चक्र पूरा हो जाने के बाद विस्तार के लिए तालमेल करने की उम्मीद है। यह विस्तार मझोले और छोटे बाजारों में प्रबंधन अनुबंधों के जरिए किया जाएगा, जहां ब्रांड ने पहले ही भागीदारों की पहचान कर ली है और उनसे बातचीत चल रही है। विकास रणनीति में मौजूदा होटलों में अपग्रेड और टेक्नॉलजी में सुधार के साथ-साथ ऐसे बाजारों में चुनिंदा नए होटल जोड़ना शामिल है, जहां मांग और स्थानीय संस्कृति समूह के ‘इंडियन-फर्स्ट’ रूख के साथ मेल खाती हो।