facebookmetapixel
Advertisement
बॉन्ड यील्ड में गिरावट से बैंकों को होगा फायदा, Q1 में ट्रेजरी मुनाफा बढ़ने की उम्मीदFiscal Deficit: अप्रैल-मई में सरकार का राजकोषीय घाटा 12 गुना बढ़ा, RBI डिविडेंड के बावजूद बढ़ा दबावRBI FSR: मार्च में बैंकों का एनपीए घटकर 0.4% पर, कृषि क्षेत्र में सबसे ज्यादा फंसे कर्ज का दबावअर्थव्यवस्था मजबूत, पर मॉनसून और पश्चिम एशिया संकट से अब भी जोखिमडिबेंचर धारकों के हितों की सुरक्षा के लिए विशेषज्ञ समिति गठित, नियमों की होगी समीक्षाSEBI AIF Rules: निवेशकों के अधिकार बढ़ाने की तैयारी, संबंधित पक्षों के सौदों पर 75% मंजूरी का प्रस्तावCrude Oil Outlook: दूसरी छमाही में कच्चा तेल औसतन 72 डॉलर रहने के आसार: बोफाकोविड के बाद सेंसेक्स की सबसे खराब पहली छमाही, मिड-स्मॉलकैप बने निवेशकों का सहारादुबई रियल एस्टेट में सुस्ती के बीच FY27 में डैन्यूब की नजर 4 अरब डॉलर की परियोजनाओं परARAI ने बदला फैसला, ऑटो पीएलआई स्कीम में अब पूरे साल लागू होगी एक ही विनिमय दर

नया साल 2026 लाया बड़े नीतिगत बदलाव, कर सुधार और नई आर्थिक व्यवस्थाएं

Advertisement

सरकार ने मार्च 2026 तक श्रमिकों से सामाजिक सुरक्षा कवरेज को मौजूदा 94 करोड़ से बढ़ाकर 100 करोड़ श्रमिकों तक विस्तारित करने का लक्ष्य रखा है।

Last Updated- January 01, 2026 | 10:29 AM IST
policymaking

नया साल 2026 तमाम नए सुधार, समय सीमा, नीति और कराधान व्यवस्था में बदलाव लेकर आ रहा है। इसमें जीडीपी की गणना के लिए आधार वर्ष में बदलाव, आईआईपी से लेकर कार्बन बॉर्डर एडजेस्टमेंट मैकेनिज्म (सीबीएएम) लागू होना है। साथ ही नई श्रम संहिता और कर सुधार पूरी तरह से लागू हो जाएंगे।

जीडीपी की नई श्रृंखला 27 फरवरी, 2026 को जारी होनी है, जिसमें आधार वर्ष 2011-12 से बदलकर 2022-23 हो जाएगा। वहीं 2012 आधार की जगह 2024 आधार वर्ष वाली सीपीआई की नई सीरीज लागू होगी, जो 12 फरवरी, 2026 को जारी होनी है। इसके अलावा 2022-23 आधार वर्ष वाली आईआईपी की नई सीरीज मौजूदा 2011-12 आधार वाली सीरीज की जगह लेगी। आधार वर्ष में बदलाव से ज्यादा सटीक आर्थिक आंकड़े मिलने की उम्मीद है, जो वैश्विक मानकों के करीब होंगे।

भारत में 2026 से महत्त्वपूर्ण कर सुधार लागू होंगे। एक अप्रैल, 2026 से आयकर अधिनियम, 2025 लागू होगा, जो 1961 के कानून की जगह लेने जा रहा है। प्रावधानों को सरल कर एक एकल ‘टैक्स ईयर’ (अप्रैल-मार्च) पेश किया गया है। साथ ही एकीकृत तालिकाओं के साथ टीडीएस/टीसीएस नियमों को युक्तिसंगत बनाया गया है। इसमें डिजिटल अनुपालन को बढ़ाया गया है और संशोधित स्लैब के साथ दोनों कर व्यवस्थाओं को बरकरार रखा गया है।

2025 के अंत में पेश और 22 सितंबर 2025 से लागू जीएसटी-02 सुधार के लिए 2026 पूर्ण कैलेंडर वर्ष होगा। इस व्यवस्था के तहत 12 प्रतिशत और 28 प्रतिशत कर ढांचे को समाप्त कर अधिकांश वस्तुओं और सेवाओं को 5 प्रतिशत या 18 प्रतिशत कर के दायरे में ला दिया गया है।

इसमें एफएमसीजी, घरेलू इस्तेमाल की वस्तुओं, आवश्यक वस्तुओं पर कर कम रखा गया है, जबकि सिगरेट और पानमसाला जैसी हानिकारक वस्तुओं पर उत्पाद शुल्क और उपकर लगाकर खपत कम करने की कवायद की गई है।
कार्बन लीकेज को रोकने के लिए यूरोपीय संघ (ईयू) का सीबीएएम जनवरी 2026 से लागू होगा। इसके तहत सीमेंट, लोहा और इस्पात, एल्युमीनियम, उर्वरक, बिजली और हाइड्रोजन के 50 टन से अधिक के आयात के लिए आयात के समय अथराइजेशन की जरूरत होगी। संक्रमणकालीन चरण 1 अक्टूबर, 2023 से शुरू हो गया था। हालांकि यह नियम सिर्फ भारत के लिए नहीं है, सभी देशों पर लागू होगा।

21 नवंबर को लागू 4 नई श्रम संहिताएं 1 अप्रैल, 2026 से पूरी तरह लागू की जानी है। केंद्रीय ट्रेड यूनियनों और क्षेत्रीय महासंघों और संघों के एक संयुक्त प्लेटफॉर्म ने नई श्रम संहिता के विरोध में 12 फरवरी, 2026 को आम हड़ताल का आह्वान किया है।

सरकार ने मार्च 2026 तक श्रमिकों से सामाजिक सुरक्षा कवरेज को मौजूदा 94 करोड़ से बढ़ाकर 100 करोड़ श्रमिकों तक विस्तारित करने का लक्ष्य रखा है।

कर्मचारी नामांकन योजना के तहत स्वैच्छिक नामांकन के लिए 30 अप्रैल, 2026 की समय सीमा होगी, जिसकी घोषणा अक्टूबर 2025 में की गई थी।

Advertisement
First Published - January 1, 2026 | 10:29 AM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement