टाटा ग्रुप के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने कर्मचारियों को लिखे अपने वर्षांत पत्र में कहा है कि जैसे-जैसे अनिश्चितता नई सामान्य बात बनती जा रही है, बल्कि हिम्मत के साथ जोखिम लेने से ही यह तय होगा कि कौन सफल होगा। उन्होंने समूह से कहा कि वह अपने लक्ष्य ऊंचे रखें और अस्थिरता के बीच भी लंबे समय के लिए निवेश करें।
चंद्रशेखरन ने कहा है, ‘जब अस्थिरता बनी रहती है तो सतर्कता लुभावनी लग सकती है। लेकिन ऐसे समय में आधे-अधूरे उपाय शायद ही कभी सफल होते हैं। वहीं, हिम्मत दिखाने के बड़े फायदे होते हैं।’उन्होंने 2026 के लिए प्राथमिकताएं बताईं और इसे एक और ऐसा वर्ष बताया जिसके अनिश्चितता और बदलावों से भरा होने की संभावना है।
आने वाले साल के लिए चंद्रशेखरन ने तीन प्राथमिकताएं बताईं- अनुशासित तरीके से काम करना, बेहतर टीम वर्क और सोच-समझकर जोखिम लेने की इच्छा। उन्होंने कहा कि काम करने से अस्थिर दुनिया में स्थिरता आती है, टीम वर्क हर बार टैलेंट को हरा देता है और खासकर शोध और स्कॉलरशिप के क्षेत्र में बड़े निवेश जरूरी हैं, भले ही रिटर्न मिलने में समय लगे।
चंद्रशेखरन ने कहा कि देश इस दशक में दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की राह पर है। इस बदलाव से उसे (और टाटा ग्रुप को) फायदा होगा और युवाओं और गतिशील अर्थव्यवस्थाओं के लिए मौके पैदा होंगे।