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विकसित देशों का भारी कर्ज भारत के लिए बन सकता है खतरा: अश्विनी वैष्णव

वैष्णव ने कहा कि भारत अगले पांच वर्षों में 6-8 प्रतिशत की दर से वृद्धि कर सकता है और कुछ वर्षों में तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है।

Last Updated- January 22, 2026 | 8:52 AM IST
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रेलवे, सूचना प्रौद्योगिकी एवं इलेक्ट्रॉनिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने विकसित अर्थव्यवस्थाओं के ‘भारी कर्ज’ और संभावित उथल-पुथल से भारत पर असर पड़ने को लेकर बुधवार को चिंता जताई। उन्होंने हाल ही में जापानी बॉन्ड यील्ड में आई तेजी का भी हवाला दिया।

दावोस में विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) में ‘क्या भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है’ शीर्षक वाले एक सत्र में हिस्सा लेते हुए वैष्णव ने कहा कि सरकार के लिए चिंता का विषय अमीर देशों में भारी वैश्विक कर्ज और इसका संभावित रूप से खुलना है। उन्होंने कहा कि जापान में बॉन्डों पर दबाव देखा गया और अगर यह बड़े पैमाने पर होता है तो हमारे देश पर क्या प्रभाव पड़ेगा, यह चिंता का विषय है।

जापान का 40-वर्षीय बॉन्ड यील्ड 4 प्रतिशत को पार कर वर्ष 2007 में अपनी शुरुआत के बाद से एक नई ऊंचाई पर पहुंच गया और तीन दशकों से अधिक समय में देश के सॉवरिन डेट की परिपक्वता का यह पहला मौका था। प्रधानमंत्री साने ताकाईची द्वारा नियोजित कर कटौती और चुनावों से पहले बड़े खर्च ने निवेशकों को डरा दिया। जापान जैसे सुरक्षित जारों में उच्च यील्ड, भारत जैसे उभरते बाजारों में सरकारी बॉन्डों और इक्विटी को कम आकर्षक बनाती है, जिससे विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) का पलायन होता है, खासतौर पर तब जब बाजार अस्थिर होते हैं।

वैष्णव ने कहा कि भारत अगले पांच वर्षों में 6-8 प्रतिशत की दर से वृद्धि कर सकता है और कुछ वर्षों में तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है। सरकार द्वारा किए गए परिवर्तनकारी बदलावों से इसे समर्थन मिलेगा, जो सार्वजनिक निवेश, समावेशी विकास, विनिर्माण और नवाचार और सरलीकरण जैसे चार स्तंभों पर आधारित हैं।

उन्होंने आगे कहा, ‘भारत ने जो तकनीकी आधार तैयार किया है, उन सबको मिलाकर यह विश्वास के साथ कहा जा सकता है कि अगले पांच सालों में भारत की वास्तविक वृद्धि दर 6-8 फीसदी रहेगी। महंगाई दर 2-4 फीसदी के बीच रहेगी। इस कारण से, नॉमिनल वृद्धि दर 10-13 फीसदी के बीच रहने की उम्मीद है। यह अनुमान 95 फीसदी आत्मविश्वास स्तर के साथ लगाया जा रहा है, जिसका मतलब है कि इस अनुमान के सही होने की संभावना बहुत अधिक है।’

हार्वर्ड यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर गीता गोपीनाथ ने कहा कि भारत के लिए तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनना वास्तविक चुनौती नहीं है, क्योंकि वह 2028 तक या उससे पहले भी यह स्थान हासिल कर सकता है। उन्होंने आगे कहा, ‘भारत के लिए चुनौती प्रति व्यक्ति आय को उच्च स्तर तक बढ़ाना और 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य तक पहुंचने के लिए सुधारों की स्थिर गति को बनाए रखना है।’

गोपीनाथ ने भारत में भूमि अधिग्रहण करने, बिना किसी विवाद के भूमि स्वामित्व रखने और न्यायिक सुधारों की कमी जैसी चुनौतियों पर प्रकाश डाला। गोपीनाथ ने कहा कि भारत पर अब तक लगाए गए शुल्कों के किसी भी प्रभाव से कहीं अधिक महत्वपूर्ण प्रदूषण का प्रभाव है।

विश्व बैंक के एक अध्ययन का हवाला देते हुए, गोपीनाथ ने कहा कि भारत में प्रदूषण के कारण हर साल लगभग 17 लाख लोगों की जान जाती है। उन्होंने कहा, ‘यह भारत में होने वाली मौतों का 18 प्रतिशत है। मुझे लगता है कि किसी भी अंतरराष्ट्रीय निवेशक के नजरिये से भी देखें जो भारत में आकर कारोबार स्थापित करने की सोच रहे हैं और अगर उन्हें वहां रहना है और पर्यावरण प्रदूषण का उनके स्वास्थ्य पर असर पड़ेगा तब निश्चित रूप से वे पीछे हटेंगे। इसलिए इस पर युद्धस्तर पर ध्यान देना महत्त्वपूर्ण है।’

First Published - January 22, 2026 | 8:52 AM IST

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