facebookmetapixel
2026 तक 52 डॉलर तक गिर सकता है कच्चा तेल? रुपये में भी लौटेगी मजबूती! जानें क्या कह रहे हैं एक्सपर्टSenior Citizen FD Rates: PSU, Private या SFB, कौन दे रहा है सीनियर सिटीजन को सबसे ज्यादा ब्याज?Q3 अपडेट के बाद 4% टूटा दिग्गज FMCG शेयर, लेकिन ब्रोकरेज को भरोसा; ₹625 के दिए टारगेटअमेरिका-वेनेजुएला तनाव के बीच सोना-चांदी में ताबड़तोड़ तेजी, एक्सपर्ट ने बताया- इन धातुओं में कितना निवेश करेंGold silver price today: चांदी फिर 2.50 लाख पार, सोना भी हुआ महंगा; चेक करें आज के रेटदूध के साथ फ्लेवर्ड दही फ्री! कहानी क्विक कॉमर्स की जो बना रहा नए ब्रांड्स को सुपरहिटWeather Update Today: उत्तर भारत में ठंड की लहर! IMD ने जारी किया कोहरा-बारिश का अलर्ट67% चढ़ सकता है सिर्फ ₹150 का शेयर, Motilal Oswal ने शुरू की कवरेज; BUY की दी सलाहअमेरिका का सख्त कदम, 13 देशों के लिए $15,000 तक का वीजा बॉन्ड जरूरीवेनेजुएला के तेल उद्योग पर अमेरिका की नजर: ट्रंप बोले- अमेरिकी कंपनियों को मिल सकती है सब्सिडी

निवेशकों की नब्ज टटोलने लंदन पहुंची सरकारी टीम

न्यूनतम सार्वजनिक शेयरधारिता नियम पूरे करने के लिए 10% हिस्सेदारी बिक्री की योजना

Last Updated- December 16, 2025 | 8:32 AM IST
GIC Re

केंद्र ने सरकारी स्वामित्व वाली भारतीय साधारण बीमा निगम (जीआईसी) में अल्पांश हिस्सेदारी बेचने के लिए लंदन में रोड शो आयोजित किया है। यह रोड शो निवेशकों की दिलचस्पी जानने के लिए किया गया। मामले के जानकार दो सूत्रों ने यह जानकारी दी।

समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने पिछले साल बताया था कि बाजार नियामक के न्यूनतम सार्वजनिक शेयरधारिता मानदंड को पूरा करने के लिए सरकार बीमा कंपनी में 10 फीसदी हिस्सेदारी किस्तों में बेचने की योजना बना रही है। इसमें से सरकार ने सितंबर 2024 में बीमा कंपनी में अपनी 3.4 फीसदी हिस्सेदारी बेची थी।

एक सूत्र ने बताया कि निवेश और सार्वजनिक परिसंपत्ति प्रबंधन विभाग (दीपम) के अधिकारी निवेशकों से मिलने और उनकी प्रतिक्रिया जानने के लिए लंदन गए थे। हालांकि, वित्त मंत्रालय ने रॉयटर्स के टिप्पणी के अनुरोध का कोई जवाब नहीं दिया है।

आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक जीआईसी में सरकार की फिलहाल 82.4 फीसदी हिस्सेदारी है जबकि बीमा कंपनी के शेयर पिछले वर्ष की सरकारी शेयर बिक्री में निर्धारित पेशकश मूल्य से लगभग 3.5 फीसदी नीचे कारोबार कर रहे थे। बाजार नियामक के नियमों के अनुसार सभी सूचीबद्ध भारतीय कंपनियों के लिए न्यूनतम 25 फीसदी सार्वजनिक हिस्सेदारी बनाए रखना अनिवार्य है।

सरकार निजीकरण और अल्पांश हिस्सेदारी बिक्री की अपनी योजनाओं के प्रति प्रतिबद्ध है। लेकिन पिछले दो वर्षों में इसकी गति धीमी हो गई है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार 2024-25 में और चालू वित्त वर्ष में अब तक विनिवेश से सरकार को 175 अरब रुपये मिले हैं।

First Published - December 16, 2025 | 8:32 AM IST

संबंधित पोस्ट