facebookmetapixel
Advertisement
तेल, रुपये और यील्ड का दबाव: पश्चिम एशिया संकट से बढ़ी अस्थिरता, लंबी अनिश्चितता के संकेतवैश्विक चुनातियों के बावजूद भारतीय ऑफिस मार्केट ने पकड़ी रफ्तार, पहली तिमाही में 15% इजाफाJio IPO: DRHP दाखिल करने की तैयारी तेज, OFS के जरिए 2.5% हिस्सेदारी बिकने की संभावनाडेटा सेंटर कारोबार में अदाणी का बड़ा दांव, Meta और Google से बातचीतभारत में माइक्रो ड्रामा बाजार का तेजी से विस्तार, 2030 तक 4.5 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमानआध्यात्मिक पर्यटन में भारत सबसे आगे, एशिया में भारतीय यात्रियों की रुचि सबसे अधिकबांग्लादेश: चुनौतियों के बीच आजादी का जश्न, अर्थव्यवस्था और महंगाई बनी बड़ी चुनौतीपश्चिम एशिया संकट के बीच भारत सतर्क, रणनीतिक तेल भंडार विस्तार प्रक्रिया तेजGST कटौती से बढ़ी मांग, ऑटो और ट्रैक्टर बिक्री में उछाल: सीतारमणसरकार का बड़ा फैसला: पीएनजी नेटवर्क वाले इलाकों में नहीं मिलेगा एलपीजी सिलिंडर

अगस्त में कंपनियों ने कॉर्पोरेट बॉन्ड जारी करना रोका, बॉन्ड यील्ड बढ़ने से निवेशकों ने कड़ा रुख अपनाया

Advertisement

अगस्त में कॉर्पोरेट बॉन्ड इश्यू पूरी तरह थम गया क्योंकि यील्ड बढ़ी, कंपनियों ने कर्ज टाल दिया और निवेशकों ने अनिश्चित हालात में सतर्क रुख अपनाया।

Last Updated- August 24, 2025 | 10:00 PM IST
Bonds
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

चालू वित्त वर्ष के पहले 4 महीनों में ऋण के माध्यम से रिकॉर्ड 4.07 लाख करोड़ रुपये जुटाने के बाद अगस्त में भारतीय कंपनियों की रफ्तार धीमी पड़ गई। बढ़े यील्ड के कारण अगस्त में अब तक कोई बड़ा कॉर्पोरेट बॉन्ड जारी नहीं हुआ है।

बाजार से जुड़े हिस्सेदारों ने कहा कि बॉन्ड बाजार इस समय देखो और इंतजार करो की स्थिति में है। इसकी वजह राज्य बॉन्डों व केंद्र सरकार के बॉन्डों की आपूर्ति के दबाव के बीच कई तरह की अनिश्तितताएं है। प्रमुख चिंताओं में जीएसटी दर में कटौती के कारण राजकोषीय घाटे के प्रबंधन के लिए अतिरिक्त उधारी की उम्मीद तथा अमेरिकी शुल्क और व्यापार तनाव जैसे वैश्विक जोखिम शामिल हैं। 

निजी और सरकारी दोनों तरह की बड़ी गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियां अगस्त में बाजार से दूर रहीं जिनकी हिस्सेदारी 60 प्रतिशत है। आर्थिक गतिविधियों में सुस्ती के कारण कर्ज की मांग घटना इसकी प्रमुख वजह है। 

कैप्री ग्लोबल कैपिटल लिमिटेड के कार्यकारी निदेशक अजय मंगलुनिया ने कहा, ‘पिछले महीने यील्ड लगभग 6.30 प्रतिशत से बढ़कर 6.55 प्रतिशत हो गया है, और कंपनियां ज्यादा कूपन दर देने को तैयार नहीं हैं। व्यवस्था में पर्याप्त नकदी के बावजूद ब्याज दरें बढ़ रही हैं क्योंकि नीतिगत दरों में कटौती की उम्मीद कम है। जब तक अमेरिकी शुल्क युद्ध जैसी वैश्विक अनिश्चितताओं पर स्पष्टता नहीं आ जाती, तब तक जारीकर्ता उधार लेने की जल्दी में नहीं हैं। यही कारण है कि अगस्त में कोई बड़ा कॉर्पोरेट बॉन्ड जारी नहीं हुआ है।’सालाना आधार पर एएए रेटेड कॉर्पोरेट बॉन्डों का यील्ड अगस्त में अब तक 13 आधार अंक बढ़ा है। चालू वित्त वर्ष के पहले 4 महीनों में कॉर्पोरेट बॉन्डों की आपूर्ति अधिक होने के बाद अगस्त में बॉन्ड यील्ड बढ़ा है, क्योंकि नीतिगत दर तय करने वाली समिति के आक्रामक रुख के कारण दर में कटौती की उम्मीद धूमिल पड़ गई है। 

 रॉकफोर्ट फिनकैप एलएलपी के संस्थापक और मैनेजिंग पार्टनर वेंकटकृष्णन श्रीनिवासन ने कहा, ‘बाजार सतर्क है और सरकार से स्पष्टता का इंतजार कर रहा है कि क्या वह जीएसटी सुधारों, शुल्क और राजकोषीय घाटे के प्रबंधन के मद्देनजर राजकोषीय जरूरतों को पूरा करने के लिए और अधिक उधार लेगी? धन जुटाने के लिए सरकार के पास लघु बचत, विनिवेश और लाभांश जैसे वैकल्पिक रास्ते हैं, जो नई बाजार उधारी की जरूरत कम कर सकते हैं।’

Advertisement
First Published - August 24, 2025 | 10:00 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement