देश के वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने सोमवार को कहा कि भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते में अधिकांश विवादित या अटके हुए मुद्दों का समाधान हो गया है जिससे समझौते की आरंभिक किस्त की दिशा में तेजी से प्रगति होने के संकेत मिल रहे हैं। यद्यपि उन्होंने समझौते के पूरा होने के लिए किसी समय सीमा का उल्लेख नहीं किया है। न ही उन्होंने यह बताया कि दोनों पक्ष कितने बिंदुओं पर सहमत हुए हैं।
अग्रवाल ने एक समाचार चैनल के साथ बजट के बाद बातचीत में कहा, ‘मोटे तौर पर अधिकांश अटके हुए मुद्दे हल हो चुके हैं। इसलिए हम तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। देखिए आगे क्या होता है? ये कब होगा, कितनी तेजी से होगा? इन सवालों के लिए मैं कोई तारीख नहीं तय करूंगा लेकिन हमें उम्मीद है कि देर सबेर यह ही हो जाएगा।’
अग्रवाल ने कहा कि जहां तक प्रस्तावित समझौते की बात है तो अभी ढांचे मौजूद हैं। एक प्रारंभिक समझौता और दूसरा द्विपक्षीय व्यापार समझौता। एक व्यापक और गहन मुक्त व्यापार समझौते में अधिक समय लगता है इसलिए निकट भविष्य में प्रारंभिक समझौते पर ध्यान है। यह जवाबी शुल्क से संबंधित हो सकता है और इसका स्वरूप बन भी रहा है।
उन्होंने आगे कहा, ‘जवाबी शुल्क से संबंधित बातचीत का एक प्रमुख बिंदु यह है कि हम दोनों पक्षों पर अपने शुल्क को कैसे सुसंगत बना सकते हैं ताकि दोनों देशों के बीच अधिक संतुलित व्यापार की दिशा में काम किया जा सके। यही वह मूल होगा जो हम पहले चरण में हासिल करेंगे।’ उन्होंने आगे कहा कि प्रारंभिक समझौता उन क्षेत्रों को भी देखेगा जिनका सामना दोनों पक्ष करते हैं।
उदाहरण के लिए गैर-शुल्क उपाय। दोनों देशों के बीच व्यापार वार्ता मार्च में आरंभ हुई थी और अब तक छह दौर की बातचीत हो चुकी है। सबसे ताजा अनौपचारिक बातचीत दिसंबर में नई दिल्ली में हुईं जब अमेरिकी उप व्यापार प्रतिनिधि के नेतृत्व में एक कारोबारी दल भारत आया था। इसके बाद, साल के अंत में अवकाश के कारण वार्ताओं में विराम आ गया और समझौते को अंतिम रूप देने को लेकर अनिश्चितता बनी रही। वर्तमान में दोनों पक्ष वर्चुअल रूप से जुड़े हुए हैं। अभी तक आमने-सामने किसी नई चर्चा का दौर निर्धारित नहीं किया गया है।