facebookmetapixel
AI में आत्मनिर्भरता की जरूरत, भारत को सभी स्तरों पर निवेश करना होगा: अभिषेक सिंहAI में 33% बढ़ी नौकरियां, सरकार हर स्तर पर कर रही काम; 10 लाख युवाओं को मिलेगी ट्रेनिंग: वैष्णवडिकंट्रोल से लाभ: प्रतिबंध हटाने से देश को मिलेंगे बड़े फायदेEditorial: प्रगति प्लेटफॉर्म से इंफ्रास्ट्रक्चर को रफ्तार, रुकी परियोजनाओं को मिली गतिवेनेजुएला संकट का भारतीय IT कंपनियों पर कोई खास असर नहीं पड़ेगा, कारोबार रहेगा स्थिरउत्तर प्रदेश की मतदाता सूची में बड़ी छंटनी, SIR में करीब तीन करोड़ लोगों के नाम कटेबांग्लादेश में छात्र नेता की हत्या पर उबाल, भारतीयों के ‘वर्क परमिट’ रद्द करने की मांगकई राज्यों में दूषित पानी से सेहत पर संकट, देशभर में बढ़ रहा जल प्रदूषण का खतरानए हवाई अड्डों से होटल उद्योग को मिलेगी रफ्तार, नवी मुंबई और नोएडा बने नए हॉस्पिटैलिटी हबगांवों में कार बिक्री ने शहरों को पछाड़ा, 2025 में ग्रामीण बाजार बना ऑटो सेक्टर की ताकत

केंद्र सरकार ने राज्यों को एडवांस टैक्स का हिस्सा जारी किया

कर हस्तांरण के राज्य-वार आंकड़ों के अनुसार उत्तर प्रदेश को सबसे अधिक ₹31,000 करोड़, उसके बाद मध्य प्रदेश को ₹13,987 करोड़ और यूपी को ₹13,404 करोड़ जारी किए गए थे।

Last Updated- October 10, 2024 | 11:03 PM IST
Finance Ministry

सरकार ने गुरुवार को राज्यों को आगामी त्योहारों और पूंजीगत व्यय बढ़ाने के लिए 89,086.50 करोड़ रुपये की अग्रिम किस्त सहित कर हिस्से के हस्तांतरण की मद में 1.78 लाख करोड़ रुपये जारी किए। यह जानकारी वित्त मंत्रालय की बयान में दी गई।

वित्त मंत्रालय ने बयान में बताया, ‘इसमें अक्टूबर 2024 की नियमित किस्त के अतिरिक्त एक अग्रिम किस्त शामिल है… यह किस्त आगामी त्योहारी सत्र के मद्देनजर जारी की गई है और इससे वे विकास/ कल्याण संबंधित व्यय को धन मुहैया करा सकते हैं।’

कर हस्तांरण के राज्य-वार आंकड़ों के अनुसार उत्तर प्रदेश को सबसे अधिक 31,000 करोड़ रुपये, उसके बाद मध्य प्रदेश को 13,987 करोड़ रुपये और पश्चिम बंगाल को 13,404 करोड़ रुपये जारी किए गए थे।

मानदंडों के अनुसार बांटे गए कर पूल की राशि को 14 सालाना किस्तों में दिया जाता है : इसमें 11 महीनों में 11 किस्तें और मार्च में तीन किस्तें दी जाती हैं। केंद्रीय बजट के वित्त वर्ष 2024-25 के अनुसार सरकार ने वित्त वर्ष 2024-25 में केंद्रीय करों में से राज्यों को 32.5 प्रतिशत हिस्सेदारी का अनुमान जताया है जबकि 15वें वित्त आयोग ने 41 प्रतिशत की सिफारिश की है।

केंद्र के उपकर और अधिभार लगाए जाने से राज्यों की हिस्सेदारी कम होती है। दरअसल केंद्र सरकार राज्यों के साथ उपकर और अधिभार को साझा नहीं करती है। इसलिए राज्य अक्सर शिकायत करते हैं कि उन्हें वित्त आयोग की सिफारिशों की तुलना में करों में कम हिस्सेदारी दी जा रही है।

First Published - October 10, 2024 | 10:49 PM IST

संबंधित पोस्ट