facebookmetapixel
Advertisement
AIF Market: पश्चिम एशिया संकट थमने से वैकल्पिक निवेश फंडों में लौटी रौनक, HNIs का बढ़ा भरोसाभारतीय फिनटेक कंपनियों की नजर अब ग्लोबल मार्केट पर, स्ट्राइप-पेपाल की तर्ज पर दुनिया भर में लाइसेंस लेने की होड़इनवेस्को सहित कई फंड कंपनियों ने नए निवेश पर लगाई रोक, पर निवेशक गोल्ड ETF खरीदें, बेचें या होल्ड करें?EMI नहीं चुका पाने के चलते बैंक वाले उठा ले गए बाइक? जानिए क्या हैं आपके पास कानूनी अधिकारSME IPO में करने जा हैं निवेश? सिर्फ GMP देखकर न फंसें, नुकसान से बचने के लिए इन फैक्टर्स का भी रखें ध्यानग्रीन यूरिया को प्रतिस्पर्धी बनाने की तैयारी, लागत का अंतर दूर करने के लिए सब्सिडी देगी सरकारराज्यों के पूंजीगत व्यय में आई सुस्ती, 20 राज्य ने दो महीने में खर्च किया बजट का सिर्फ 5.86% हिस्साCredit Card Market: नए कार्ड जारी करने में SBI Card रहा नंबर-1, मई में जोड़े रिकॉर्ड 1.81 लाख ग्राहकरिकॉर्ड स्तर पर पहुंची गेहूं की सरकारी खरीद, 357 लाख टन के पार पहुंचा आंकड़ा; पंजाब-एमपी अव्वलकोयले से गैस बनाने के लिए ₹37,500 करोड़ की मेगा योजना शुरू, केंद्र सरकार ने जारी की अधिसूचना

महिलाओं की बहुत कम हिस्सेदारी

Advertisement

वैश्विक स्तर पर यह औसत 20 प्रतिशत है

Last Updated- March 08, 2023 | 12:20 PM IST
Woman

वैश्विक स्तर पर निवेश प्रबंधन के क्षेत्र में एक मानक समझी जाने वाली योग्यता चार्टर्ड फाइनैंशियल एनालिस्ट (सीएफए) परीक्षा उत्तीर्ण करने वाली महिलाओं की हिस्सेदारी भारत में मात्र 13 प्रतिशत है। वैश्विक स्तर पर यह औसत 20 प्रतिशत है। बिज़नेस स्टैंडर्ड ने 8 मार्च को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस से पहले इस संबंध में पड़ताल करने की कोशिश की जिसके जवाब में सीएफए संस्थान ने ये तुलनात्मक आंकड़े जारी किए हैं।

निचले स्तरों पर उम्मीदवारी की बात करें तो यह अंतर थोड़ा कम नजर आता है। सीएफए लेवल 1 के लिए जितने उम्मीदवार होते हैं उनमें महिलाओं की हिस्सेदारी 27 प्रतिशत होती है। सीएफए लेवल 3 परीक्षा तक यह हिस्सेदारी 6 प्रतिशत अंक कम होकर 21 प्रतिशत रह जाती है। इसके उलट पुरुषों की हिस्सेदारी 73 प्रतिशत से बढ़कर 79 प्रतिशत तक पहुंच जाती है।

सीएफए लेवल 3 परीक्षा उत्तीर्ण करने वालों में करीब 22 प्रतिशत महिलाएं होती हैं। इससे कालांतर में विविधता के मामले में भारत का स्तर वैश्विक मानकों के करीब पहुंचना चाहिए। हालांकि सभी सीएफए का अंतिम लेवल उत्तीर्ण नहीं कर पाते हैं। चार्टर उन लोगों को दिया जाता है जो परीक्षा पास करते हैं और 4,000 घंटे का आवश्यक कार्य अनुभव भी प्राप्त करते हैं। चार्टर धारक महिलाओं की हिस्सेदारी घट कर कुल संख्या का दसवां हिस्सा रह जाती है। दूसरी तरफ, पुरुषों की हिस्सेदारी करीब 90 प्रतिशत हो जाती है।

सीएफए इंस्टीट्यूट इंडिया की प्रमुख आरती पोरवाल ने कहा कि इस समय पूरी दुनिया में सीएफए के करीब 1.70 लाख सदस्य हैं। भारत में 3,500 सदस्य हैं। कंपनियों में ऊंचे स्तरों पर वेतन में अंतर महिला-पुरुषों के इस असंतुलित अनुपात का एक कारण है। पोरवाल के अनुसार इसके अलावा कई महिलाएं दूसरे कारणों जैसे विवाह, विवाह के बाद स्थान परिवर्तन, मातृत्व आदि कारणों से बीच में पढ़ाई रोक देती हैं। सीएफए इंस्टीट्यूट महिलाओं के लिए मेंटरशिप प्रोग्राम के जरिये इस असंतुलन को पाटने का प्रयास कर रहा है। इंस्टीट्यूट विविधता, समानता और समावेश बढ़ाने के लिए जरूरी नीतियों का भी सहारा ले रहा है। इन उपायों से महिलाओं की भागीदारी और कंपनियों में ऊंचे स्तरों पर वेतन में असमानता जैसे मुद्दों के समाधान में मदद मिल सकती है। पोरवाल ने कहा, ‘खासकर ऊंचे पदों पर यह समस्या अधिक दिखती है।‘

दुनिया की दूसरी अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में भारत में 15 वर्ष से उम्र से आर्थिक रूप से सक्रिय महिलाओं की संख्या कम है। विश्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार 2021 में भारत में श्रम बल में महिलाओं की भागीदारी दर 23 प्रतिशत थी। वैश्विक स्तर पर यह दर 47 प्रतिशत थी। ब्राजील (52 प्रतिशत), रूस (55.3 प्रतिशत) और चीन (61.3 प्रतिशत) में यह दर अधिक रही। अधिकांश विकसित देशों में भी श्रम बल में महिलाओं की भागीदारी दर तुलनात्मक रूप से अधिक है। अमेरिका और ब्रिटेन में यह दर क्रमशः 55.6 प्रतिशत और 58.3 प्रतिशत रही है।

2014 में अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन के ‘वीमंस लेबर फोर्स पार्टिसिपेशन इन इंडियाः व्हाई इज इट सो लो’ शीर्षक नाम से प्रकाशित एक नोट में कहा गया कि महिलाओं की भागीदारी कम होने के पीछे कई कारण हैं। इनमें परिवार की आर्थिक स्थिति सुधरने पर महिलाओं को घरों में रहने को अधिक तरजीह दिए जाने सहित कई कारण जिम्मेदार हैं। इस रिपोर्ट के लेखक शेर वेरिक ने कहा, गिरते रुझानों पर चर्चा ज्यादातर चार प्रमुख बिंदुओं- युवा महिलाओं में शैक्षणिक संस्थानों में अधिक नामांकन, रोजगार के अवसरों का अभाव, श्रम बल में भागीदार पर परिवार की आय का प्रभाव और मीजरमेंट – के इर्द-गिर्द घूमती है।

Advertisement
First Published - March 8, 2023 | 12:20 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement