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केंद्र ने रिलायंस और बीपी से KG-D6 गैस उत्पादन में कमी के लिए 30 अरब डॉलर हर्जाने की मांग की

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सूत्रों के अनुसार सरकार ने यह दावा तीन-सदस्यीय मध्यस्थता न्यायाधिकरण के समक्ष प्रस्तुत किया है

Last Updated- December 29, 2025 | 11:05 PM IST
Reliance BP
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

केंद्र सरकार ने कृष्णा-गोदावरी बेसिन के केजी-डी6 गैस क्षेत्र से प्राकृतिक गैस उत्पादन का लक्ष्य पूरा नहीं कर पाने के मामले में रिलायंस इंडस्ट्रीज (आरआईएल) और उसकी साझेदार बीपी से 30 अरब डॉलर से अधिक का हर्जाना मांगा है। घटनाक्रम से अवगत सूत्रों ने यह जानकारी दी है।

सूत्रों के अनुसार सरकार ने यह दावा तीन-सदस्यीय मध्यस्थता न्यायाधिकरण के समक्ष प्रस्तुत किया है। करीब 14 साल पुराने इस मामले पर सुनवाई 7 नवंबर को पूरी हो चुकी है। सूत्रों ने बताया कि न्यायाधिकरण अगले साल के मध्य तक इस मामले में अपना फैसला सुना सकता है। कई जानकारों ने कहा कि फैसले को उच्चतम न्यायालय में चुनौती देने का विकल्प होगा।

रिलायंस ने एक बयान में कहा कि रिलायंस और बीपी के खिलाफ 30 अरब डॉलर का कोई दावा नहीं है और यह कहना तथ्यात्मक रूप से गलत है कि सरकार ने केजी डी6 गैस फील्ड में कम उत्पादन के लिए उससे और उसके साझेदार से 30 अरब डॉलर की मांग की है। सरकार ने यह दावा मामले की सुनवाई कर रही मध्यस्थता न्यायाधिकरण के सामने किया है। मध्यस्थता न्यायाधिकरण या अदालत के सामने मुआवजे का दावा करने का मतलब यह नहीं है कि किसी भी पक्ष के खिलाफ कोई औपचारिक दावा किया गया है।

सरकार का आरोप है कि दोनों साझेदारों ने केजी-डी6 ब्लॉक में जरूरत से ज्यादा बड़ी सुविधाएं विकसित कीं मगर वे प्राकृतिक गैस उत्पादन के निर्धारित लक्ष्यों को हासिल कर पाने में नाकाम रहे। मध्यस्थता प्रक्रिया के दौरान सरकार ने उत्पादित नहीं की जा सकी गैस का मौद्रिक मूल्य मांगने के साथ ही प्रतिष्ठानों पर अतिरिक्त खर्च, ईंधन विपणन और ब्याज पर भी मुआवजा मांगा है। इन सभी दावों का कुल मूल्य 30 अरब डॉलर से अधिक आंका गया है।

विवाद केजी-डी6 ब्लॉक के डी1 और डी3 गैस क्षेत्र से जुड़ा है। सरकार का कहना है कि रिलायंस ने स्वीकृत निवेश योजना का पालन नहीं किया, जिससे उत्पादन क्षमता का पूरा उपयोग नहीं हो सका। डी1 और डी3 क्षेत्रों में उत्पादन 2010 में शुरू हुआ था लेकिन उसके एक साल बाद से ही गैस उत्पादन अनुमानों से पीछे रहने लगा और फरवरी 2020 में ये दोनों गैस क्षेत्र अपने अनुमानित जीवनकाल से काफी पहले ही बंद हो गए।  रिलायंस ने प्रारंभिक क्षेत्र विकास योजना में 2.47 अरब डॉलर के निवेश से प्रतिदिन चार करोड़ मानक घन मीटर गैस उत्पादन का लक्ष्य रखा था।

बाद में 2006 में इसे संशोधित कर 8.18 अरब डॉलर का निवेश और मार्च 2011 तक 31 कुओं की खुदाई के साथ उत्पादन दोगुना करने का अनुमान जताया गया। हालांकि कंपनी केवल 22 कुएं ही खोद सकी, जिनमें से 18 से ही उत्पादन शुरू हो पाया। रेत और पानी के घुसने से कुएं समय से पहले ही बंद होने लगे। इसकी वजह से इस क्षेत्र के गैस भंडार का अनुमान 10.03 लाख करोड़ घन फुट से घटाकर 3.10 लाख करोड़ घन फुट कर दिया गया।

सरकार ने इस स्थिति के लिए रिलायंस-बीपी को जिम्मेदार ठहराते हुए शुरुआती वर्षों में किए गए 3.02 अरब डॉलर के खर्च को लागत वसूली गणना से बाहर कर दिया। रिलायंस ने इसका विरोध करते हुए कहा कि उत्पादन साझेदारी अनुबंध में सरकार को इस आधार पर लागत वसूली रोकने का अधिकार नहीं है।

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First Published - December 29, 2025 | 11:05 PM IST

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