facebookmetapixel
CIBIL स्कोर अच्छा होने के बावजूद क्रेडिट कार्ड क्यों होता है रिजेक्ट? एक्सपर्ट ने बताए कारणभारत की सर्विसेज PMI दिसंबर में 11 महीने के निचले स्तर पर, नए ऑर्डर में दिखी सुस्ती2026 तक 52 डॉलर तक गिर सकता है कच्चा तेल? रुपये में भी लौटेगी मजबूती! जानें क्या कह रहे हैं एक्सपर्टSenior Citizen FD Rates: PSU, Private या SFB, कौन दे रहा है सीनियर सिटीजन को सबसे ज्यादा ब्याज?Q3 अपडेट के बाद 4% टूटा दिग्गज FMCG शेयर, लेकिन ब्रोकरेज को भरोसा; ₹625 के दिए टारगेटअमेरिका-वेनेजुएला तनाव के बीच सोना-चांदी में ताबड़तोड़ तेजी, एक्सपर्ट ने बताया- इन धातुओं में कितना निवेश करेंGold silver price today: चांदी फिर 2.50 लाख पार, सोना भी हुआ महंगा; चेक करें आज के रेटदूध के साथ फ्लेवर्ड दही फ्री! कहानी क्विक कॉमर्स की जो बना रहा नए ब्रांड्स को सुपरहिटWeather Update Today: उत्तर भारत में ठंड की लहर! IMD ने जारी किया कोहरा-बारिश का अलर्ट67% चढ़ सकता है सिर्फ ₹150 का शेयर, Motilal Oswal ने शुरू की कवरेज; BUY की दी सलाह

फंडों से जुड़ाव में बड़े शहरों को पीछे छोड़ रहे छोटे शहर

कॉइन बाइ जीरोधा के प्रॉडक्ट हेड व सहायक उपाध्यक्ष नीलेश वर्मा ने कहा कि कोविड के बाद देश भर में डीमैट खातों की संख्या में खासा इजाफा हुआ था।

Last Updated- April 25, 2024 | 10:58 PM IST
Debt Funds

ऑनलाइन इन्वेस्टमेंट प्लेटफॉर्म की तरफ से पेश डायरेक्ट प्लान म्युचुअल फंड योजनाओं के पास अब 30 अग्रणी शहरों के मुकाबले छोटे शहरों और गांवों के ज्यादा निवेश खाते हैं। अग्रणी 30 शहरों से अलग खुदरा खातों की संख्या वित्त वर्ष 2024 में 52 फीसदी बढ़ी जबकि 30 अग्रणी शहरों में इन खातों में 39 फीसदी की वृद्धि दर्ज हुई।

मार्च के आखिर में डायरेक्ट प्लान में 30 अग्रणी शहरों से इतर खुदरा फोलियो की संख्या 2.81 करोड़ रही जबकि अग्रणी शहरों के वैयक्तिक निवेशकों के खाते 2.6 करोड़ रहे।

डायरेक्ट एमएफ इन्वेस्टमेंट प्लेटफॉर्म कॉइन बाइ जीरोधा का मानना है कि 30 अग्रणी शहरों से इतर जगहों वाले काफी निवेशकों ने डीमैट खाते के जरिये निवेश शुरू किया था। इनके अब शायद म्युचुअल फंडों का रुख करने की संभावना है।

कॉइन बाइ जीरोधा के प्रॉडक्ट हेड व सहायक उपाध्यक्ष नीलेश वर्मा ने कहा कि कोविड के बाद देश भर में डीमैट खातों की संख्या में खासा इजाफा हुआ था। ये निवेशक अब संभवतया म्युचुअल फंडों का रुख कर रहे हैं और ये मोटे तौर पर डायरेक्ट प्लान के जरिये हो रहा है। इसके अलावा म्युचुअल फंड उद्योग के जागरूकता अभियान और निवेशक शिक्षा कार्यक्रम से भी फंडों की पैठ बढ़ रही है।

हालांकि खुदरा डायरेक्ट प्लान परिसंपत्तियों में अग्रणी शहरों की हिस्सेदारी के मुकाबले छोटे शहरों के निवेशकों की हिस्सेदारी उसका एक हिस्सा भर है। छोटे शहरों के 2.81 करोड़ खातों में निवेश 1.45 लाख करोड़ रुपये रहा जबकि अग्रणी 30 शहरों के मामले में यह 5.8 लाख करोड़ रुपये रहा। यह छोटे शहरों में औसत निवेश प्रति खाता 51,600 रुपये बैठता है जबकि अग्रणी शहरों के मामले में प्रति खाता 2.23 लाख रुपये है।

म्युचुअल फंडों के अधिकारियों के मुताबिक उद्योग ने वित्त वर्ष 2024 में इक्विटी बाजारों की तेजी के दम पर विभिन्न मानकों में मजबूत वृद्धि देखी। बेंचमार्क सूचकांक निफ्टी 50 और सेंसेक्स में वित्त वर्ष 2024 में करीब 25 फीसदी की बढ़ोतरी हुई।

क्वांटम म्युचुअल फंड के सीईओ जिमी पटेल ने कहा कि छोटे शहरों में ज्यादा वृद्धि नजर आ रही है क्योंकि अग्रणी शहरों के बाजार सैचुरेशन के एक निश्चित स्तर पर पहुंच चुके हैं। वृद्धि की ज्यादा संभावना के कारण म्युचुअल फंड अब छोटे शहरों पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं।

वित्त वर्ष 24 में बाजारों की मजबूती ने भी निवेशकों और खातों के जुड़ाव में बढ़ोतरी में योगदान किया। छोटे शहरों में प्रसार में बढ़ोतरी के लिए वे ज्यादा प्रतिफल वाले निवेश गंतव्य की बढ़ती दरकार को भी जवाबदेह बता रहे हैं और निवेश योजनाओं को लेकर सूचनाओं तक पहुंच का भी इसमें योगदान रहा है।

जब रेग्युलर प्लान की बात आती है तो छोटे शहर अभी भी अग्रणी शहरों से काफी बड़े अंतर से पीछे हैं। उद्योग निकाय एम्फी के आंकड़ों के अनुसार मार्च 2024 के आखिर में खुदरा रेग्युलर प्लान फंड खातों की संख्या छोटे शहरों में 5.23 करोड़ थी जबकि अग्रणी शहरों में 7.04 करोड़ खाते थे।

वित्त वर्ष 24 में तेजी और रिटर्न के मामले में ज्यादातर इक्विटी फंड योजनाओं के बेहतर प्रदर्शन से 68 लाख नए निवेशक आकर्षित हुए जो इससे पिछले साल के मुकाबले 70 फीसदी ज्यादा है।

First Published - April 25, 2024 | 10:25 PM IST

संबंधित पोस्ट