facebookmetapixel
Advertisement
UN में भारत का साफ रुख: नक्शा सुधारें, लेकिन जम्मू-कश्मीर, लद्दाख के आधिकारिक नक्शे से छेड़छाड़ मंजूर नहींबॉन्ड यील्ड बढ़ने से डेट फंड निवेशकों की बढ़ी चिंता, जानें किस अवधि के लिए कौन-सा फंड सहीम्युचुअल फंड इंडस्ट्री ने IPO में लगाए 12,944 करोड़ रुपये, 52 फीसदी निवेश तीन फंड हाउस का35 रुपये किलो वाली सरकारी प्याज की भारी मांग, कांदा एक्सप्रेस से 17 शहरों में पहुंची खेपअगले हफ्ते शेयर बाजार में दिख सकता है बड़ा उतार-चढ़ाव, इन संकेतों पर निवेशकों की रहेगी नजर₹50 का मोटा डिविडेंड! गुरखा बनाने वाली कंपनी का बड़ा तोहफा, रिकॉर्ड डेट इसी हफ्तेप्राइमरी मार्केट में बंपर हलचल: 7 से 15 सितंबर के बीच खुलेंगे 11 IPOs, ₹7,055 करोड़ जुटाने की तैयारीविदेशी निवेशकों का बदला रुख, सितंबर के पहले हफ्ते में शेयर बाजार से निकाले ₹7,443 करोड़PM Kisan की 24वीं किस्त कब आएगी? जानें संभावित तारीख, पात्रता और e-KYC की पूरी जानकारीदेश भर में फिर सक्रिय हुआ मॉनसून, दिल्ली-NCR समेत कई राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट जारी

Pharma और मेडटेक के लिए आई 5,000 करोड़ रुपये की योजना

Advertisement

इस योजना का मकसद भारत के औषधि क्षेत्र को लागत आधारित से नवोन्मेष आधारित वृद्धि की ओर केंद्रित करना है।

Last Updated- September 26, 2023 | 10:30 PM IST
Natco pharma

केंद्रीय मंत्री मनसुख मांडविया ने फार्मा और मेडटेक सेक्टर (PRIP) में शोध एवं नवोन्मेष को प्रोत्साहन देने के लिए 5,000 करोड़ रुपये की योजना शुरू की है।

इस योजना का मकसद भारत के औषधि क्षेत्र को लागत आधारित से नवोन्मेष आधारित वृद्धि की ओर केंद्रित करना है। योजना में भारत में शोध संबंधी बुनियादी ढांचे पर जोर दिया गया है, जो 50 अरब डॉलर के करीब मौजूदा बाजार के साथ मात्रा के हिसाब से विश्व का तीसरा बड़ा दवा उद्योग है।

मांडविया ने इसे दवा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की ओर कदम बताते हुए कहा कि भारत को फार्मा और मेडटेक उद्योग में विश्व में अग्रणी बनने के लिए एक जीवंत शोध का वातावरण बनाने की जरूरत है।

उन्होंने कहा, ‘ऐसा नहीं है कि हम भारत में शोध नहीं करते, लेकिन बहुराष्ट्रीय कंपनियां अपने मुनाफे का 20 से 22 प्रतिशत शोध एवं विकास (आरऐंडडी) पर खर्च करती हैं, जबकि भारत की कंपनियां इस पर औसतन 10 प्रतिशत खर्च करती हैं।’भारत का दवा उद्योग व्यापक रूप से जेनेरिक दवाओं पर निर्भर है। जेनेरिक दवाओ में भारत की वैश्विक पकड़ है।

16 अगस्त को आई एक अधिसूचना में कहा गया है, ‘वित्त वर्ष 2021 में शोध एवं विकास पर भारत की शीर्ष 20 दवा कंपनियों ने अपनी बिक्री का करीब 7.2 प्रतिशत खर्च किया। देश में शोध एवं विकास पर खर्च बढ़ाने की जरूरत है, जिससे शोध एवं नवोन्मेष को आगे और प्रोत्साहित किया जा सके।’

इंडियन फार्मास्यूटिकल्स अलायंस के सेक्रेटरी जनरल सुदर्शन जैन ने कहा कि पीआरआईपी भारत के लिए महत्त्वपूर्ण मील का पत्थर है। उन्होंने कहा, ‘यह भारत की दवा कंपनयों को प्रोत्साहित करेगा और शोध एवं विकास के वातावरण को गति मिलेगी। कुल मिलाकर यह भारत में निर्माण और खोज की दिशा में बढ़ा कदम है।’

यह योजना ऐसे समय में सामने आई है जब वैश्विक मेडिकल उपकरण बाजार 2021 के 455.34 अरब डॉलर से बढ़कर 2021-2028 के दौरान 5.4 प्रतिशत सीएजीआर से बढ़कर 657.98 अरब डॉलर होने का अनुमान है। वहीं दूसरी तरफ भारत की वैश्विक मेडिकल उपकरण बाजार में हिस्सेदारी महज 1.5 प्रतिशत है, जबिक वैश्विक मेडटेक आरऐंडडी कार्यबल में हिस्सेदारी 8 प्रतिशत है।

फार्मास्यूटिकल्स एक्सपोर्ट्स प्रमोशन काउंसिल आफ इंडिया की हाल की रिपोर्ट के मुताबिक भारत का दवा निर्यात वित्त वर्ष 24 में बढ़कर 24 अरब डॉलर हो सकता है, जो वित्त वर्ष 23 में 23 अरब डॉलर था।

मेडिकल टेक्नोलॉजी एसोसिएशन आफ इंडिया के चेयरमैन पवन चौधरी ने कहा, ‘पीआरआईपी योजना निस्संदेह भारत में मेडटेक पोर्टफोलियो में नवोन्मेष को बढ़ावा देने का काम करेगी। सरकार द्वारा आरऐंडडी पर ध्यान केंद्रित कनरे से उद्योग प्रोत्साहित होगा, जिसका मकसद भारत की मौजूदा ताकत का इस्तेमाल करना है।’

इस मौके पर नीति आयोग के सदस्य वीके पॉल ने कहा कि फार्मा क्षेत्र के लिए उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजना और अन्य पहल से पूरे क्षेत्र के परिदृश्य में बदलाव आने की उम्मीद है।

(संकेत कौल)

Advertisement
First Published - September 26, 2023 | 10:29 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement