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Editorial: निजी क्षेत्र के बैंकों पर मार्जिन का दबाव

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RBI द्वारा की गई अनिवार्यता के मुताबिक ही बैंक वैकल्पिक निवेश फंड जोखिम के विरुद्ध उच्च प्रोविजन भी रखते हैं।

Last Updated- January 28, 2024 | 8:45 PM IST
Government banks are eyeing new markets to increase deposits, many attractive schemes are being made for opening accounts जमा बढ़ाने के लिए सरकारी बैंकों की नए बाजारों पर नजर, खाते खोलने के लिए बना रहे कई आकर्षक योजना

वित्त वर्ष 24 की तीसरी तिमाही में निजी क्षेत्र के कई बैंकों के नतीजे ऐसे रुझान दर्शाते हैं जो शायद समूचे क्षेत्र पर लागू हों। विशुद्ध ब्याज मार्जिन (एनआईएम) में साफ तौर पर कमी देखी जा सकती है। भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा की गई अनिवार्यता के मुताबिक ही बैंक वैकल्पिक निवेश फंड जोखिम के विरुद्ध उच्च प्रोविजन भी रखते हैं। असुरक्षित ऋण के मामलों में जोखिम भार बढ़ाने की केंद्रीय बैंक की जरूरत ने भी वृद्धि दर पर असर डाला है।

निजी क्षेत्र के अधिकांश हिस्से में फंसा हुआ कर्ज नियंत्रण में बना हुआ है। सरकारी बैंकों में से ज्यादातर के नतीजे अभी घोषित नहीं हुए हैं। इंडसइंड बैंक कुछ हद तक अपवाद है क्योंकि उसका ज्यादातर कारोबार तमिलनाडु में है और वहां बेमौसम की बारिश और बाढ़ ने संग्रह पर असर डाला। हालांकि यह ढांचागत समस्या नहीं प्रतीत होती है और सुधार के जोर पकड़ने की उम्मीद है।

ऋण वृद्धि की बात करें तो अधिकांश बैंकों में यह बेहतर रही है। खुदरा और छोटे और मझोले उपक्रमों में ऋण विस्तार आमतौर पर कॉर्पोरेट ऋण से तेज रहा है। चूंकि समग्र ऋण वृद्धि जमा दर से तेज रही है इसलिए बैंक अब अधिक फंड जुटाने के लिए जमा पर बेहतर ब्याज दे रहे हैं। यह भी एनआईएम में कमी की एक वजह रही है, हालांकि अधिकांश निजी बैंकों के एनआईएम में कमी 50 आधार अंकों से कम रही है।

असुरक्षित ऋण के लिए उच्च जोखिम भार ने भी उन ऋणों को प्रभावित किया है जो क्रेडिट कार्ड से लिए जाते हैं या पर्सनल लोन हैं। ये प्राय: उच्च वृद्धि और उच्च प्रतिफल वाला क्षेत्र है। यह आगे चलकर शुद्ध ब्याज आय (एनआईआई) की वृद्धि में कमी ला सकता है। एचडीएफसी बैंक भी एक अपवाद के रूप में सामने आया है। पूर्व एचडीएफसी के साथ विलय ने कम लागत वाले फंड तक पहुंच आसान की है। बहरहाल अन्य लाभों के सुसंगत होने में अभी समय लगेगा।

बहरहाल, बाजार तीसरी तिमाही में देश के सबसे बड़े निजी बैंक के नतीजों से निराश दिखा। जहां तक गैर ब्याज आय की बात है, राजकोषीय आय कम रही है। यह चौंकाने वाली बात नहीं है क्योंकि नीतिगत दरें अपरिवर्तित रहीं और रुपये में भी अधिक उतार-चढ़ाव नहीं आया। इसलिए बॉन्ड प्रतिफल भी मोटे तौर पर अपरिवर्तित रहे। परिचालन लागत में इजाफा हुआ क्योंकि बैंकों ने उच्च प्रतिस्पर्धा वाले माहौल के चलते शाखाएं खोली हैं।

खुदरा मॉर्गिज भी एक दिलचस्प क्षेत्र है जहां बैंक विशिष्ट गैर बैंक वित्तीय कंपनियों के साथ कड़ा मुकाबला कर रहे हैं। रिजर्व बैंक के हालिया नीतिगत कदमों ने नए एआईएफ प्रावधानों के कारण मुनाफे पर बुरा असर डाला है। अधिकांश निजी बैंकों में प्रबंधन के निर्देश आत्मविश्वास से भरे नजर आ रहे हैं। ऋण की मांग में इजाफा जारी रहने की उम्मीद है। बैंक मानकर चल रहे हैं कि रिजर्व बैंक फेडरल रिजर्व के साथ तालमेल रखते हुए उसके साथ ही नीतिगत दरों में कटौती आरंभ कर देंगे।

परंतु जब तक मौद्रिक नीति मजबूत बनी रहेगी और ऋण जमा अनुपात सुधरेगा, एनआईएम में कमी जारी रहेगी। दिग्गजों की मानें तो चालू तिमाही में एनआईएम में और कमी आएगी भले ही इसका आकार बहुत बड़ा न हो। कॉर्पोरेट ऋण की मांग में सुधार की भी अपेक्षा है। यह खुदरा ऋण विस्तार में धीमेपन की भरपाई करेगा।

सैद्धांतिक तौर पर देखें तो क्षमता के उपयोग में सुधार की मदद से कॉर्पोरेट निवेश में सुधार किया जा सकता है। हालांकि शुरुआती कॉर्पोरेट नतीजे यही संकेत देते हैं कि मुनाफे में वृद्धि बहुत ऊंची नहीं है। बैंक निफ्टी जिसमें कई निजी बैंक हैं, उसका प्रदर्शन पिछले महीने कमजोर रहा है क्योंकि निवेशक बहुत उत्साहित नहीं नजर आए। निकट भविष्य में प्रदर्शन इस बात पर निर्भर करेगा कि मौद्रिक नीति के आसपास कॉर्पोरेट ऋण की अपेक्षाओं में कैसी बढ़ोतरी होती है। केंद्र सरकार का राजकोषीय रुख भी निकट अवधि का दृष्टिकोण तय करेगा।

(स्पष्टीकरण: कोटक परिवार के नियंत्रण वाली इकाइयों की बिज़नेस स्टैंडर्ड प्राइवेट लिमिटेड में अहम हिस्सेदारी है।)

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First Published - January 28, 2024 | 8:45 PM IST

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