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भारत में हर गली कोने और चप्पे-चप्पे तक पहुंचाता है गूगल मैप्स

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मैपिंग प्लेटफॉर्म पर रोजाना 5 करोड़ से ज्यादा रास्ते खोजे जाते हैं, नए फीचर से लैस गूगल मैप पर अब पता आधारित खोज भी हो रहे

Last Updated- December 25, 2023 | 11:15 PM IST
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भारत में पैनोरमिक स्ट्रीट व्यू पेश करने के एक साल बाद गूगल मैप्स अब अपने उपयोगकर्ताओं को 3 हजार से अधिक शहरों और कस्बाई इलाकों को तलाश करने का विकल्प दे रहा है। पिछले साल गूगल ने टेक महिंद्रा और जेनेसिस इंटरनैशनल के साथ साझेदारी का ऐलान किया था जिसने इसे भवनों और गलियों की तस्वीर मुहैया कराई और फिर इसके लिए आर्टिफिशल इंटेलिजेंस को लगाया गया।

इसने कंपनी को 30 करोड़ से अधिक भवनों के विवरण निकालने और मैप्स पर ओवरले करने की अनुमति दी। गूगल के मैप्स एक्सपीरियंस की उपाध्यक्ष मीरियम कार्तिक डैनियल ने कहा कि सटीक जानकारी होने से गूगल मैप्स पर बेहतर तरीके से खोज करने कर अवसर मिलता है।

बिज़नेस स्टैंडर्ड के साथ बातचीत में उन्होंने कहा, ‘चूंकि हम भारत में अधिक मैपिंग करने में सक्षम हैं और एआई का उपयोग कर रहे हैं इसलिए हम यहां अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं। उदाहरण के लिए, गूगल मैप्स पर हर दिन 50 करोड़ से ज्यादा खोज होते हैं। इनमें से अधिकतर खोज 10 अलग-अलग भाषाओं में होती है जो भारत के लिए अनूठी है।’

डेनियल ने कहा कि अधिक सटीक परिणाम के लिए स्ट्रीट व्यू और एआई का उपयोग भारत में जरूरी था क्योंकि, यहां पता बताने के तरीके, परिवहन के साधन अलग-अलग हैं और यहां हमेशा सड़कों की मरम्मत के कारण भी मार्ग परिवर्तन भी होते रहते हैं।

गूगल मैप्स ने हाल में भारत में नए फीचर का ऐलान किया, जिसमें लैंडमार्क वाले ऐड्रेस डिस्क्रिप्टर सहित तमाम सुविधाएं हैं। कैलिफोर्निया मुख्यालय वाली तकनीकी दिग्गज कंपनी ने नई दिल्ली में एक कार्यक्रम के दौरान भारतीय उपयोगकर्ताओं के लिए सुविधाएं जोड़ने की घोषणा की। लैंडमार्क आधारित फीचर अगले साल की शुरुआत में शुरू होने की उम्मीद है। इससे उपयोगकर्ताओं को मैप्स पर पते के पास के पांच लैंडमार्क दिखेंगे।

लैंडमार्क फीचर की महत्ता पर डेनियल ने कहा, ‘हम मैप्स में कुछ ऐसा पेश कर रहे हैं जो भारतीयों के लिए अनूठा है। यह वैसा ही है जैसे लोग पता समझाने के लिए आपस में बात करते हैं।’

कंपनी ने भारत में लाइव व्यू वॉकिंग फीचर भी पेश किया है। इसमें एआई, स्ट्रीट व्यू का उपयोग किया जाएगा। अन्य तकनीक कंपनियों की तरह गूगल मैप्स भी पहले भारत के लिए संस्करण पेश कर रही है फिर से अन्य देशों में पेश करेगी। ऐड्रेस डिस्क्रिप्टर भी इसका एक उदाहरण है।

डेनियल ने कहा, ‘हमने इसे साल की शुरुआत में भारत के गूगल मैप्स प्लेटफॉर्म के डेवलपरों के लिए पेश किया ताकि उन्हें अधिक सहज सुविधा का लाभ मिल सके। अब हम इसे देश के 75 से अधिक शहरों के डेवलपर्स के बीच ले जाएंगे।’ ऐड्रेस डिस्क्रिप्टर पर काम करने वाली टीम कंपनी के बेंगलूरु दफ्तर की है।

विश्व में पेश करने से पहले भारत में और भारत के लिए तैयार किए उत्पादों में ऑफलाइन मैप्स हैं। यह सुदूर इलाकों में कनेक्टिविटी की समस्या को हल करने के लिए तैयार किया गया। इसी तरह कंपनी ने दोपहिया वाहन चालकों के लिए सबसे आसान और तेज रास्तों की पहचान करने के लिए एक दोपहिया वाहन मोड बनाया, जिसे फिर अन्य देशों तक पहुंचाया।

इसके अलावा, इस साल की शुरुआत में गूगल फॉर इंडिया 2023 कार्यक्रम के दौरान सरकारी कंपनी ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स (ओएनडीसी) के साथ साझेदारी का ऐलान कर गूगल मैप्स ने कहा कि वह नम्मा यात्री ऐप के साथ साझेदारी कर रही है ताकि जनवरी 2024 तक कोच्चि मेट्रो को अपने प्लेटफॉर्म पर शामिल कर सके। डेनियल ने कहा, ‘2024 के मध्य तक नम्मा यात्री और ओएनडीसी के सहयोग से हम कोच्चि मेट्रो को टिकटों की बुकिंग के लिए गूगल मैप्स पर लगा रहे हैं।’

इन ऐप्लिकेशन के अलावा वेयर इज माय ट्रेन के जरिये लोकल ट्रेनों की जानकारी भी मुहैया कराई गई। इसकी शुरुआत मुंबई और कोलकाता से की गई। गूगल मैप्स ने भी यह घोषणा की है कि उसकी वैश्विक एआई आधारित ईंधन की कम खपत वाले रास्ते बताने वाली प्रणाली अगले साल जनवरी से भारत के 20 से अधिक शहरों में शुरू हो जाएगी। इससे कार्बन उत्सर्जन कम करने में भी मदद मिलेगी। डेनियल ने कहा, ‘हमने इसे दुनियाभर में डेढ़ साल पहले पेश किया था तब से 24 करोड़ मीट्रिक टन कार्बन उत्सर्जन कम हुआ है।’

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First Published - December 25, 2023 | 11:15 PM IST

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