facebookmetapixel
Advertisement
होर्मुज में बारूदी सुरंगों का जाल: समंदर की सुरक्षा और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर यह क्यों है एक गंभीर खतरा?Gen Z का गुस्सा? राघव चड्ढा का BJP में जाना युवाओं को नहीं आया रास, 24 घंटे में घटे 14 लाख फॉलोअर्स!IDFC First Bank Q4 Results: नेट प्रॉफिट ₹319 करोड़ पर पहुंचा, ₹NII 15.7% बढ़कर 5,670 करोड़ के पारSBI vs ICICI vs HDFC Bank: 20 साल के लिए लेना है ₹30 लाख होम लोन, कहां मिलेगा सस्ता?‘पोर्टेबल KYC से बदलेगा निवेश का अंदाज’, वित्त मंत्री ने SEBI को दिया डिजिटल क्रांति का नया मंत्रबीमा लेते वक्त ये गलती पड़ी भारी, क्लेम रिजेक्ट तक पहुंचा सकती है सच्चाई छुपानाआसमान से बरस रही आग! दिल्ली से लेकर केरल तक लू से लोग परेशान, IMD ने जारी की नई चेतावनीपेटीएम की दोटूक: RBI की कार्रवाई का बिजनेस पर कोई असर नहीं, कामकाज पहले की तरह चलता रहेगाअमेरिका में बड़ा बवाल! H-1B वीजा पर 3 साल की रोक का बिल पेश, भारतीय प्रोफेशनल्स पर असर की आशंकाUpcoming Rights Issue: अगले हफ्ते इन 4 कंपनियों के शेयर सस्ते में खरीदने का मौका, चेक करें पूरी लिस्ट

Gaganyaan mission: इसरो, नौसेना ने किया क्रू मॉड्यूल रिकवरी मॉडल का शुरुआती परीक्षण

Advertisement
Last Updated- February 09, 2023 | 11:15 AM IST
Gaganyaan Mission

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने भारतीय नौसेना के साथ मिलकर गगनयान मिशन (Gaganyaan mission) की तैयारियों के तहत ‘वाटर सर्वाइवल टेस्ट फेसिलिटी’ (डब्ल्यूएसटीएफ) में ‘कर्मीदल मॉड्यूल’ की पुनर्प्राप्ति संबंधी शुरुआती परीक्षण किए।

अंतरिक्ष एजेंसी ने बताया कि केरल के कोच्चि में नौसेना के डब्ल्यूएसटीएफ में परीक्षणों के लिए द्रव्यमान, गुरुत्वाकर्षण के केंद्र, बाहरी आयामों और नीचे उतरने पर वास्तविक कर्मीदल मॉड्यूल के बाहरी हिस्से के आधार पर काम करने वाले ‘कर्मीदल मॉड्यूल रिकवरी मॉडल’ (सीमएमआरएम) का उपयोग किया गया। ये परीक्षण गगनयान मिशन के लिए ‘कर्मीदल मॉड्यूल’ पुनर्प्राप्ति अभियानों की तैयारी का हिस्सा हैं।

गगनयान मिशन भारत सरकार की एजेंसियों की भागीदारी के साथ भारतीय जल में संचालित किया जाएगा। समग्र पुनर्प्राप्ति अभियान का नेतृत्व भारतीय नौसेना कर रही है। परीक्षण के तहत ‘कर्मीदल मॉड्यूल’ की पुनर्प्राप्ति के लिए आवश्यक संचालन क्रम पूरा किया गया।

इसरो के अनुसार, गगनयान परियोजना के तहत तीन सदस्यों के चालक दल को तीन दिन के मिशन के लिए 400 किलोमीटर की कक्षा में भेजकर और उन्हें भारतीय समुद्री जल में सुरक्षित रूप से पृथ्वी पर वापस लाकर मानव अंतरिक्ष उड़ान क्षमता के प्रदर्शन की परिकल्पना की गई है।

इसरो ने एक बयान में कहा, ‘‘चालक दल के सदस्यों का सुरक्षित मिलना किसी भी सफल मानवयुक्त अंतरिक्ष उड़ान के लिए अंतिम कदम होता है। ऐसे में यह बहुत महत्वपूर्ण है और इसे समय के कम से कम अंतराल के साथ करना होगा।’’

उसने कहा, ‘‘इसलिए बड़ी संख्या में परीक्षण करके विभिन्न परिदृश्यों में पुनर्प्राप्ति प्रक्रियाओं का व्यापक रूप से अभ्यास करने की आवश्यकता है। चालक दल के सदस्यों और कर्मीदल मॉड्यूल की पुनर्प्राप्ति के लिए मानक संचालन प्रक्रियाओं (एसओपी) को अंतिम रूप देने की जरूरत है। पुनर्प्राप्ति परीक्षण शुरू में एक बंद जलाशय में किए जाएंगे। उसके बाद वे एक बंदरगाह और फिर एक खुले समुद्र में होंगे।’’

इस बीच, इसरो ने कहा कि भविष्य के प्रक्षेपण यान में ‘बूस्टर स्टेज रिकवरी’ को सक्षम करने के लिए, विकास इंजन का पहला ‘थ्रॉटलिंग हॉट टेस्ट’ किया गया। इस दौरान 43 सेकंड की अवधि के लिए लक्षित 67 प्रतिशत थ्रस्ट लेवल थ्रॉटलिंग का लक्ष्य रखा गया।

Advertisement
First Published - February 9, 2023 | 11:10 AM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement