facebookmetapixel
Advertisement
फ्रांस में बोले पीएम मोदी- भारत अब सिर्फ टेक्नोलॉजी यूजर नहीं, बल्कि प्रोवाइडर भी; नहीं रुकेगी ‘सुधार एक्सप्रेस’ SIP खाते रिकॉर्ड हाई पर, लेकिन नेट ग्रोथ लगभग शून्य; म्युचुअल फंड इंडस्ट्री की बढ़ी चिंता Gold Outlook: अगले सप्ताह सोने का भाव घटेगा या बढ़ेगा? कैसी रहेगी चाल बता रहे हैं एक्सपर्ट्सफ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों ने की ‘मेक इन इंडिया’ की तारीफ, भारत को बताया इनोवेशन का देशयोगी सरकार की नई पहल: प्रदेश के 1.5 लाख युवाओं को NSE सिखाएगा फाइनेंशियल स्किलभारत में मेमोरी चिप निर्माण में बढ़ सकता है निवेश, उत्पादन बढ़ाएंगी मौजूदा कंपनियां : वैष्णवUpcoming IPO: मेनबोर्ड IPO पर ब्रेक; SME सेगमेंट में 4 नए इश्यू खुलेंगे, 3 लिस्टिंग भी तयMarket Outlook: महंगाई के आंकड़ों, फेडरल रिजर्व के ब्याज दर पर निर्णय से तय होगी शेयर बाजार की चालFPI की बिकवाली जारी, 2026 में अब तक शेयर बाजार से ₹2.87 लाख करोड़ निकाले100% एथेनॉल फ्यूल को कानूनी मंजूरी, ₹22 लाख करोड़ का आयात बिल कम करने की ओर बड़ा कदम

भारत में आएगा 1.2 करोड़ डॉलर का एआई फाउंडेशनल मॉडल

Advertisement

भाटिया ने कहा कि निवेश लागत में जीपीयू के इस्तेमाल की मौजूदा वाणिज्यिक दर शामिल है। हालांकि Meity की सब्सिडी योजना के तहत इसे घटाकर 1 डॉलर प्रति घंटा किया जा सकता है।

Last Updated- March 05, 2025 | 7:28 AM IST
AI
Representative image

सैन फ्रांसिस्को (अमेरिका) की रियल टाइम मशीन लर्निंग प्लेटफॉर्म टर्बोएमएल के संस्थापकों ने भारतीय भाषाओं पर आधारित AI Foundational models बनाने के लिए विश्व के सभी भारतीय मूल के Artificial Intelligence (एआई) शोधकर्ताओं को ए​क साथ लाने के लिए रणनीतिक पहल की है। कंपनी के संस्थापकों में से एक सिद्धार्थ भाटिया ने कहा है कि उन्होंने इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के साथ योजना पर चर्चा की है और हाल ही में उन्होंने केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव के साथ मुलाकात भी की है। इस दौरान उन्होंने वैष्णव को 10 महीनों के भीतर 1.2 करोड़ डॉलर से भी कम लागत में भारतीय भाषाओं पर आधारित एआई मॉडल बनाने के अपने प्रयास के बारे में जानकारी दी है। परियोजना के लिए सिलिकन वैली के निवेशकों और अन्य वैश्विक निवेशकों से रकम मिलेगी।

भाटिया ने बताया कि वह चैटजीपीटी, एंथ्रोपिक क्लाउड, गूगल जेमिनी और मेटा लामा जैसे मॉडलों का नेतृत्व करने वाली टीमों से भारतीय विशेषज्ञों के साथ-साथ मूल ट्रांसफॉर्मर पेपर के योगदानकर्ताओं को साथ लाने वाले हैं। प्रस्तावित मॉडल एक लाभकारी इकाई होगी ताकि इससे भविष्य में फिर निवेश किया जा सके।

Also Read: भारत में सरकारी दक्षता विभाग कितना जरूरी

भाटिया ने कहा, ‘विस्तृत विश्लेषण के बाद हमने पाया कि इसके लिए 1.15 करोड़ डॉलर के निवेश की जरूरत होगी, जिसमें इसे दो चरणों में तैयार करने और ग्राफिक प्रोसेसिंग यूनिट (जीपीयू) की लागत शामिल होगी और इसके अलावा डेटासेट के प्रशिक्षण और लोगों की भर्तियों पर खर्च किया जाएगा। हम अधिकतर कार्य भारत में ही करेंगे और करीब 30 लोगों की मूल टीम के साथ इसे पूरा किया जाएगा। इसे पूरा होने में करीब 10 महीने का वक्त लगेगा।’ हालांकि, उन्होंने अपने प्रयासों में मदद के लिए सरकारी सहायता की संभावना से भी इनकार नहीं किया है।

भाटिया ने कहा कि निवेश लागत में जीपीयू के इस्तेमाल की मौजूदा वाणिज्यिक दर शामिल है। हालांकि इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय की सब्सिडी योजना के तहत इसे घटाकर 1 डॉलर प्रति घंटा किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि चीन में डीपसीक की पेशकश के साथ ही कई शोधकर्ता चैटजीपीटी और अन्य जैसे अरबों डॉलर में तैयार किए गए एआई मॉडल के विपरीत अब कम कीमत वाले एआई मॉडल तैयार करने के लिए नवोन्मेषी तरीके निकाल रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत में फाउंडेशनल मॉडल बनाने में सबसे बड़ी चुनौती भाषाई विविधता के साथ-साथ इंटरनेट स्केल डेटा की है।

Advertisement
First Published - March 5, 2025 | 7:28 AM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement