शेयर बाजार में आज जोरदार गिरावट आई और बेंचमार्क सेंसेक्स तथा निफ्टी में आम बजट के बाद एक दिन में सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई। ईरान में अमेरिका के संभावित हमले और वैश्विक तेल आपूर्ति पर इसके असर के डर से निवेशकों ने घबराहट में बिकवाली की। भू-राजनीतिक अनिश्चितता और विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की बिकवाली से भी बाजार में दबाव देखा गया।
सेंसेक्स 1,236 अंक या 1.5 फीसदी की गिरावट के साथ 82,498 पर बंद हुआ। निफ्टी 365 अंक या 1.4 फीसदी नुकसान के साथ 25,454 पर बंद हुआ। दोनों सूचकांकों में 1 फरवरी के बाद सबसे तेज गिरावट आई। बंबई स्टॉक एक्सचेंज पर सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण 6.8 लाख करोड़ रुपये घटकर 465 लाख करोड़ रुपये रह गया।
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव से तेल की आपूर्ति में बाधा और उसके दाम बढ़ने की चिंता से निवेशक घबराए हुए हैं। ब्रेंट क्रूड 71 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था जो 1 अगस्त, 2025 के बाद इसका सबसे ऊंचा स्तर है। बीते दो सत्र में कच्चे तेल के दाम करीब 5 फीसदी बढ़ चुके हैं।
भारत कच्चे तेल की अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, ऐसे में इसके दाम बढ़ना देश के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है। ईरान की मीडिया ने बताया कि मंगलवार को कुछ समय के लिए होर्मुज स्ट्रेट को बंद कर दिया था। कच्चे तेल की करीब 20 फीसदी आपूर्ति इसी मार्ग से होती है।
आपूर्ति में लंबे समय तक बाधा अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति के नजरिये को भी मुश्किल बना सकती है। फेड की 27-28 जनवरी की बैठक के ब्योरे के मुताबिक कई अधिकारियों ने आशंका जताई थी कि ब्याज दर बढ़ाने की जरूरत पड़ सकती है।
अल्फानीति फिनटेक के सह-संस्थापक यूआर भट्ट ने कहा, ‘काफी सारा तेल होर्मुज स्ट्रेट से होकर गुजरता है और इसमें रुकावट आना चिंता की बात है। निवेशक पहले से ही आर्टिफिशल इंटेलिजेंस के विकास के बीच आईटी फर्मों के प्रदर्शन को लेकर परेशान हैं। अमेरिका के साथ व्यापार करार पर सहमति बन गई है लेकिन यह कैसे आगे बढ़ेगी, इस पर अभी भी अनिश्चितता बनी हुई है।’
भट्ट ने कहा कि भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने से विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक भारत के शेयर बाजार से निवेश निकाल सकते हैं।
उन्होंने कहा, ‘बाजार में थोड़ी बढ़त तभी होती है जब विदेशी निवेशक खरीदारी करते हैं और विदेशी निवेशक हाल ही में शुद्ध खरीदार बने हैं। अगर वे फिर से बिकवाली करना शुरू करते हैं तो दिक्कत बढ़ सकती है। ऐसे में ईरान की स्थिति का जल्द समाधान करने की जरूरत है।’
हालांकि बाजार के कुछ भागीदारों का मानना है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप इस साल के आखिर में होने वाले मध्यावधि चुनाव से पहले तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी नहीं होने देंगे। शेयर विशेष की बात करें तो सेंसेक्स में रिलायंस इंडस्ट्रीज में सबसे ज्यादा 2.1 फीसदी की गिरावट आई। एचडीएफसी बैंक में 0.9 फीसदी की गिरावट देखी गई। सेंसेक्स के सभी 30 शेयर नुकसान में बंद हुए।
विदेशी निवेशकों ने 881 करोड़ रुपये की शुद्ध बिकवाली की। घरेलू संस्थागत निवेशकों ने 596 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। बंबई स्टॉक एक्सचेंज पर 3,011 शेयर नुकसान में और 1,209 लाभ में रहे।
एसबीआई सिक्योरिटी में तकनीकी व डेरिवेटिव शोध के प्रमुख सुदीप शाह ने कहा, ‘आगे चलकर 25,350–25,300 का दायरा निफ्टी के लिए सपोर्ट का काम करेगा। 25,300 से नीचे लगातार जाने पर निफ्टी 25,150 तक फिसल सकता है और अल्पावधि में यह 25,000 के स्तर पर आ सकता है।’