भारतीय स्टार्टअप फर्में कुछ समय पहले अपने मुख्यालय को भारत लाने (रिवर्स फ्लिप) पर जोर दे रही थीं मगर बदलते हालात में उन्होंने ऐसी योजनाओं पर फिलहाल रोक लगा दी है। मूल्यांकन में कमी, आईटी शेयरों की बिकवाली, अमेरिका में बेहतर अवसर और टाइगर ग्लोबल मामले में फैसले के बाद कराधान पर बनी अनिश्चितता के कारण स्टार्टअप अपनी योजना पर नए सिरे से विचार कर रही हैं।
निवेश बैंकिंग सूत्रों के अनुसार कई कंपनियां, खास तौर पर 50 करोड़ डॉलर से अधिक मूल्यांकन वाली सॉफ्टवेयर-ऐज-ए-सर्विस (सास) क्षेत्र की कंपनियां पहले घरेलू बाजार में सूचीबद्धता पर ध्यान दे रही थीं मगर अब ऐसे कदम की व्यवहार्यता का पुनर्मूल्यांकन कर रही हैं। पिछले कुछ वर्षों में फोनपे, मीशो, रेजरपे, पाइन लैब्स, उड़ान और क्रेडिटबी सहित कई स्टार्टअप अपना मुख्यालय भारत लाई हैं या इस दिशा में काम कर रही थीं।
इससे पहले जेप्टो, ग्रो और फ्लिपकार्ट भारत वापस आ गई थीं। मीशो और ग्रो पहले ही घरेलू स्टॉक एक्सचेंज पर सूचीबद्ध हो चुकी हैं जबकि फोनपे, फ्लिपकार्ट और जेप्टो अभी तैयारी के विभिन्न चरण में हैं। इनमें से अधिकांश अपना मुख्यालय अमेरिका या सिंगापुर से भारत लाई थीं।
खेतान ऐंड कंपनी में पार्टनर संजय खान नागरा ने कहा, ‘शेयर बाजार में में तेजी को देखते हुए कई कंपनियां भारत वापस लौटने के लिए इच्छुक थीं लेकिन लागत, आय और कार्यान्वयन की चुनौतियों के कारण उन्होंने अपनी योजनाओं को फिलहाल रोक दिया है।’
भारत के आईटी क्षेत्र में मंदी और अमेरिका में आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (एआई) पर ध्यान केंद्रित करने वाले स्टार्टअप के लिए पूंजी जुटाना आसान होने से मुख्यालय देश में लाने का उत्साह कम हुआ है। 2025 में भारतीय एआई कंपनियों ने 98 राउंड में सिर्फ 30 करोड़ डॉलर जुटाए जबकि अमेरिकी फर्मों ने 849 राउंड में 122.5 अरब डॉलर जुटाए। पिछले पांच वर्षों में भारत में 969 एआई स्टार्टअप खुले जबकि अमेरिका में 4,092 स्टार्टअप स्थापित हुए।
3वन4 कैपिटल के संस्थापक पार्टनर सिद्धार्थ पई ने कहा, ‘विदेश जाने वाली ज्यादातर कंपनियां एसएएएस क्षेत्र से जुड़ी हैं। वैश्विक स्तर पर एसएएएस प्राइस-अर्निंग मल्टीपल (पीई गुणक) में कमी आई है और व्यापक रूप से बिकवाली हुई है। मूल्यांकन में कमी और निवेशकों की अनिश्चितता स्टार्टअप को इंतजार करने पर मजबूर कर रही हैं।’ उन्होंने कहा, ‘भारतीय आईटी शेयरों में हालिया बिकवाली भी चिंताजनक है क्योंकि यह निवेशकों की कमजोर मांग का संकेत देती है।’
बाजार के भागीदारों ने आगाह किया कि भारत की मजबूत आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) पाइपलाइन निकट भविष्य में काफी पूंजी खींच सकती है जिससे देर से आने वाले स्टार्टअप को मुख्यालय वापस लाने और सूचीबद्ध होने में प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ सकता है।
निशीथ देसाई एसोसिएट्स में अंतरराष्ट्रीय कर एवं निवेश कोष की लीडर इप्सिता अग्रवाल ने कर्मचारी प्रोत्साहन योजनाओं के पुनर्गठन सहित व्यावहारिक बाधाओं को इसकी वजह बताई।